सुरक्षित गर्भपात विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

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प्रमंडल के चिकित्सा पदाधिकारी एवम् स्टाफ नर्स का  प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधन इकाई, कोसी के तत्वावधान में 12 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

एम्.टी. पी. एक्ट 1971 की दी गई विस्तृत जानकारी

सहरसा : अगर सुरक्षित गर्भपात कराया जाय तो मातृ मृत्यु दर में कमी आएगी। शुक्रवार को रीजनल ट्रेनिंग सेंटर, सदर अस्पताल में क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधन इकाई के तत्वाधान में स्वास्थ्य विभाग द्वारा
सुरक्षित गर्भपात प्रशिक्षण का शुभारंभ किया गया। एम्.टी. पी. अधिनियम 1971 के दिशा निर्देशानुसार राज्य के चयनित ज़िलों में पदस्थ चिकित्सा पदाधिकारियों का सुरक्षित गर्भपात विषय पर प्रशिक्षण का आयोजन आईपास के सहयोग से किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ एवम् अध्यक्षता क्षेत्रीय अपर निदेशक के द्वारा की गयी। इस प्रशिक्षण में 3 चिकित्सक एवं 3 ए. एन. एम. को प्रशिक्षण दिया जाना है। विदित हो कि मातृ मृत्यु दर को कम करने एवं सुरक्षित गर्भपात तथा काउन्सिलिन्ग के लिये उन्मुखीकरण कर दूरस्थ क्षेत्र में भी सेवा प्रदान करने के लिये 12 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जायेगा। प्रशिक्षण में प्रशिक्षक के रूप में डॉ अमृता आनंद एवं डॉ विभा रानी मौजूद थी। प्रशिक्षण में अविनाश कुमार क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक, विवेक चतुर्वेदी क्षेत्रीय लेखा प्रबंधक एवं अविनाश कुमार झा क्षेत्रीय अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी मौजूद थे। क्षेत्रीय अपर निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं, कोशी प्रमंडल ने बताया कि मातृ मृत्यु दर में कमी लाना है।

गर्भपात को लेकर क्या कहता है एम टी पी एक्ट 1971

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट 1971 बताता है कि किन परिस्थितियों में महिला अपना एबॉर्शन करा सकती है। किनसे करा सकती है, कहां करा सकती है। लेकिन इन सभी नियमों को समझने से पहले ये बता देना ज़रूरी है कि एबॉर्शन और मिसकैरिज में अंतर होता है। एबॉर्शन यानी मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी। यानी दवाइयों या मेडिकल सहायता से गर्भपात कराना। वहीं मिसकैरिज का मतलब होता है प्राकृतिक कारणों की वजह से गर्भपात होना, या बिना किसी मेडिकल छेड़छाड़ के बच्चे का गिर जाना।

कौन करा सकता है गर्भपात?

1. प्रेगनेंट महिलाएं जिनकी प्रेग्नेंसी 12 हफ़्तों से कम की हो। तब तक किसी एक रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर की सलाह पर वो एबॉर्शन करा सकती हैं।

2. ये समय सीमा 20 हफ़्तों तक बढ़ाई जा सकती है, अगर दो मेडिकल प्रैक्टिशनर हामी भरें एबॉर्शन की।

किस आधार पर कराया जा सकता है एबॉर्शन?

1. या तो मां की जान को खतरा हो. या फिर बच्चे के पैदा होने पर उसके विकलांग या मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का खतरा हो।

2. बच्चे के जन्म लेने से पहले ही कोई ऐसा विकार पता चले जिसका कोई इलाज नहीं है।

3. या फिर ऐसी हालत में जब इस प्रेग्नेंसी से या बच्चे के पैदा होने से महिला को गहरी मानसिक पीड़ा हो।

4. जैसे रेप के मामले या फिर शादी-शुदा महिलाओं के कॉन्ट्रासेप्टिव (गर्भ निरोधक) फेल हो जाने के मामले।

कहां और किससे कराया जा सकता है?

1. सरकार द्वारा रजिस्टर किए हुए मेडिकल प्रैक्टिशनर ही एबॉर्शन की अनुमति दे सकते हैं।

2. सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त क्लिनिक में ही इसे कराया जाना चाहिए. चाहे वो सरकारी हो या प्राइवेट. लेकिन उसका MTP सेंटर के रूप में रजिस्टर्ड होना आवश्यक है।

3. यदि आस- पास ऐसी कोई सुविधा नहीं, तो तब तक के लिए ऐसे सेंटर में ही एबॉर्शन करवाना चाहिए जिसे सरकार से तदर्थ अनुमति दी गई हो।

4. चाहे पिल्स लेकर किया गया एबॉर्शन हो या एनेस्थेसिया देकर सर्जिकली किया गया एबॉर्शन हो। ये डॉक्टर की गाइडेंस में ही होगा। उसके बिना एबॉर्शन नहीं करवाया जा सकता।