राष्‍ट्रहित में महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलना समय की जरूरत : किशोर कुमार

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प्रताप फाउंडेशन द्वारा महाराणा प्रताप स्मृति समारोह में क्षेत्र के बुजुर्गों को किया गया सम्‍मानित

सहरसा : वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप स्मृति समारोह का आज आर एम एम लॉ कॉलेज मैदान सहरसा में नवनिर्माण मंच के तत्वावधान में संपन्‍न हुआ। इस समारोह की अध्‍यक्षता पूर्व विधायक किशोर कुमार ने की। संचालन कार्यक्रम संयोजक त्रिभुवन प्रसाद सिंह ने किया।

इस मौके पर अपने संबोधन में किशोर कुमार ने कहा कि महाराणा प्रताप ना केवल हमारे स्वाभिमान के प्रतीक हैं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हर उन महापुरुषों के लिए प्रेरणा स्रोत थे जो किसी भी कीमत पर भारत माता को पराधीनता के जंजीरों से मुक्त कराना चाहते थे। बाबू वीर कुंवर सिंह, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, मंगल पांडे, सरदार भगत सिंह, अशफाक उल्ला खां, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी आदि लाखों क्रांतिकारियों ने उनसे प्रेरणा लेकर ही देश को आजाद कराया।भाजपा नेता ने कहा कि राष्‍ट्रहित में उनके आदर्शों पर चलना समय की मांग है, जिस पर देश की केन्द्र सरकार चल रही है। उसी आदर्शों को देश के युवाओं को आत्‍मसात करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि महाराणा प्रताप सामाजिक समरसता के मिशाल थे। वे किसी भी तर‍ह के जातिगत और धार्मिक भेदभाव में विश्‍वास नहीं करते थे। तभी तो उनका मुख्‍य सेनापति हकीम खां सूरी हुआ करते थे  और उनके अंगरक्षक सरदार भाला मानसिंह भामाशाह। उन्‍होंने 10 साल तक चली हल्‍दीघाटी की लड़ाई में मेवाड़ और चित्तौड़गढ़ की स्वाभिमान के झंडे को झुकने नहीं दिया। उस वक्‍त भी उनकी सेना में छत्रसाल, कौल, भीम आदि वनवासी शामिल थे। हो सकता है तब  मेवाड़ शासन पूरे देश में ना रहा हो, लेकिन देश की जनता के हृदय पर उनकी छाप थी। ये उनकी महानता थी कि जब युद्ध के मैदान में दुश्मन पीठ दिखाकर भाग गए तो उन्होंने उस पर हमला करना बंद कर दिया। उनके पुत्र अमर सिंह ने जब युद्ध में मुगलों को हराया और उनके परिवार को ही बंदी बनाकर लाया तो महाराणा ने बंदी महिलाओं को ससम्मान कपड़ा देकर विदाई की। और जब उनको सेना का अभाव हुआ तो उन्होंने अपने लोगों से कहा कि जाओ जंगल में वहां वनवासियों के गले लगाओ।महिला कॉलेज के प्राचार्य रेणु सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप, शिवाजी महाराज, गुरु गोविंद सिंह जी ने उस कालखंड में जिस सोच के साथ देश के लिए अपना सर्वस्‍व न्‍यौछावर कर दिया, आज वर्तमान सरकार उसी रास्ते पर चल रही है। इसलिए हमें सरकार के साथ खड़े होना चाहिए और देश के मामले में हमेशा मर मिटने को तैयार रहने का प्रण लेना चाहिए। हमें संकल्‍प लेना चाहिए – राणा प्रताप की रण की जय / राणा प्रताप के प्रण की जय / मेवाड़ देश के कण कण की जय / बोलो भारत माता की जय।
स्मृति समारोह में प्रताप फाउंडेशन की ओर से समाज के विभिन्‍न क्षेत्रों में अति महत्‍वपूर्ण योगदान देने वाले बुजुर्गों के योगदान को याद किया गया और उन्‍हें सम्‍मानित भी किया।फाउंडेशन द्वारा पूर्व मुखिया महादेव सिंह, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष श्याम साह, प्राचार्य राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित विक्रमादित्य खां,  डॉ रुद्र प्रताप सिंह, प्रो अनवार आलम, डॉ एस० पी० सिंह हरिप्रसाद सिंह, मदन झा, विष्णु देव बाल्मीकि, विशेश्वर सिंह, रमेश चंद्र यादव, गोपाल प्रसाद सिंह, दयाकांत तांति,  ब्रह्मदेव सिंह और रेणु सिंह को सम्‍मानित किया गया। कार्यक्रम संयोजक त्रिभुवन प्रसाद सिंह, पूर्व विधायक संजीव झा, सुरेंद्र यादव, प्रो रामनरेश सिंह, कार्तिक सिंह, अजय कुमार सिंह, अरविंद सिंह, अर्जुन चौधरी, सुदेश कुमार सिंह, प्रमोद नारायण सिंह, प्रो० डी एन साह, डॉ० गोपाल सरण सिंह, रजनीश सिंह, विजय वसंत, डॉ आई डी सिंह, डॉ ब्रजेश, डॉ० राजीव प्रताप सिंह, सुरेश सिंह शिक्षक नेता, प्रो० के एस ओझा, राजा दिनेश सिंह, अजय सिंह, पंचम सिंह, ठाकुर पंकज सिंह, नवनिर्माण मंच के युवा अध्यक्ष लुक़मान अली ने धन्यवाद ज्ञापन किया.