LIVE: सहरसा में पीएम मोदी बोले: जंगलराज वालों को भारत माता की जय से सिरदर्द होने लगता है

Kunal Kishor
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अररिया और सहरसा में चुनावी रैली को संबोधित किया
सहरसा : बिहार में जहां एक तरफ दूसरे चरण के लिए मतदान जारी है। वहीं तीसरे और आखिरी चरण के लिए राजनीतिक पार्टियों ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अररिया और सहरसा में चुनावी रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि राज्य में एक बार फिर से एनडीए की सरकार बनने वाली है। प्रधानमंत्री ने महागठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्हें भारत माता की जय, जय श्री राम बोलने वालों से दिक्कत है। अब ऐसे लोग एक साथ आकर वोट मांगने के लिए आए हैं। ऐसे लोगों को मुंहतोड़ जवाब दीजिएगा। उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों को जंगलराज के इतिहास वालों से सतर्क रहना है। ये केवल अपने परिवार के लिए जीते हैं।
रैली में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश लोकल फॉर लोकल के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार के हर जिले में कम से एक एक उत्पाद ऐसा है जो दुनिया में धूम मचा सकता है। इसके लिए प्रधानमंत्री ने खादी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में आत्मनिर्भर बिहार की नींव पड़ी है। आज बिहार अराजकता और असुरक्षा के अंधकार को पीछे छोड़ चुका है।
बिहार में जंगलराज लाने वालों के साथियों को भारत माता से दिक्कत है। कभी एक टोली कहती है कि भारत माता की जय के नारे मत लगाओ, कभी दूसरी टोली को भारत माता की जय से सिरदर्द होने लगता है। ये भारत माता के विरोधी अब एकजुट होकर बिहार के लोगों से वोट मांग रहे हैं।
बिहार को जंगलराज बनाने वालों के साथी, उनके करीबी क्या चाहते हैं, आपको पता है? वो चाहते हैं, आप भारत माता की जय के नारे न लगाएं। छठी मैया को पूजने वाली इस धरती पर, जंगलराज के साथी चाहते हैं कि भारत माता की जय के नारे न लगें। वो चाहते हैं, आप जय श्री राम भी न बोलें। बिहार के चुनाव प्रचार में मां भारती का जयकारा करना इन लोगों को रास नहीं आ रहा।
बिहार की अनेकों वीर माताएं, अपने लाल, अपनी लाडली को राष्ट्ररक्षा के लिए समर्पित करती हैं। बिहार के शूरवीर देश की सीमा, देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देते हैं, देश की रक्षा करते हैं।
जब भी मैं बिहार आता हूं, मखाने की बात जरूर करता हूं। ऐसा नहीं है कि मेरे आने के बाद ही सबको ये पता चला कि यहां मखाना इतना ज्यादा होता है, इतना अच्छा होता है। ये बात पहले से भी पता थी लोगों को, लेकिन गर्व के साथ हम अपनी चीजों का बखान नहीं करेंगे तो कौन करेगा।
हमारे बुनकरों की मेहनत का गौरव बढ़ गया है। पहले जितनी खादी बिकती थी, उससे कई गुना ज्यादा खादी आज बिक रही है। 2014 से पहले 25 साल में जितने वर्ष की खादी हमारे देश में बिकी थी उससे ज्यादा की खादी सिर्फ पिछले पांच साल में बिक चुकी है।
