अपनी कविता से लोगों को कोरोना वायरस से जागरूक कर रही युवा कवियित्री कंचन पाठक

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लोगों को कोरोना वायरस से जागरूक 
सहरसा :मौत का रूप ले चुके कोरोना वायरस से बचाव के लिए भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार लोगों में जागरूकता लाने के लिए तमाम उपाय कर रही हैं। सोशल डिस्टेंटिंग पर जोर दिया जा रहा है। बिहार सरकार ने भी कलाकारों  से जागरूकता फैलाने का आह्वान किया है।
सहरसा जिले से गंगजला के प्रशिद्ध चिकित्सक डॉ० ए एन पाठक कि पुत्री युवा लेखक,कवियत्री कंचन पाठक कोरोना वायरस से बचाव के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए अपनी स्वरचित कविता का सहारा लिया है।
कविता का नाम उन्होंने दिया है … “लौट जाओ
कसर न छोड़ी, मानव मूल्यों का कर डाला ह्रास,
लौट जाओ ऐ इंसानों, अब तो प्रकृति के पास ||
दे देकर चेतावनियाँ, कुदरत भी थककर हार गई,
पर ज्यादतियां तुम सबकी, हर सहन शक्ति के पार गई,
व्यर्थ हुआ समझाना, ‘भय बिनु प्रीत’ न तुमसे होती,
लेकर विनती प्रकृति, संकेतों में कितनी बार गई,
पर खूब किया अपने हठ में, पृथ्वी का तुमनें नाश ||
जंगल रोया, नदियां रोई, जीव को खूब रुलाया,
खुद को ईश्वर मान के, ईश्वर का अस्तित्व भुलाया,
तड़पा मौसम, सिसकी ऋतुएँ, तुम्हें समझ न आया,
जिसकी चाहे छीन ली सांसें, मौत की नींद सुलाया,
पछता लो अब गले पड़ी है, महामारी की फांस||
यह प्रकृति है, भली भांति इसको है सब मालूम,
तब क्या होगा, जब जायेगी इसकी हर सुई घूम,
टूटेगा जो सब्र, नहीं तब तुम कुछ कर पाओगे,
चुन-चुनकर लीलेगी, जब वह कालरात्रि सी झूम,
कर लो कुछ, अपनी उदण्डता का तुम अब अहसास||
यह तो सौ प्रतिशत ही सच है, जाएगा कोरोना,
होगा तनिक विलम्ब और कुछ प्राण पड़ेंगे खोना,
पर संकेत ये कुदरत का, इन्सान समझ ले बेहतर,
जो बेमौत को मारेगा, कल उसे पड़ेगा रोना
बंद करो अब प्राकृत नियमों का करना उपहास||