शिक्षकों ने चुनाव में बिहार सरकार को सबक सिखाने का लिया संकल्प

दिनेश सिंह
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कोशी एक्सप्रेस: बी. चन्द्र की रिपोर्ट

               मधुबनी: नई सेवाशर्त नियमावली से बिहार में पंचायतीराज संस्थाओं के अंतर्गत नियुक्त सभी शिक्षक छुब्ध हैं। सभी शिक्षक-शिक्षिकाएँ अपने शिक्षक संघ के तत्वाधान में शिक्षक दिवस के अवसर पर काली पट्टी लगा कर अपनी संवेदना व्यक्त की।

               “बदला लो-बदल डालो” के नारे के साथ शिक्षकों ने आगामी विधानसभा चुनाव में बिहार सरकार को सबक सिखाने का संकल्प लिया।

               बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के राज्य व्यापी आह्वान पर संघ के खुटौना प्रखंड अध्यक्ष दिलीप कुमार अमर की अध्यक्षता में स्थानीय बीआरसी में शिक्षकों ने संकल्प सभा का आयोजन किया तथा आगामी बिहार विधान सभा चुनाव में सरकार को सबक सिखाने का संकल्प लिया। सभा को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष संजीव कुमार कामत ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा जारी नया सेवा शर्त नियमावली 2020 शिक्षकों के साथ धोखा है। शिक्षकों को राज्य कर्मी का दर्जा नहीं दिया गया तथा पेंशन, ग्रूप बीमा, ग्रेच्युटी इत्यादि मुलभुत और कल्याणकारी सुविधाओं का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। प्रोन्नति, स्थानांतरण, सेवा निरंतरता जैसे गैर वितीय सुविधाएं भी सही तरीके से नहीं दी गई है। सरकार के द्वारा वेतन वृद्धि की घोषणा छलावा है।

                  प्रवक्ता ख़ालिद अंजुम ने बिहार सरकार के इस दोहरी नीति की जमकर आलोचना की तथा सेवा शर्तो में सुधार करने तथा राज्य कर्मी का दर्जा देते हुए सहायक शिक्षकों की भांति सभी सुविधाएं प्रदान करने की मांग की। अन्यथा आगामी बिहार विधान सभा चुनाव में सरकार को इसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा।
सभा को आनंद कुमार, अजय यादव,रामनाथ मंडल, सुरेन्द्र चौपाल, प्रवीण रंजन, शंभूशरण गोईत, कृष्ण कुमार परसैला, रामलोचन पंडित, मो नियाज अंसारी सहित दर्जनों संघीय प्रतिनिधियों ने संबोधित किया।