कोरोना वैरीयर्स के तौर पर यूनिसेफ ( एसएमनेट ) प्रतिनिधियों का अहम योगदान।

दिनेश सिंह
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कोरोना वैरीयर्स के तौर पर एसएमनेट का अहम योगदान।
चीन के वुहान शहर से शुरू होकर’ पूरे विश्व को अपने चपेट में लेने वाली कोरोना वायरस’ आजकल इंसानो के लिए सबसे बड़ा दुश्मन साबित हो रहा है। इस वायरस नें पूरी दुनियां में कड़ोंरो लोगों को अपना शिकार बना लिया है। वहीं लाखों लोगों को मौत के घाट उतार चुका है। इसका प्रभाव हमारे देश के साथ साथ बिहार में भी काफी तेजी से बढ़ा है।

इस महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। फिर सरकार नें इस महामारी से निपटने की जिम्मेवारी ‘एसएमनेट’ को सौंपी। ‘एसएमनेट’ नें इस जिम्मेवारी को सहर्ष स्वीकार कर अपने काम में लग गए।

सबसे पहले ‘एसएमनेट’ नें अपने टीम को एकजुट किया। अपने सभी बीएमसी को अपने अपने जिला में बुलाकर कोरोना वायरस से इंसानी जीवन को बचाने संबंधित कार्यों को प्रशिक्षण देकर प्रशिक्षित किए। फिर अपने सबसे महत्वपूर्ण काम में लग गए। जिसमें उन्हें कोरोना जैसे महामारी से इंसानो को बचाना था।
काम की शुरुआती दिनों में ‘एसएमनेट’ को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन मुश्किलो को दूर करने के लिए ‘एसएमनेट’ नें स्वास्थ्य विभाग , पुलिस प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों के साथ मीटिंग कर उपरोक्त परेशानियों को दूर करने की राह तलाशने लगे।
ज्ञात हो कि 23 मार्च को प्रधानमंत्री के द्वारा देश में लॉक डाउन की घोषणा करने के तुरंत बाद ही , एसएमनेट बिहार नें विश्व स्वास्थ्य संगठन बिहार के साथ मिलकर विदेशों से आने वाले सभी पैसेंजरों का एक लिस्ट तैयार किया।
एसएमनेट के बीएमसी नें स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर लाखों की संख्या में आए विदेशी पैसेंजरों का स्वास्थ्य परीक्षण किया।

फिर स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर घर घर सर्वेक्षण का सौ प्रतिशत कार्य पूरा कर अपने कार्यों के प्रति सौ प्रतिशत अपना योगदान देते रहे।
घर घर सर्वेक्षण कार्य में कई परिवार सर्वेक्षण कराने में आनाकानी कर रहे थे। उदाहरण के तौर पर सारण जिला के छपरा अर्बन के करीमचक में 45 मुस्लिम परिवार एवं रौजा गांव में 40 मुस्लिम परिवार ऐसे थे जो सर्वेक्षण में योगदान नहीं दे रहे थे। उनका कहना था कि सरकार कोरोना सर्वेक्षण के नाम पर हमलोगों का एनपीआर सर्वेक्षण करवा रहे हैं। फिर सारण के एसएमसी आरती त्रिपाठी , बीएमसी सुबोध कुमार एवं स्वास्थ्य विभाग अपने टीम के साथ उक्त स्थल पर पहुंचकर उन रीफ्युजल परिवारों को जागरूक किया और सर्वेक्षण में योगदान देनें के लिए तैयार करने में सफलता हासिल की।
वहीं सारण जिला के ही दरियापुर थाना अंतर्गत मुस्लिम टोला मानपुर में भी दर्जनों परिवार ऐसे थे जो एनपीआर के डर से सर्वेक्षण करवाने के लिए तैयार नहीं थे। फिर बीएमसी लालबाबू एवं अन्य स्वास्थ्य अधिकारी वहां पहुंच कर उन परिवारों को कोरोना के महामारी के बारे में जागरूक कर सर्वेक्षण कार्य पूरा करने में सफलता हासिल की।
‘एसएमनेट’ के बेहतरीन कामों को देखते हुए स्थानीय जन प्रतिनिधियों नें भी उन्हें सम्मानित भी किया है।
सबसे पहले सारण जिलांतर्गत दरियापुर प्रखंड में एमपी राजीव प्रताप रूढ़ी के प्रतिनिधि एवं भूतपूर्व मुखिया श्री नागेंद्र सिंह नें वहां के बीएमसी ‘लालबाबू’ एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को अंगवस्त्र देकर कोरोना वारियर्स के तौर पर सम्मानित किया।
वहीं 22 अप्रील को सारण जिलांतर्गत प्रखंड लहलाद्पूर में भी पीआरआई एवं मीडिया के द्वारा बीएमसी रौशन कुमार एवं स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों को अंगवस्त्र देकर’ कोरोना वारियर्स के रूप में सम्मानित किया।
वहीं सारण के ही मांझी प्रखंड में विधान पार्षद सच्चिदानंद राय के प्रतिनिधि मुन्ना बाबा नें भी वहां के बीएमसी राघवेंद्र कुमार एवं स्थानीय स्वास्थ कर्मियो को गमछा एवं मास्क देकर कोरोना वारियर्स के रूप में सम्मानित किया।
डिआईओ छपरा डा. अजय शर्मा नें अपने जिला के एसएमनेट प्रतिनिधियों को दिल से धन्यवाद देते हुए कहा की सारण के एसएमनेट ( यूनिसेफ ) टीमों के द्वारा इस कोरोना महामारी से लड़ने में काफी सहयोग मिला है। मैं उनलोगों का दिल से आभार व्यक्त करता हूं।
वहीं छपरा डीएम सुब्रत कुमार सेन नें भी एसएमनेट ( यूनिसेफ ) के कार्यों की सराहना की है ।