क्षेत्र भ्रमण के दौरान लोगों को पोषण के महत्व की जानकारी दे रही अंशु

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सही पोषण के रूप में माँ का दूध व सन्तुलित आहार जरूरी

मधेपुरा : स्वस्थ जीवन की बुनियाद में पोषण का अहम योगदान माना जाता है.विगत डेढ़ वर्षों से जिला पोषण समन्वयक के पद पर कार्यरत जिला पोषण समन्वयक अंशु कुमारी ने इस बुनियाद को और मजबूत कर रही है. जिला पोषण समन्वयक अंशु कुमारी क्षेत्र  भ्रमण के दौरान लगातार आंगनवाड़ी सेविका तथा क्षेत्र के लोगों को पोषण के महत्व के बारे में बताती  हैं. वह  क्षेत्र को कुपोषण से सुपोषण की तरफ़ आगे ले जाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।जिला पोषण समन्वयक अंशु कुमारी बताती हैं कि पोषण की मजबूत बुनियाद निर्मित करने के लिए बाल कुपोषण को दूर करना जरुरी है. इसके लिए समुदाय को जागरूक करना बेहद जरुरी है. इसलिए वह क्षेत्र भ्रमण के दौरान माताओं को पोषण संबंधी जानकारी देते समय बाल कुपोषण की चर्चा जरुर करती है. वह बच्चों में के बौनापन, एनीमिया एवं दुबलापन के कारणों के बारे में विस्तार से बताती हैं. साथ ही इसे दूर करने के उपायों के बारे में भी बच्चों के माता-पिता को जानकारी देती हैं.  कुपोषित बच्चों का  मानसिक विकास नही होने के कारण वह जिंदगी की रेस में पीछे रह जाते हैं. इसे दूर करने के लिए एक घंटे के भीतर शिशु को स्तनपान की शुरुआत कराना, शिशुओं को छह माह तक केवल मां का दूध देना  एवं 6 माह के बाद संपूरक आहार की शुरुआत करना जरुरी होता है.. उन्होंने बताया ऐसी बातें अमूमन लोगों को मालूम होते हैं. लेकिन वह इसपर अमल नहीं कर पाते हैं. इसलिए वह लोगों को जानकारी देने के साथ यह भी सुनिश्चित करती हैं कि लोग ऐसी आदतों को अपने व्यवहार में लायें. जिला पोषण समन्वयक अंशु कुमारी कहती हैं कुपोषण का सीधा संबंध आहार में पौष्टिक तत्वों की कमी से होता है. इसलिए वह लोगों को पौष्टिक आहार की जानकारी जरुर देती हैं. साथ ही वह आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से वितरित की जा रही पोषक आहार की भी समुचित जानकारी देती हैं. उन्होंने बताया कुपोषण से बचने के लिए बच्चे के साथ किसी भी व्यक्ति के आहार में पोषक तत्वों की सही मात्रा होनी चाहिए. भोजन में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन और खनिज सहित पर्याप्त पोषक तत्वों का सेवन करना चाहिये। वर्तमान में पोषाहार राशि लाभुकों के बैंक खाते में सरकार द्वारा भेजी जा रही है, ताकि कोरोना संक्रमण से बचाव किया  जा सके। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं व धात्री महिलाओं को भी पौष्टिक आहार दिया जा रहा है, ताकि गर्भ में पलने वाला बच्चा कुपोषण का शिकार न हो सके।

कोरोना काल में बेहतर पोषण संक्रमण से बचाव में रहा असरदार
कोरोना संक्रमण के दौरान भी सभी का ध्यान कोरोना संक्रमण रोकथाम की तरफ अधिक हुआ. लेकिन कोरोना काल में भी इस बात की पुष्टि हुयी कि बेहतर पोषण संक्रमण से बचाव में असरदार साबित हो सकता है। इस दिशा में जिला पोषण समन्वयक अंशु कुमारी का प्रयास सराहनीय रहा। वह कोरोना को लेकर भी क्षेत्र के लोगों को जागरूक करने के साथ पोषण के बारे जानकारी देते रही. उन्होंने बताया अगर गर्भवती महिलाएं गर्भ के समय अपना खयाल अच्छे से रखेंगी तो होने वाले बच्चों में कुपोषण की सम्भावना खत्म हो जाएगी और नवजात शिशु बिल्कुल स्वस्थ होगा। इसलिए कुपोषण से दूरी के लिए सबसे पहले महिलाओं को जागरूक होना ज्यादा जरुरी है। उन्होंने बताया  वर्तमान में उनके पोषक क्षेत्र में गर्भवती  जिनके घर का वह नियमित दौरा कर शिशु पोषण के साथ गर्भवती एवं धात्री महिला के भी पोषण का ख्याल रख रही है।

क्या कहते हैं अधिकारी

आईसीडीएस के डीपीओ मोहम्मद कबीर ने बताया  जिला पोषण समन्वयक अंशु कुमारी जब भी क्षेत्र मे जाती है तो घर-घर जाकर लाभुको को अच्छे पोषण तथा कुपोषण से बचने के बारे समझाती है। साथ ही  आंगनबाड़ी केंद्र पर पोषण की मिलने वाली सुविधा के बारे में जानकारियां भी देती है  उन्होंने बताया ढ़ वर्ष  जिला पोषण समन्वयक के रूप में काम रही हैं। जिला पोषण समन्वयक अंशु कुमारी के अपने काम इतनी ऊर्जा से करते हुए और अन्य सभी  को बेहतर तरीके से काम करने की प्रेरणा तथा जानकारी देती हैं तथा इन्होंने जिला पोषण समन्वयक की जिम्मेदारी बखूबी निभाया है।