कोरोना संकट से लड़ने के साथ साथ’ टीकाकरण कार्यक्रम में भी सफ़लता प्राप्त कर रहे हैं एसएमनेट ( यूनिसेफ ) के प्रतिनिधि ।

दिनेश सिंह
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कोरोना संकट से लड़ने के साथ साथ’ टीकाकरण कार्यक्रम में भी सफ़लता प्राप्त कर रहे हैं एसएमनेट ( यूनिसेफ ) के प्रतिनिधि ।
कोरोना महामारी के कारण भारत में डर का माहौल बना हुआ है। सभी महत्वपूर्ण कार्य रुक सी गई है। किसी का कार्य अगर नहीं रुका है तो वो है स्वास्थ्य विभाग , बैंक , पुलिस एवं प्रशासनिक कार्य और सफाई कर्मियो की मेहनत।
उपरोक्त कार्यों में से एक और विभाग ऐसा है जो सही मायने में कोरोना वारियर्स बनकर स्वास्थ्य विभाग के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। मैं बात कर रहा हूं बिहार के एसएमनेट ( यूनिसेफ ) के प्रतिनिधियों की।सतीश चंद्र , पानापुर , सारण ।
कोरोना महामारी को लेकर लोगों को जागरूक करने का कार्य हों या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ देर रात तक कण्टेण्मेण्ट जोन में होने वाले कार्यों की तैयारी की समीक्षा करनें की। अंतरराष्ट्रीय या अंतरराज्यीय यात्रीयों की लिस्ट तैयार करने की बात हों या कि उन लिस्ट के अनुसार यात्रीयों की स्वास्थ्य परीक्षण करने की। एसएमनेट के प्रतिनिधि हर हमेशा उपरोक्त कामों में अग्रणी भूमिका निभाते आए हैं। और उनके इस कार्यों में उन्हें सफ़लता भी मीली है। एसएमनेट प्रतिनिधियों के काम के प्रति समर्पित भावना को देखकर , बिहार के स्वाथ्य विभाग इस महामारी में उनसे हर संभव मदद लेने से’ भी नहीं चूक रहे हैं।इमरजेंसी ड्यूटी , मिथलेश कुमार मरहौरा , सारण ।
सुबोध कुमार , छपरा अर्बन । इस महामारी नें टीकाकरण कार्यक्रम को भी काफी हद तक प्रभावित किया है। लगभग दो महीने तक नवजात एवं गर्भवती महिलाएं टीकाकरण से वंचित रहे हैं। जिस कारण यूनिसेफ नें बहुत ही भयावह स्थिति की संभावना व्यक्त की है। जिसमें बीबीसी के हवाले से बताया गया कि अगले छः महीने में लगभग तीन लाख बच्चों की मौत हो सकती है।
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इससे बचने के लिए सरकार ने मई के पहले सप्ताह से ही टीकाकरण कार्यक्रम को फिर से कई शर्तो के साथ’ शुरुआत कर दी है।
कोरोना काल में , स्वास्थ्य विभाग के लिए’ टीकाकरण कार्यक्रम को फिर से पटरी पर लाना कोई आसान काम नहीं था। सरकार के द्वारा अचानक दिए गए निदेश को देखते हुए सीसीएच, एएनएम , आशा कर्मी , आंगनबाड़ी सेविका एवं कूरियर को दो से तीन दिन के अंदर अपने कार्य पर लग जाना था।
दिनेश कुमार सिंह , एकमा , सारण ।लॉक डाउन की स्थिति थी सवारी गाड़ी सभी बंद थे। बजार बंद थी। होटल नाश्ते की दुकान बंद था। बड़ी विकट परिस्थिति थी।
राजीव रंजन , अमनौर , सारण ।
इस मुश्किलात से निकालने के लिए ‘एसएमनेट’ के प्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ देर रात तक मिटिंग कर सोशल डिस्टेंस बनाकर , हाथ को सेण्टाइज करते हुए अन्य शर्तो  के साथ कार्यक्रम को सफल करने के सभी मुख्य बिन्दुओ पर चर्चा की गई।दिनेश सिंह , एकमा , सारण ।
मिथलेश कुमार 06 मई 2020 को पहला टीकाकरण सेशन था। एसएमनेट प्रतिनिधियों की निगरानी में दवा को सभी सेशन तक पहुंचाने की बड़ी चुनौती थी। सीसीएच को कई बार अपने हथेली को सेण्टैज करना पड़ता था।सूरज भानु ।
अविनाश कुमार , बनिया पूर , सारण ।
वहीं आशा , एएनएम एवं सेविका को भी अपने सेशन साईट पर पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पर रहा था। जिनके पास सवारी के लिए अपनी सुविधा थी वो तो आराम से पहुंच गए। मगर बांकी फ्रंट लाईन वर्करों को काफी दिक्कतों का सामना करना पर रहा था।

वहीं सेशन साईट पर आशाओं को गर्भवती महिलाएं एवं बच्चों को सेशन साईट पर लाने में काफी दिक्कतें पेश आ रही थी। फिर एसएमनेट के प्रतिनिधियों नें सभी को जागरूक किया और सेशन साईट पर लाभार्थियों को लाने में कामयाब हुए।
कोरोना काल के ‘पहले टीकाकरण ‘ का पहला दिन कुछ दिक्कतों के साथ सफल रहा।
एसएमनेट के प्रतिनिधियों के लिए अपनेआप को सुरक्षित रख कर , अपने परिवार से दूर एवं लगातार दो महिनों से एक भी छुट्टी नहीं लेते हुए अपने कर्म क्षेत्र में डटे हुए हैं ।
कोरोना महामारी के सफर में जहां सभी डरे हुए हैं , वहां टीकाकरण कार्यक्रम को सफल रखना एक चुनौती से कोई कम नहीं है। लेकिन इस चुनौती से हम जरूर जीतेंगे।