बिहार को जंगलराज बनाने वालों के साथी, उनके करीबी क्या चाहते हैं, आपको पता है? वो चाहते हैं, आप भारत माता की जय के नारे न लगाएं। छठी मैया को पूजने वाली इस धरती पर, जंगलराज के साथी चाहते हैं कि भारत माता की जय के नारे न लगें।
बिहार की अनेकों वीर माताएं, अपने लाल, अपनी लाडली को राष्ट्ररक्षा के लिए समर्पित करती हैं। बिहार के शूरवीर देश की सीमा, देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देते हैं, देश की रक्षा करते हैं।
जब भी मैं बिहार आता हूं, मखाने की बात जरूर करता हूं। ऐसा नहीं है कि मेरे आने के बाद ही सबको ये पता चला कि यहां मखाना इतना ज्यादा होता है, इतना अच्छा होता है। ये बात पहले से भी पता थी लोगों को, लेकिन गर्व के साथ हम अपनी चीजों का बखान नहीं करेंगे तो कौन करेगा।
मैं आज देश के 130 करोड़ देशवासियों को आग्रह करता हूं। आने वाले दिनों में धनतेरस, दीवाली, छठ का त्योहार आ रहा है। मेरा आपसे आग्रह है कि जितना संभव हो सके, लोकल चीजें ही खरीदें। इससे दीवाली सिर्फ आपके घर ही नहीं, उस गरीब सामान बेचने वाले के घर भी होगी।
अब लोग शॉपिंग से पहले देखते हैं कि सामान कहां बना है, क्या भारत में बना है या नहीं है। स्थानीय लोगों का सामान जब बिकता है तो इसका फायदा देश को ही होता है। इसलिए वोकल फॉर लोकल को आगे बढ़ाएं।
 मैं खादी का उदाहरण देता हूं। ऐसा नहीं है कि जब एनडीए सरकार आई, तो कोई नई तरह की खादी का जन्म हुआ है। बीते वर्षों के प्रयासों से अब खादी का गौरव, हमारे बुनकरों का गौरव बढ़ गया है। अब लोगों में खादी के लिए क्रेज बढ़ा है, जिससे खादी की बिक्री बढ़ी है। पहले जितनी खादी बिकती थी, उससे कई गुना ज्यादा खादी आज बिक रही है। लोग खरीद रहे हैं, दुनिया में भी मांग बढ़ रही है। 2014 से पहले 25 साल में जितने वर्ष की खादी हमारे देश में बिकी थी उससे ज्यादा की खादी सिर्फ पिछले 5 साल में बिक चुकी है।
एनडीए सरकार हमारे किसानों के उत्पादों को कितना संरक्षण दे रही है, इसका बहुत बड़ा उदाहरण है हमारा जूट से जुड़ा सेक्टर। आज जब देश सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति की तरफ तेजी से अपने कदम बढ़ा रहा है, तो इसका सीधा लाभ हमारे जूट किसानों को हो रहा है, जूट उद्योग को हो रहा है।
बिहार के हर जिले में कम से कम एक ऐसा उत्पाद है, जो देश-विदेश के बाजारों में धूम मचा सकता है। आत्मनिर्भर बिहार के लिए हर जिलों के ऐसे उत्पादों को निखारने, संवारने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने की प्रक्रिया शुरु हो चुकी है।
जब वो कर्ज तले दब जाते थे, उनके सामने बहुत बड़ा संकट आ जाता था। इसी संकट से उन्हें निकालने के लिए छोटे किसानों, पशुपालकों, मछलीपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा से जोड़ा जा रहा है।
हमारे जो छोटे किसान हैं, पशुपालक हैं, मछली के कारोबार से जुड़े साथी हैं, वो भी लंबे समय तक बैंकों के बाहर से कर्ज लेने के लिए मजबूर थे। जरूरत पड़ने पर उन्हें बहुत ज्यादा ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज मिलता था।
देश वोकल फॉर लोकल के मंत्र पर काम कर रहा है।
बिहार के उत्पाद देश-विदेश में धूम मचा सकते हैं।
बिहार के चुनिंदा उत्पादों की पहचान भी हो गई है।
