जिलाधिकारी ने दीप प्रज्वलित कर पोषण पखवारा की की शुरुआत

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बेटी को जन्म देने वाली 5 माताओं को किया गया सम्मानित

मधुबनी: बेहतर पोषण में ऊपरी आहार का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसको ध्यान में रखते हुए रविवार को पोषण पखवाड़े की शुरुआत जिलाधिकारी डॉ निलेश रामचंद्र देओर द्वारा दीप प्रज्वलित कर और शपथ दिलवाकर की गयी।

इस अवसर पर जिलाधिकारी द्वारा कहा गया कि इस अभियान का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं माताओं व बच्चों और किशोरियों में कुपोषण और एनेमिया को कम करना है। इस रणनीति का उद्देश्य 2022 तक भारत को कुपोषण से मुक्त करना है। भारत सरकार द्वारा कुपोषण को दूर करने के लिए जीवनचक्र एप्रोच अपनाकर चरणबद्ध ढंग से पोषण अभियान चलाया जा रहा है।भारत सरकार द्वारा 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों एवं गर्भवती एवं धात्री माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में समयबद्ध तरीके से सुधार हेतु महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय पोषण मिशन अंतर्गत कुपोषण को चरणबद्ध तरीके से दूर करने के लिए आगामी 3 वर्षों के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

जिलाधिकारी ने आंगनवाड़ी सेविका सहायिका द्वारा हैंड वाशिंग के बारे में विस्तार से बताया जाने की जरूरत पर बल दिया।

ये हैं अभियान के लक्ष्य :

0 से 6 वर्ष के बच्चों में बोनेपन से बचाव एवं में कुल 6प्रतिशत,प्रतिवर्ष 2% की दर से कमी लाना।

0से 6 वर्ष तक के बच्चों का अल्प पोषण से बचाव एवं इसमें कुल 6%, प्रति वर्ष 2% की दर से कमी लाना।

6 से 59 माह के बच्चों में एनीमिया के प्रसार में कुल 9% प्रतिवर्ष 3% की दर से कमी लाना।

15 से 49 वर्ष की किशोरियों गर्भवती एवं धात्री माताओं में एनीमिया के प्रसार में कुल 9% प्रतिवर्ष 3% की दर से कमी लाना।

कम वजनके साथ जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या में कुल 6% प्रति वर्ष 2% की दर से कमी लाना

पोषण अभियान की शुरुआत 8 मार्च 2018 राजस्थान के झुंझुनू में किया गया था प्रधानमंत्री द्वारा पोषण अभियान की शुरुआत की गयी थी।

ज़िला कार्यक्रम पदाधिकारी रश्मि वर्मा ने बताया कि 6 माह तक के बच्चे को सिर्फ स्तनपान से ही आवश्यक सभी पाेषक तत्व मिल जाते हैं। लेकिन इससे बढती उम्र में बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए उपरी आहार आवश्यक होता है। बताया सामुदायिक सहभागिता के जरिए ऊपरी आहार से संबंधित व्यवहार परिवर्तन में सुधार के लिए इसको शुरू किया गया है । बच्चे के जन्म के प्रथम 6 माह में मां का दूध सर्वोतम आहार है।इस दौरान गर्भवती, धात्री माताएँ, किशोर/किशोरियों एवं 6 माह से लेकर 2 साल तक के बच्चों के पोषण में सुधार लाने का विशेष प्रयास किया जाएगा।

9 विभागों की होगी सहभागिता :

इस पोषण माह के दौरान आयोजित होने वाली गतिविधियों में आईसीडीएस के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायती राज, ग्रामीण विकास(जीविका) ,लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण, कृषि, नेहरू युवा केंद्र एवं महादलित विभाग भी सहयोग करेंगे। साथ ही जिलों में कार्यरत जिला समन्वयक, जिला परियोजना सहायक, स्वस्थ भारत प्रेरक, पीरामल फ़ाउंडेशन, केयर इंडिया एवं यूनिसेफ के कर्मी भी पोषण पखवाड़ा को सफल बनाने में योगदान देंगे।
9 विभागों के सहयोग से सफल होगा अभियान
इसमें सभी नौ विभागों के जिला स्तरीय प्रतिभागी शामिल होंगे।

सभी आंगनवाड़ी केन्द्रों पर प्रभात फ़ेरी:

पोषण पर समुदाय को जागरूक करने के लिए प्रभात फ़ेरी एक सशक्त माध्यम होता है। इसे ध्यान में रखते हुए सभी आँगनवाड़ी केन्द्रों पर प्रभात फ़ेरी का आयोजन किया जाएगा। जिसमें आँगनवाड़ी सेविका, सहायिका, आशा, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, बच्चे, किशोर एवं पंचायती राज के सदस्य प्रतिभाग करेंगे।

गृह भ्रमण पर होगा बल: आँगनवाड़ी सेविका अपने-अपने पोषक क्षेत्र में पूर्व नियोजित घरों का भ्रमण करेंगी। साथ ही कमजोर नवजात शिशु की पहचान, 6 माह से अधिक उम्र के बच्चों को ऊपरी आहार, महिलाओं में एनीमिया की पहचान एवं रोकथाम तथा शिशुओं में शारीरिक वृद्धि का आंकलन करने का कार्य करेंगी।

इस अवसर पर बेटी को जन्म देने वाली मां को पौधे एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया

इस अवसर पर जिलाधिकारी डॉ नीलेश रामचंद्र देओल, सिविल सर्जन किशोर चन्द्र चौधरी,ज़िला कार्यक्रम पदाधिकारी रश्मि वर्मा,जिला भू अर्जन पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला मत्स्य पदाधिकारी,यूनिसेफ एसएमसी. प्रमोद कुमार झा केयर इंडिया के डी टी एल महेंद्र सिंह सोलंकी पोषण अभियान के जिला समन्वयक स्मित प्रतीक सिन्हा सभी ब्लॉक के सीडीपीओ, सुपरवाइजर इत्यादि मौजूद थे ।