400 वर्ष पुराना रहा है बोरने भगवती स्थान का इतिहास

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बागमती नदी तट पर अवस्थित है मंदिर

बिहार के खगड़िया ज़िले के चौथम प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत बोरने गांव है। इसी गांव के प्रवेश में ही बागमती नदी तट पर अवस्थित है माँ मनसा देवी (बोरने)स्थान मंदिर।कहा जाता है कि बागमती नदी तट पर अवस्थित मंदिर चार सौ वर्ष पुराना है।

मंदिर के गर्भ गृह की तस्वीर

आज भी इस मंदिर में नाव से नदी पार कर दुर-दुर से श्रद्धालु मन्नते मांगने आते है और मुरादें पूरी होने पर दूध व लावा चढ़ाया जाता है।यँहा वर्ष में दो बार नाग पंचमी एवं अगहन पंचमी में मेला लगता है।जिसमे श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है।

कहा जाता है कि चार सौ वर्ष पूर्व बागमती नदी में विलीन केवटा गांव के समीप नदी की उपधारा के बीच कुछ चरवाहों को माता का दर्शन हुआ और यह बातें गांव में फैलते ही स्थानीय लोगों के द्वारा माँ की पूजा-अर्चना की जाने लगी।

महादेव मंदिर
मान्यताओं पर यदि विश्वास करें तो एक भक्त को स्वपन आने के उपरांत बोरने के श्रद्धालुओं ने माता को बोरने गांव लाने की ठान ली।जिसके बाद स्वपन के अनुसार देवका गांव स्थित ऐतिहासिक माता भगवती मंदिर से हर कदम पर बलि दिया जाने लगा।इस क्रम में इलाके का छागर समाप्त हो जाने के बाद कद्दू व झींगा का बलि दिया जाने लगा।कहा जाता है कि उस वक़्त कद्दू व झींगा से भी रक्त प्रवाह निकल रहा था।इसके उपरांत माता के मंदिर का गेट माँ कात्यानी मंदिर के सामने की तरफ खोला गया।

ग्रामीण अरविंद सिंह की माने तो गौतम वंश के द्वारा मंदिर की स्थापना किया गया था और आज भी उनके परिजनों के द्वारा पूजा-अर्चना किया जा रहा है।इस मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए सोमबार,बुधवार एवं शुक्रवार को विशेष दिन माना जाता है ।

बागमती नदी

बोरने गांव स्थित बोरने भगवती स्थान प्रांगण में ठीक मंदिर के सामने प्राचीन महादेव मंदिर अवस्थित है जिसमे विशालकाय शिवलिंग सहित पार्वती,गणेश सहित अन्य मुर्तिया है।

प्राचीन अभिलेख
मंदिर प्रांगण में एक विशालकाय पीपल का पेड़ है जिसके नीचे अतिप्राचीन काले पत्थरों पर लिखे अभिलेख मौजूद है।
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