बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए जरूरी है नियमित टीकाकरण

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12 प्रकार की जानलेवा बीमारियों से बचाव करता है टीका

सभी प्रकार से प्रमाणिक होते हैं बच्चों के टीके

सहरसा: जन्म से लेकर 5 वर्ष तक बच्चों को कर्ई प्रकार की जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए सरकार द्वारा नियमित टीकाकरण के माध्यम से उनका टीकाकरण किया जाता है। नियमित टीकाकरण के माध्यम से बच्चों को 12 प्रकार के जानलेवा बीमारियों टीबी, पोलियो, हेपटार्इटिस-बी, गलघोंटू, काली खांसी, टेटनस, हिमोफिलस इन्फ्लूऐंजा, निमोनिया, खसरा, रूबैला, जापनी इन्सेफलार्ईटिस, रोटावायरस से बचाव का टीका लगाया जाता है। बच्चों को दिये जाने वाले ये टीके स्वास्थ्य संबंधी सभी परीक्षणों पर परखे एवं तय मानकों के अनुरूप होते हैं।

12 प्रकार की जानलेवा बीमारियों से बचाव करता है टीका
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. कुमार विवेकानंद ने बताया टीकाकरण गंभीर बीमारियों से बचाने का एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी उपाय है। इससे पहले की गंभीर प्रवृति के रोगों का समाना उनसे होने पाये इससे बचाव का एकमात्र सुरक्षित उपाय टीकाकरण ही है। नियमित टीकाकरण के माध्यम से बच्चों को उक्त मुख्य बीमारियों के अलावा अन्य कर्इ प्रकार की बीमारियों से बचाव संभव हो पाता है। नियमित टीकाकरण रोग के प्रसार को कम करने में भी काफी सहायक है। बच्चों को गंभीर रोगों से बचाव के गर्भकाल से ही नियमित टीकाकरण कार्य आरंभ कर दिया जाता है। बच्चों को टिटनेस से बचाव के लिए गर्भवती महिलाओं को टीटी के दो डोज एक माह के अंतराल पर दिये जाते हैं। वहीं शिशु जन्म के 5 वर्ष तक विभिन्न चरणों में अन्य जानलेवा बीमारियों से बचाव के टीके दिये जाते हैं।

सभी प्रकार से प्रमाणिक होते हैं बच्चों के टीके-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. कुमार विवेकानंद ने बताया बच्चों को बीमरियों से बचाव के लिए दिये जाने वाले टीके सभी प्रकार से प्रमाणिक होते हैं। इन्हें बच्चों को दिये जाने से पहले अच्छी तरह से जांच कर ली जाती है कि ये सभी टीके बच्चों के लिए उपयुक्त हैं। इन टीकों के लेने से बच्चों पर किसी प्रकार का विपरीत परिणाम नहीं के बराबर परिलक्षित होते हैं। सम्पूर्ण टीकाकरण नहीं होने पर शिशु मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत अपने बच्चों को टीका लगवाकर जानलेवा बीमारियों से बचाव अवश्य करें।
क्या करते हैं ये टीके-
बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
पोलियो, खसरा, रोटा वायरस आदि से बचाव करते हैं।
बच्चों के लिए आवश्यक नये कोशिकाओं का निमार्ण करते हैं।
चेचक जैसी महामारी से बचाव करते हैं।
संक्रामक बीमारियों से बचाव करते हैं।
कुपोषण एवं जानलेवा बीमारियों से बचाते हैं।