बड़ी नोकरी में वह सकून नही जो किसानी देती है – लक्ष्मी कामत

मधुबनी अंधराठाढ़ी से मोo आलम अंसारी की रिपोर्ट

अंधराठाढ़ी डॉक्टर ,इंजीनियर आदि की उँच्ची डिग्रियां प्राप्त कर अच्छी अच्छी नोकरिया हासिल करना और आरामदेह जीवन बसर करना आज के युवा का पहला सपना होता है। उनके ख्वाहिशों की सूची में कृषि तो बिल्कुल नही रहती। दीगर बात है कि आज की ही  दौर में  कुछ वैसे भी शख्स है जो बड़ी डिग्रियों के वाद भी किसान बनना पसंद करते हैं। एक ऐसा भी शख्स है अंधराठाढ़ी  प्रखण्ड के नंदन धकजरी गांव में।  नाम है उसका लक्ष्मी कामत।उसने 1995 में मुंबई की एक बड़ी कंपनी की नौकरी छोड़ गांव में खेती करना शुरू किया था। आज वे अंधराठाढ़ी के सैकड़ों किसानों के उत्प्रेरक हैं। वे सब्जी और फल का अच्छा  किसान माने जाते है। उनके खेत मे लीची लदे पेड़ों को देखकर कृषि वैज्ञानिकों भी हैरान हैं। लोगों की माने तो लक्ष्मो कामत के बागान के लीची का क्वालिटी और मिठास  देहरादून और मुज़फ्फरपुर  से कम नही है। दो एकड़ जमीन में करते हैं सब्जी की खेती :- लक्ष्मी कामत ने बताया कि वे  2 एकड़ ज़मीन से टमाटर, बैगन, फूलगोभी, पतागोभी, मूली सहित विभिन्न प्रकार सब्जियों की बहुत अच्छी पैदावार लेते हैं। फल और सब्जियों से साल में लाखों रुपये की।कमाई होती हैं। उन्होंने बताया कि अधिकांश युवा खेती करने के बजाय शहरों में बेहतर जिंदगी जीने के लिए नौकरी करना चाहते है। लेकिन उन्हें वह सकून नही  मिल पाता जो किसानी उन्हें दे सकती है। लक्ष्मी कामत ने बताया कि  नोकरी छोड़ कर खेती में लगने के लिए दादा, पिता और परिवार के सदस्यों की भरपूर प्रेरणा और सहयोग मिला था और मिल रहा है। लोगों की माने तो लक्ष्मी कामत का फलोत्पादन  लीची अंधराठाढ़ी को लिच्ची उत्पादक प्रखंडों में शुमार करा देगा मरुकिया पंचायत के पूर्व उप मुखिया रहे धकजरी गांव निवासी रतन कामत के पुत्र लक्ष्मी कामत ने बताया कि उन्होंने  अपनी  लगन, मेहनत और  किसानी से अपने परिवार के 21 सदस्यों का पेट पालते हैं । आज उनके पास वो सब सुविधाएं है, जो एक डॉक्टर और इंजीनयर की चाहत होती है।