कालाजार प्रभावित क्षेत्र के प्रत्येक घर में होगा छिड़काव

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कालाजार से बचाव के लिए जिले मे चल रहा अभियान

कालाजार प्रभावित क्षेत्र के प्रत्येक घर में होगा छिड़काव

सिंथेटिक पाइराथाइराइड का होगा छिड़काव

55 टीम की गई है गठित

केयर इंडिया कर रहा है सहयोग

137 गांव का हुआ छिडकाव के लिए चयन

जिले मे कालाजार मरीज में आयी है कमी

सहरसा :जिले में कालाजार उन्मूलन अभियान के लिए छिड़काव की शुरुआत हो गयी है। जिले में इसकी शुरुआत दस प्रखंडों में हो गई है ।

जिला वेक्टर जनित नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. रविन्द्र कुमार ने कहा कालाजार को लेकर जिला पूरी तरह सजग है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग इस रोग से समाज को सुरक्षित रखने के लिए त्वरित गति से उन्मूलन कार्य चला रहा है।छिड़काव के लिए सिंथेटिक पाइराथाइराइड प्रखंडों में वितरण किया चुका है तथा शुक्रवार से दस प्रखंडों में सिंथेटिक पाइराथाइराइड का छिड़काव शुरू किया गया है ।

10 प्रखंडों में चलेगा अभियान:

केयर इंडिया की डीपीओ नासरीन ने कहा कि यह अभियान शुक्रवार(5 मार्च )से आरंभ होकर 66 दिनों तक चलेगा। इस काम में कुल 55 दल को लगाया गया है। जो कुल 1005095 की आबादी को कवर करेगी। जिसमें 199904 घरों में छिड़काव किया जाना है। छिड़काव में सिंथेटिक पाइराथाइराइड का इस्तेमाल किया जाएगा। अभियान में जागरूकता के लिए बैनर और पोस्टर भी प्रत्येक प्रखंडों में भेज दिया गया है।

कालाजार मरीज में आयी है कमी:

जिले के पिछले तीन वर्षो के आंकड़े यह बता रहे हैं कि प्रत्येक वर्ष कालाजार मरीजों की संख्या में कमी आई है। यह कमी निश्चित तौर पर जन ञजागरूकता और छिड़काव के कारण संभव हो पाया है। 2019 में जिले में 66 कालाजार के मरीज थे। जो 2020 में 30 हो गयी। 2021 फरवरी तक 2 कालाजार के मरीज है तथा सरकार के द्वारा सहरसा जिले को कालाजार मुक्त का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। इसे प्रतिवर्ष रोगी कार्यक्रम के तौर पर चलाना है जिससे कि कालाजार रोगियों की संख्या में कमी आ सके ।

ऐसे फैलता है रोग:

कालाजार रोग लिश्मैनिया डोनोवानी परजीवी के कारण होता है। इसका चक्र मनुष्य और बालू मक्खी पर निर्भर करता है। यह परजीवी मनुष्य तथा बालू मक्खी में ही जीवित रहता है। दो सप्ताह से अधिक बुखार व अन्य विपरीत लक्षण शरीर में महसूस होने पर अविलंब जांच कराना अति आवश्यक है। सदर अस्पताल में इसका समुचित इलाज संभव है एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर भी इसका समुचित इलाज संभव है। कालाजार की मक्खी नमी एवं अंधेरे स्थानों पर ज्यदा पनपती है।

मरीजों को 7100रु मिलती है क्षतिपूर्ति राशि:

जिला वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. रविन्द्र कुमार ने बताया कि प्रति कालाजार पीड़ित मरीज को 7100 रुपये की राशि श्रम क्षतिपूर्ति राशि के रूप में दी जाती है। जिसमें मरीजों के लिए 6600 रुपये की राशि मुख्यमंत्री कालाजार राहत अभियान के अंतर्गत एवं 500 की राशि भारत सरकार के तरफ से दी जाती है । कालाजार का एक अलग रूप है जिसे पीकेडीएल कहते हैं। इस रोग में चमड़ी पर सफेद दाग धब्बा,चेहरे पर दाना पड़ जाता है। जिसे हम चमड़ी वाला कालाजार या पीकेडीएल कहते हैं। पीकेडीएल रोग के इलाज के उपरांत रोगी को भारत सरकार के तरफ से 4000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है।

कालाजार के लक्षण-

दो हप्ते से ज्यादा समय से बुखार, खून की कमी (एनीमिया) , जिगर और तिल्ल्ली का बढ़ता, भूख न लगना, कमजोरी तथा वजन में कमी होना है।