Lockdown2.0: बारिश में ड्यूटी निभा रही महिला प्रशिक्षु एसआई

Kunal Kishor
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ड्यूटी यानी कर्तव्य. कर्तव्य को लेकर गीता में लिखा है-

विहाय कामान् य: कर्वान्पुमांश्चरति निस्पृह:।

निर्ममो निरहंकार स शांतिमधिगच्छति।।

गीता के इस श्लोक का मतलब हुआ. जो मनुष्य सभी इच्छाओं और कामनाओं को छोड़ कर, मन से ममता और अहंकार के भावों को हटाकर, तन्मयता से अपने कर्तव्यों का पालन करता है. शांति उसे ज़रूर मिलती है.”

अक्सर कहा भी जाता है कि किसी इंसान के काम या फिर उसके कर्तव्य का शांति से गहरा कनेक्शन है. अगर किसी काम में शांति न मिले तो इसका ये साफ मतलब होता है कि या तो उसे दिल से नहीं किया गया, या फिर उसे अहंकार के भाव से किया गया है.

लॉक डाउन 2.0 के दौरान बिहार के सहरसा की एक तस्वीर सामने आयी है. इस तस्वीर को गीता के उसी श्लोक का पर्याय माना जा रहा है, जिसकी चर्चा हमने शुरुआत में की थी. कहने को तो लोग ये कह सकते हैं कि ये एक आम फोटो है. दो महिला पुलिसकर्मी छाते लिए बारिश में खड़ी है और किसी ने उनकी फोटो खींच ली. लेकिन दूसरे चश्मे से देखे तो इस तस्वीर में कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण के भाव कूट-कूट कर भरे हैं. बारिश के बावजूद भी दोनों महिला प्रशिक्षु एसआई के चेहरे पर शिकन तक नहीं दिख रहा है, मानो वो कह रही हो-इस काम को मैं दिल से कर रही हूं.

सहरसा में रविवार दोपहर जारी बारिश में गंगजला चौक पर लॉक डाउन को प्रभावी बनाने के लिए तैनात दोनों महिला एसआई की इस तस्वीर में वो तमाम भाव मौजूद हैं, जिस भाव का ज़िक्र गीता के श्लोक में किया गया है.

रिपोर्ट@कुणाल किशोर