RBSK के तहत चलंत चिकित्सा दलों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन

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सभी ब्लॉक के आरबीएसके के चिकित्सक, फार्मासिस्ट एवं एएनएम को दिया गया प्रशिक्षण

बच्चों में 40 प्रकार की बीमारियों की निःशुल्क ईलाज की सुविधा

मधुबनी : राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम(आरबीएसके) के तहत चलंत चिकित्सा दलों का एक दिवसीय प्रशिक्षण  सदर अस्पताल के सभागार कक्ष में आयोजित हुई। ट्रेनर के रूप में जिला समन्वयक आरबीएसके डॉ.कमलेश कुमार शर्मा, डॉ.सुजीत कुमार एवं डॉ.रमेश पासवान थे।
इस दौरान आरबीएसके जिला समन्वयक डॉ. कमलेश शर्मा ने बताया बच्चों की बेहतर सेहत को लेकर स्वास्थ्य विभाग काफी सक्रिय है। अब स्वास्थ्य विभाग बुखार जैसे सामान्य बीमारियों से लेकर बच्चों की जन्मजात विकृतियों एवं कई अन्य गंभीर जटिलताओं पर भी ध्यान दे रही है। इसको लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम(आरबीएसके) चलाया जा रहा है। जिसमें जिला स्तर पर गठित आरबीएसके टीम द्वारा सरकारी स्कूलों एवं आँगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों में स्वास्थ्य जटिलता की जाँच की जा रही है।

10 लाख से अधिक बच्चों का ईलाज:डॉ. शर्मा ने कहा इस कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में अब तक दस लाख बच्चों का इलाज किया गया है। साथ ही इन सभी बच्चों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से हेल्थ कार्ड भी उपलब्ध भी कराया गया है। कार्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिदिन 80 से 100 बच्चों का स्क्रिनिंग किया जाता है।

नियमित दौरों पर दें बल:प्रशिक्षण के दौरान आरबीएसके चलंत चिकित्सा दलों को नियमित दौरों पर अधिक देने की बात कही गयी। यह बताया गया कि स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों का दौरा कर अधिक से अधिक बच्चों की स्वास्थ्य जाँच करें। जाँच में किसी भी तरह की जटिल समस्या का पता चले तब तुरंत उचित रेफ़रल का भी ध्यान रखें। इससे सही समय पर डिफेक्ट की पहचान कर बच्चों को उचित देखभाल प्रदान करने में सहूलियत होगी।

फोर डी पर आधारित जाँच :राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत शून्य से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों के फोर डी पर फोकस किया जाता है, जिसमें डिफेक्ट एट बर्थ, डिफिशिएंसी, डिसीज, डेवलपमेंट डिलेज इन्क्लूडिंग डिसएबिलिटी यानि किसी भी प्रकार का विकार, बीमारी, कमी और विकलांगता है। इसमें 38 बीमारियों को चिन्हित किया गया है।आरबीएसके में शून्य से अठारह वर्ष तक के सभी बच्चों की बीमारियों का समुचित इलाज किया जाता है। शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग आंगनबाड़ी केंद्रों में होती है, जबकि छह साल से अठारह साल तक के विद्यालय में पड़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल की जाती है। इसके अंतर्गत 40 बीमारी का इलाज किया जाता है।