स्वास्थ्य कार्यक्रमों को समुदाय तक पहुँचाने में मीडिया की अहम भूमिका: सिविल सर्जन

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कुल प्रजनन दर को 2.1 तक लाने का लक्ष्य
बच्चों, किशोरों एवं महिलाओं को मिलेगी एनीमिया से मुक्ति
आरबीएसके तहत जिले में 24 लाख बच्चों की हुयी स्क्रीनिंग

मधुबनी: सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च की ओर से सदर अस्पताल के सभाकक्ष में बुधवार को स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस अवसर पर उपस्थित सिविल सर्जन डॉ. किशोर चंद्र चौधरी ने विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रम को लोगों तक पहुंचाने के लिए मीडिया की अहम भूमिका पर बल दिया.स्वास्थ्य कार्यक्रमों की सफलता में मीडिया की भूमिका अहम:

सीएस डॉ चौधरी ने बताया आमजन तक प्रचार प्रसार के लिए मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. आम लोगों तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाई गई विभिन्न कार्यक्रम हुआ योजना की जानकारी मीडिया के माध्यम से पहुंचती है. इसलिए किसी भी कार्यक्रम की सफलता के लिए मीडिया स्वास्थ्य विभाग और आमजन के बीच मजबूत कड़ी का काम करता है. उन्होंने जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में संचालित परिवार नियोजन, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सदर अस्पताल में आए विभिन्न रोगों से ग्रसित नवजातों को प्राथमिक स्तर पर चिकित्सा की जाती है. गंभीर स्थिति होने पर उसको बेहतर चिकित्सा के लिए एम्स एवं आईजीएमएस भेज दिया जाता है. सीएस ने एनीमिया मुक्त भारत कर्म की कार्यक्रम की बारे में बताते हुए कहा एनीमिया से पीड़ित बच्चे को शुरुआती दौर में कोई समस्या नहीं होती लेकिन बाद में उनके मानसिक एवं शारीरिक विकास में बाधा उत्पन्न होती है. वही सीएस ने परिवार नियोजन के विभिन्न साधनों को लेकर चलाए जा रहे परिवार विकास मिशन कार्यक्रम के बारे में बताया विभिन्न अस्पतालों में आए गर्भवती महिलाओं व अन्य महिलाओं को जनसंख्या स्थिरीकरण को लेकर परिवार नियोजन के साधनों के बारे में काउंसिलिंग की जाती है. साथ ही रोजाना इलाज के लिए आए दंपतियों को छोटे परिवार की महत्ता के बारे में बताया जाता है.कुल प्रजनन दर को 2025 तक 2.1 प्रतिशत करने का लक्ष्य:

केयर इंडिया के डीटीएल माधव सिंह सोलंकी ने मीडिया को परिवार नियोजन के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा जिले की कुल प्रजनन दर 3.4 है. जिसे वर्ष 2025 तक 2.1 करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. उन्होंने कहा किसी भी परिवार सुखद व समृद्धि उसके परिवार की आकार पर निर्भर करती है. अधिकांश परिवार जिनमें पति -पत्नी के अलावा दो बच्चे होते हैं उन्हें सामाजिक, आर्थिक एवं शारीरिक फ़ायदे होते हैं. सीमित परिवार के कारण बचत की संभावना रहती है जिससे बच्चों को उच्च शिक्षा व पोषण में मददगार साबित होती है. इसलिए उन्होंने परिवार नियोजन साधनों को अपनाने की लोगों से अपील की. उन्होंने बताया अस्पतालों में परिवार नियोजन के स्थायी साधनों के साथ अस्थायी साधनों की पर्याप्त उपलब्धता है. जिसमें बच्चों में अंतर रखने के लिए दवा और इंजेक्शन मुफ्त में वितरित की जाती है.अनीमिया मुक्त भारत अभियान साबित होगा कारगर:
सोलंकी ने बताया बच्चों, किशोरियों ,प्रजनन उम्र की महिलाएं, गर्भवती माताओं एवं धात्री माताओं को खून की कमी से बचाने के लिए अनीमिया मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है. 6 माह से 59 माह के बच्चों के लिए आयरन सिरप, 5 वर्ष से 9 वर्ष के बच्चे एवं 10 से 19 साल तक के बच्चे के लिए सप्ताह में आयरन की गोली दी जा रही है. वहीँ 20से 24 माह वर्ष की महिलाएं, गर्भवती माताओं एवं धात्री महिलाओं को भी आयरन की गोली दी जाती है.परिवार नियोजन साधन अपनाने पर प्रोत्साहन राशि:

महिला बंध्याकरण करवाने पर लाभार्थी को 2000 रूपये , पुरुष नसबंदी कराने पर 3000 रूपये , प्रसव पश्चात बंध्याकरण कराने पर 3000 रूपये , प्रसव के पश्चात कॉपर टी लगवाने पर 300 रूपये , गर्भपात उपरांत कॉपर टी लगवाने पर 300 रूपये जबकि ‘अंतरा’ सुई लगवाने पर प्रति महिला लाभार्थी को 100 रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है.

जिले में 24 लाख से अधिक बच्चों की हुयी स्क्रीनिंग:

कार्यशाला के दौरान आरबीएसके कोऑर्डिनेटर कमलेश कुमार शर्मा ने बताया राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की चिकित्सकीय जाँच की जाती है. इसके लिए जिले में 26 टीम के माध्यम से बच्चों के स्क्रीनिंग की जा रही है. प्रत्येक टीम में 4 सदस्यों को शामिल किया है. जिसमें आयुष चिकित्सक, फार्मासिस्ट एवं एनएम शामिल होते हैं. अभी तक पूरे जिले में 24 लाख से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की जा चुकी हैं. जांच के दौरान 1 लाख बच्चे का किसी ना किसी रोग से ग्रसित होने की बात सामने आई है. अभी तक जिले में गंभीर रोगों से पीड़ित 33 बच्चों को बेहतर चिकित्सा के लिए आईजीएमएस, ऐम्स जैसे राज्य के 9 मेडिकल कॉलेजों में उपचार कराया जा रहा है.

कार्यशाला का संचालन करते हुए पटना से आये सीएफएआर के असिस्टेंट स्टेट प्रोग्राम मैनेजर रंजीत कुमार ने बताया लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है. सरकार द्वारा संचालित विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की जानकारी मीडिया के माध्यम से आम लोगों तक पहुचती है. इसलिए स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन में मीडिया की भूमिका अहम् है.

इस अवसर पर सीडीओ आरके सिंह, डीपीएम दयाशंकर निधि, डीसीएम नवीन दास, केयर इंडिया के पीयूष बंसल जपायगो के जिला समन्वयक, जिला अस्पताल प्रबंधक अब्दुल मजीत के साथ मीडिया कर्मी उपस्थित थे.