सड़कें जब सूनी होती हैं तो तब संसद आवारा हो जाता है : चेतन आनंद

700
सत्ता की दमनकारी कुकृत्य पर शर्मशार है बिहार
सहरसा : समाजवादी चिंतक डॉ. राममनोहर लोहिया ने कभी कहा था कि सड़कें जब सूनी होती हैं तो तब संसद आवारा हो जाता है। संघी फ़ासिस्टों के गोद में बैठे फर्जी सोस्लिस्ट नीतीश कुमार ने  लोहिया की ही जयंती पर आंदोलनकारियों पर बेरहमी से लाठी चलवाकर और सदन के अंदर रेपिड एक्शन फोर्स घुसाकर विधायकों को घसीट -घसीट कर यह साबित कर दिया। उक्त बातें श्री चेतन आनंद ने यहाँ जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कही।
उन्होंने आगे कहा कि गांधी,लोहिया, जयप्रकाश की कर्म भूमि और जनतंत्र की जननी बिहार कल सड़क से सदन तक सत्ता की दमनकारी कुकृत्य पर शर्मशार है। विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम के पारित होने पर पुलिस की निरंकुशता की जो आशंकाएं विपक्ष से लेकर आमजन के मन में व्याप्त थीं  कल उसका नंगा-नाच देखकर सदन के हम नए सदस्य हतप्रभ थे।
लोक तंत्र के मंदिर में कल साशन का लंपटपन देखकर यह सोचने को विवश हूं कि अगर यही लोकतंत्र है, तो फिर तानाशाही क्या है ? उन्होंने कहा कि कल का दिन जनतंत्र के इतिहास का काला दिन था ।
बांका जिलांतर्गत मोहनपुर निवासी संतोष सिंह की नृशंस हत्याकाण्ड पर अपनी प्रतिक्रिया में विधायक श्री चेतन ने कहा कि मुट्ठी भर चना के लिए एक निर्धन नौजवान संतोष सिंह को सरेआम पीट-पीट कर जिस तरह जान मार दी गई वह अत्यंत खेद जनक और अमानुषिक है। इस घटना ने राज्य में सुशासन की पोल पट्टी खोल कर रख दी है। घटना यह भी साबित करती है कि सामंतवाद किसी जाति का नहीं सोच का प्रतीक है। और गरीबी जाति पूछकर नहीं आती। श्री चेतन कल महागठबंधन के अन्य विधायकों के साथ बांका के मोहनपुर गाँव जाएंगे। जहां इस नृशंस हत्या कांड के खिलाफ अपराह्न 02:30 बजे कॉंग्रेस के पूर्व प्रत्याशी जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में उनकी “प्रतिकार सभा” है।उन्होने कहा कि हमारा लक्ष्य दोषियों कड़ी -कड़ी सजा दिलवाना और संतोष के बीवी बच्चो को इंसाफ दिलवाना है ।