सामुदायिक स्तर पर दी जा रही परिवार नियोजन की जानकारी

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नवविवाहितों में बच्चों में अंतराल रखने के लिए दिया गया बल
31 तक चलेगा मिशन परिवार विकास अभियान

जमुई: मिशन परिवार विकास अभियान को लेकर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ सिविल सर्जन डॉ श्याम मोहन दास ने किया. इस मौके पर उनके साथ एसीएमओ विजेंद्र सत्यार्थी सहित डीएस डॉ नौशाद अहमद, जिला स्वास्थ्य समिति से जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुधांशु नारायण लाल मौजूद थे. कार्यक्रम के दौरान जानकारी दी गयी कि आशाओं के साथ साथ आंगनबाड़ी सेविकाओं, महिला पर्यवेक्षकों व विकास मित्रों व केयर इंडिया के परिवार नियोजन समन्वयकों व जीविका के लोगों की मदद से दंपतियों को परिवार नियोजन के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है. सामुदायिक चर्चा से जागरूकता पर दिया जा रहा बल:
इस दौरान एसीएमओ विजेंद्र सत्यार्थी ने बताया कि नवविवाहितों सहित दो या दो से अधिक बच्चे वाले माता पिता को परिवार नियोजन विभिन्न साधनों की जानकारी दी जा रही है. विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में ये लोग जाकर परिवार नियोजन पर सामुदायिक चर्चा कर रहे हैं और लोगों को दंपतियों को अपने बच्चों की कम उम्र में शादी नहीं करने की सलाह दी जा रही है. कम उम्र में शादी के बाद स्वास्थ्य परिणामों पर चर्चा की गयी है. उन्हें बताया गया है यदि कम उम्र में शादी होती है तो इसका असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है और जनसंख्या स्थिरीकरण की संभावना कम होती जाती है. इसके साथ ही यदि नवविवाहित शादी के बाद बच्चे की इच्छा रखते हैं तो कुछ आवश्यक बातों को ध्यान में रखना होगा. दो चरणों में 31 जनवरी तक चलेगा अभियान:
केयर इंडिया के जिला संसाधन ईकाई के टीम लीडर ने बताया फिलहाल दंपति संपर्क सप्ताह चलाया जा रहा है. सपंर्क सप्ताह के दौरान विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में समुदाय में जाकर लोगों को शादी के बाद कम से कम 2 साल के बाद पहला बच्चा, दो बच्चों में कम से कम 3 साल का अंतराल एवं प्रसव के बाद या गर्भपात के बाद परिवार नियोजन के स्थायी एवं अस्थायी साधनों पर जानकारी दी गयी है. ऐसे दंपति को चिन्हित किया जा रहा है जिनके दो से अधिक बच्चे हैं और अब वे परिवार नियोजन के साधनों को अपनाना चाहते हैं. उन्हें स्थायी व अस्थायी साधनों की जानकारी दी गयी है. साथ ही सामुदायिक स्तर पर बातचीत कर बड़ी संख्या में पुरुषों को नसबंदी के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. ऐसे लोग जो नसबंदी के इच्छुक होंगे उन्हें 21 से 31 जनवरी तक परिवार नियोजन सेवा सप्ताह के दौरान नसबंदी शिविर का आयोजन कर लाभ दिया जाना है. नसबंदी के लिए महिलाओं को देनी है सुविधाएं:
प्रसव के बाद महिला नसबंदी के फायदों के बारे में बताने के साथ इसका लाभ भी देना है. एएनएम व आशा नसबंदी व कॉपर- टी के बारे में महिलाओं को बता रहीं हैं तथा इसे अपनाने के बारे में सलाह दे रही हैं. प्रसव कक्ष में परिवार कल्याण परामर्शी, एएनएम, स्टाफ़ नर्स के माध्यम से प्रसव एवं गर्भपात के लिए आई हुई इच्छुक महिलाओं को उत्प्रेरित करते हुए सुविधा प्रदान कराने के लिए निर्देश जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से दिया गया है.