नियति है भदुआर गांव के लोगों का मौनसून के दौरान रतजगा करना

(मधुबनी अंधराठाढ़ी से मोo आलम अंसारी की रिपोर्ट)

अंधराठाढी। मौनसून दस्तक देने लगा है। प्रखण्ड के भदुआर और हरना गांव के लोगों का मारे भय दिल अभी से कांपने लगा है। बताते चलें कि भदुआर और हरना कमला बलान पूर्वी तटबंध से बिल्कुल सटे गांव हैं। तटबंध और नदी धारा के बीच की दूरी भी बहुत कम है। यहां तटबंध के कई कमजोर बिंदु भी है। गांव के ब्रह्मस्थान के निकट दो बार तटबंध टूट चुका हैं। वर्ष 2002 व 2004 में  यहां तटबंध टूटा था। तकरीबन 62 घर बाढ़ में बह गए थे। वर्ष 2017 और 2019 में भी तटबंध में रिसाव होने लगा था। कड़ी मशक्कत से ग्रामीणों में इसे बचाया था। संयोग से रखवारी में तटबंध टूटा और भदुआर बचा था। पिछले मानसून में यहां तटबंध में दर्जन जगहों पर रेनकट हुआ था। उगी बड़ी बड़ी घासों से ढके ये रेन कट अब नजर भी नही आते हैं। रेन कट अब बड़े बड़े होल में तब्दील हैं।माधव चौक भदुआर से हरना के बीच 2 किमी तटबंध पर पक्की सड़क है। एनएच झंझारपुर अंधराठाढ़ी भाया भदुआर एक बहुत लोकप्रिय रास्ता है। इसपर हमेशा  वाहनों का भारी दवाब रहता है। तटबंध उंचीकरण में बालू का बुर्ज ही खड़ा कर दिया गया है।हल्की बारिश में भी रेनकट गढ्ढा में तब्दिल हो जाते हैं। मानसून के दौरान रतजगा करना ग्रामीणों की।नियति बन गयी है। तटबंध पर रात भर पहरा देना और रिसते तटबंध को पैचअप करना इन लोगों का रूटीन रहता है।जून महिना का दूसरा सप्ताह बीत गया । मानसून की आहट भी सुनाई पड़ने लगी है।बिडम्बना है कि अधिकारियों ने अबतक कमला नदी पूर्वी तटबंध का निरीक्षण नहीं किया गया है। रेनकट भरे नही गए हैं। सीताराम महतो, जगदेव महतो, जनक महतो आदि ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ नियंत्रण के अधिकारियों ने इस बार भदुआर और हरना  गांव को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। रेनकट और होल को अबतक नही भरवाना उसका साक्ष्य है। अब विभाग के पास समय नही है कि  मौनसून आने के पहले गढ्ढे भरे जा सके। मिथिला स्टूडेंट यूनियन और ग्रामीणों ने भी अधिकारियों को रेन कट और होल की सूचना दे चुके हैं।विभाग मौन है। ग्रामीणों के मुताविक बिभागीय मुलाजिम बाढ़ आने और  तटबंध  टूटने के बाद ही कुछ करने का मन बना लिया है।