हर जिले के उत्पादों की प्रोसेसिंग पर काम जारी है।
बिहार में ही रोजगार, स्वरोजगार के अवसर बनेंगे।
मुद्रा योजना के तहत बिहार में करीब ढाई करोड़ ऋण बिना गारंटी के आवंटित किए जा चुके हैं। इसमे भी करीब पौने 2 करोड़ तो हमारी महिला उद्यमी हैं। 50 लाख से अधिक साथी ऐसे हैं जिन्होंने पहली बार इस योजना के तहत ऋण लिया है।
जनधन योजना के कारण, कोरोना के इस संकट काल में बिहार की लाखों बहनों के बैंक खाते में सीधे सैकड़ों करोड़ रुपए जमा हो पाए हैं। यही जनधन योजना है, जिसके कारण कोरोना काल में भी बिहार के लाखों किसान परिवारों के बैंक खाते में सीधी मदद पहुंच पाई है।
आज बिहार देश के उन राज्यों में है, जहां शहरों में सड़कें देर रात तक भी आबाद रहती हैं और बाजारों में चहल-पहल रहती है। आज बिहार असुरक्षा और अराजकता के अंधेरे को पीछे छोड़ चुका है:
बीते दशक में नीतीश जी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने आत्मनिर्भर बिहार की मजबूत नींव रखी है। बिहार में बिजली, पानी, सड़क जैसी मूल सुविधाएं आज गांव-गांव पहुंच चुकी हैं। आज बिहार देश के उन राज्यों में है, जहां बिजली की खपत सबसे अधिक होती है।
बिहार के लोग आत्मनिर्भर भारत-आत्मनिर्भर बिहार के लिए प्रतिबद्ध हैं, कटिबद्ध हैं। बीते वर्षों में एक नए उदीयमान, आत्मनिर्भर और गौरवशाली अतीत से प्रेरित बिहार की नींव रखी जा चुकी है।अब इस मजबूत नींव पर एक भव्य और आधुनिक बिहार के निर्माण का समय है।
आत्मनिर्भर बिहार यानी बिहार का आईटी हब के रूप में विकास। आत्मनिर्भर बिहार यानी बिहार में नए दुग्ध प्रोसेसिंग यूनिट का विकास। आत्मनिर्भर बिहार यानी बिहार में नए कृषि उत्पादक संघों का निर्माण। आत्मनिर्भर बिहार यानी बिहार के कुटीर उद्योगों का विकास।
*बिहार ने असुरक्षा और अराजकता के अंधकार को पीछे छोड़ा।
*नीतीश कुमार के नेतृत्व में आत्मनिर्भर बिहार की नींव पड़ी।
*बिहार ने कोरोना के खिलाफ सफल लड़ाई लड़ी है।
*बिहार सरकार ने योजनाओं का लाभ पहुंचाया
*वोट की ताकत को कम मत आंकना
बिहार के गरीब को अपनी मर्जी की सरकार बनाने का अधिकार ही नहीं था। जंगलराज में चुनाव के दिन गरीब को घर से बाहर ही नहीं निकलने दिया जाता था, बूथ के बूथ लूट लिए जाते थे।
आपके एक वोट की ताकत को कम मत आंकना। जिस प्रकार से श्रीकृष्ण ने एक उंगली पर गोवर्धन को उठाया था, जिस प्रकार से ग्वालों ने समर्थन किया था, वैसे ही आपकी उंगली पर लोकतंत्र के सौभाग्य का चिह्न लगने वाला है। आपके एक-एक वोट की ताकत बिहार के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है।
जंगलराज ने बिहार के सामर्थ्य के साथ जो विश्वासघात किया, उसे बिहार का हर नागरिक अच्छे से जानता है। जुबान पर बार-बार गरीब का नाम वालों ने गरीब को ही चुनाव से दूर कर दिया था। बिहार के गरीब को अपनी मर्जी की सरकार बनाने का अधिकार ही नहीं था।
बीते दिनों में बिहार के करीब हर क्षेत्र में मैं गया हूं। जनभावनाओं के देखा है, समझा है। अभी दूसरे चरण के मतदान के जो ट्रेंड मिल रहे हैं, उसने तस्वीर साफ कर दी है। बिहार का जनादेश स्पष्ट है, बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने जा रही है।