मातृ-शिशु मृत्यु में कमी लाने में परिवार नियोजन अहम:डीसीएम

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परिवार नियोजन काउंसलर एवं एएनएम को प्रोजेक्टर के माध्यम से एक दिवसीय काउंसिलिंग का प्रशिक्षण दिया गया

जिला स्वास्थ समिति तथा केयर इंडिया के सहयोग से दिया गया प्रशिक्षण

सहरसा  : परिवार नियोजन साधनों पर लोगों को जागरूक करने के मकसद से स्वास्थ्य विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। जिला से सामुदायिक स्तर पर कई जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, सब सेंटर व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात परिवार नियोजन काउंसलर एवं एएनएम को प्रोजेक्टर के माध्यम से एक दिवसीय काउंसिल प्रशिक्षण दिया गया। ब्लाक की 12 एएनएम ने प्रतिभाग किया।

बुधवार को प्रशिक्षण का आयोजन सिविल सर्जन डॉ. अवधेश कुमार की अध्यक्षता में डीआईईसी भवन, सदर अस्पताल परिसर में किया गया तथा आयोजित प्रशिक्षण में प्रशिक्षक डीसीएम राहुल किशोर तथा केयर इंडिया के सरवन कुमार प्रशिक्षक के रूप मे मौजूद थे तथा डीसीएम राहुल किशोर ने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए परिवार नियोजन की अहम भूमिका है। इसको अपनाकर कम उम्र में गर्भावस्था व कम अंतराल पर गर्भवती होने से बच्चों में जोखिम व खतरा, बढ़े एनीमिया के कारण गर्भावस्था में होने वाली जलिटता से बचा जा सकता है। उन्होने कहा कि एएनएम ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएनडी) में टीकाकरण एवं प्रसव पूर्व जांच के साथ ही परिवार नियोजन पर महिलाओं को सलाह दें। इस मौके पर डीपीएम विनय रंजन उपस्थित थे!

सिविल सर्जन डॉ अवधेश कुमार ने बताया कि परिवार नियोजन काउंसलर एवं एएनएम को निम्न बातों पर ध्यान देना बहुत ही अति आवश्यक है:

#शादी 18 साल के बाद पहला बच्चा 20 साल के बाद दूसरा बच्चा इसके बाद और बंध्याकरण कम से कम 22 साल के बाद कराना चाहिए.

#महिला को प्रेरित करना कि वह अपने बच्चों एवं परिवार के भविष्य के बारे में सोचें और इस पर अपने पति से चर्चा करें तथा उन्हें यह बताएं कि कैसे अपने बच्चों के बारे में सोचा जाए ताकि परिवार में क्या सुख सुविधा की चीज हो सके तथा जितना छोटा परिवार उतना सुखी परिवार माना जाता है.

सिविल सर्जन डॉ.अवधेश कुमार ने बताया कि बार बार मां बनने से महिलाओं में खून की कमी हो सकती है हड्डी कमजोर हो सकती है कमजोरी के कारण मां की जान को खतरा हो सकता है और आने वाला बच्चा समय समय से पहले जन्म ले सकता है कमजोर हो सकता है या मर भी सकता है दोबारा गर्भवती होने पर दूध भी कम या बंद हो जाता है जिस से भी पहले बच्चे को सही पोषण नहीं मिल पाता है , जिस कारण बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास कम हो जाता है और जीवन भर मानसिक रूप से बच्चे कमजोर हो जाते हैं.