जब एम्बुलेंस ही हो जाए बीमार,तो कैसे होगा मरीजों का इलाज

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बिहार की डबल इंजन की सरकार भले ही मरीजों को निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही हो, लेकिन जिम्मेदार अफसर सरकार की मंशा पर पानी फेरने से बाज नहीं आ रहे. बिहार के सहरसा में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां मरीज को सदर अस्पताल में छोड़ कर वापस जाने के दौरान एम्बुलेंस रास्ते में ही खराब हो जाती है।खराब एम्बुलेंस को दूसरा एम्बुलेंस बुलाकर से रस्सी के सहारे टोचन कर ठीक कराने ले जाया जाता है।यह तस्वीर सहरसा जिले के सौर बाजार-बैैैजनाथपुुुर सड़क मार्ग के चंदौर के समीप की है। इस एम्बुलेंस में कोई मरीज नही है । बल्कि एम्बुलेंस खुद बीमार है इसे खुद ईलाज की आवश्यकता है । जिसे दूसरे एम्बुलेंस से खींचकर ले जाया जा रहा है ।
 सोनवर्षाराज पी एच सी के एम्बुलेंस ड्राईवर रंजीत कुमार की माने तो मरीज को सदर अस्पताल छोड़ने के बाद लौटकर सोनवर्षाराज जा रहे थे इसी दौरान एम्बुलेंस खराब हो गया जिसे अभी सौर बाजार पी एच सी के एम्बुलेंस से खींचकर ठीक कराने ले जा रहे हैं।
ऐसे में सवाल उठता है की ऐसे खराब और जर्जर गाड़ी से अगर गंभीर मरीज को भेजा जाय और रास्ते में ही गाड़ी खराब हो जाय तो उस मरीज का क्या होगा।कैसे मरीज बेहतर ईलाज के लिये अस्पताल तक पहुंच पायेगा। क्या भगवान भरोसे पर है स्वास्थ्य का सिस्टम?