BNMU का तृतीय दीक्षांत समारोह हुआ सम्पन्न

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शिक्षा की अत्यन्त गौरवशाली एवं समृद्ध परम्परा रही है
मधेपुरा : भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय का तृतीय दीक्षांत समारोह मंगलवार को समारोहपूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर इक्कीस विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 40 को पी-एच. डी और 234 को स्नातकोत्तर की उपाधि वितरित की गई।राज्यपाल सह कुलाधिपति फागू चौहान की अनुपस्थित में कुलपति डाॅ. अवध किशोर राय ने उनका प्रिंटेड अध्यक्षीय भाषण प्रस्तुत किया। भाषण में सभी उपाधिधारकों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं गई और उनसे यह अपेक्षा की गई कि वे वे अपने ज्ञान को समाज एवं राष्ट्र की उन्नति में लगाएँ। भाषण में कहा गया कि लगातर तीसरे वर्ष ‘दीक्षांत समारोह’ का आयोजन हो रहा है। यह विश्वविद्यालय की जीवंतता का प्रमाण है और इस जीवंतता को आगे भी बरकरार रखने की जरूरत है। यह विश्वविद्यालय सन् 1992 से लगातार वंचित वर्गों के बीच ज्ञान की ज्योति जलाने में महती भूमिका निभा रहा है।  विश्वविद्यालय में लगातार  शैक्षणिक सेमिनारों, सम्मेलनों का आयोजन होता रहा है। राजभवन की मासिक पत्रिका ‘राजभवन संवाद’ की तर्ज पर यहाँ से ‘बीएनएमयू संवाद’ का प्रकाशन भी प्रशंसनीय है। आगे यहाँ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण एवं शोध के क्षेत्र में और अधिक प्रगति हो, मेरी यह मंगलकामना है।
सच्ची शिक्षा हमें बौद्धिक या मानसिक रूप से सक्षम बनाती है और हमें शारीरिक कौशल एवं चारित्रिक बल भी प्रदान करती है। शिक्षा के माध्यम से किसी भी व्यक्ति एवं समाज का सर्वांगीण विकास होता है। जिस देश में शिक्षा की व्यवस्था जितनी सुदृढ़ होती है, वह राष्ट्र उतना ही सबल और   समृद्ध होता है। प्राचीन भारत सुदृढ़ शिक्षा-व्यवस्था के कारण ही ‘विश्वगुरू’ एवं ‘सोने की चिड़िया’ कहलाता था। हमारे यहाँ दुनिया के कोने-कोने से विद्यार्थी ज्ञानार्जन के लिए आते थे। ‘दीक्षांत समारोह’ की परंपरा भी हमारे यहाँ सदियों पुरानी है। सैकड़ों वर्ष पूर्व ‘उपनिषद्’ में ‘दीक्षांत समारोह’ का उल्लेख मिलता है। वहाँ इस अवसर पर गुरू शिष्य को ‘दीक्षा’ देते थे। इस ‘दीक्षा’ में कहा जाता था कि ‘‘सत्य बोलो, कर्तव्य का पालन करो और स्वाध्याय में आलस्य नहीं करो।’’ यहाँ सत्य को  जीवन का सर्वोच्च मूल्य माना गया है। गुरु विद्यार्थियों से यह अपेक्षा करते थे कि वे जीवन में सदैव सत्य के पथ पर चलेंगे, सत्य बोलेंगे और सत्य के अनुरूप आचरण करेंगे।
भारतीय जीवन-मूल्यों एवं सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण एवं विकास में बिहार का अमूल्य योगदान रहा है। यहाँ शिक्षा की अत्यन्त गौरवशाली एवं समृद्ध परम्परा रही है। बिहार के विक्रमशिला और नालन्दा विश्वविद्यालय की पूरी दुनिया में प्रतिष्ठा थी। यहाँ सम्पूर्ण विश्व से छात्र ज्ञान प्राप्त करने आते थे। हमें अपने इस गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेते हुए अपने उज्ज्वल भविष्य की नई राह बनानी है।हमारे विश्वविद्यालय पूरे समाज, राष्ट्र एवं संपूर्ण मानवता के  उत्थान में सहायक बनें। हम अपने ज्ञान-चक्षु को खुला रखें और दुनिया की सभी दिशाओं से कल्याणकारी विचार आने दें। लेकिन हम उन्हीं विचारों को आत्मसात करें, जो हमारे समाज एवं राष्ट्र के लिए हितकारी हों। हम उन्हीं विचारों को आगे बढ़ाएँ, जो राष्ट्रीय सभ्यता-संस्कृति, इतिहास एवं परंपरा के अनुरुप हों। महात्मा गाँधी ने भी कहा है कि ‘‘मैं नहीं चाहता कि अपने घर के चारों ओर दीवार उठा लूँ या उसकी खिड़कियाँ बंद कर लूँ; बल्कि मैं तो यह चाहता हँू कि हमारे घर में सभी देशों की संस्कृतियों की हवा बेरोक-टोक आवे, लेकिन मैं यह बर्दास्त नहीं कर सकता कि उस हवा के झोंके से मैं खुद ही गिर जाऊँ।’’ अर्थात् हमें   वैश्वीकरण के इस युग में पूरी दुनिया के साथ कदम-ताल करते हुए भी अपनी जड़ों से जुड़े रहना है। हम आसमान से बातें करें, लेकिन हमारे पैर जमीन पर रहें। पूरे समाज एवं राष्ट्र की जिम्मेदारी है कि हम अपना भविष्य बेहतर बनाएँ – बेहतर विद्यार्थी एवं बेहतर नागरिकों को तैयार करें। यहाँ विशेष रूप से मैं आप सबों से यह भी अनुरोध करना चाहता हूँ कि हम सिर्फ अपने बच्चे को शिक्षा देने तक सीमित नहीं रहें, बल्कि हम समाज के अभिवंचित वर्ग तक शिक्षा को पहुँचाना भी अपना धर्म मानें। यदि हम किसी वंचित वर्ग के बच्चे तक शिक्षा की रोशनी पहुँचा देते हैं तो उससे हमें जो संतोष और आनंद मिलेगा, वह किसी भी पूजा एवं इबादत से मिली शांति से कम नहीं है।
कोसी प्रमंडल के आयुक्त सेंथिल के. कुमार ने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा-दीक्षा समारोह का अंत नहीं है, बल्कि यह एक शुरुआत है। अब विद्यार्थियों को  विश्वविद्यालय कैम्पस से निकलकर समाज में जाना है। विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को उनके परिवार, सहपाठी एवं शिक्षक का सपोर्ट था। अब विद्यार्थियों को स्वयं अपना रास्ता तय करना है। प्रतियोगी माहौल में अपने आपको साबित करना है। अपनी क्षमताओं को बढ़ाने है। उन्हें निरंतर सीखते रहना है। उन्होंने कहा कि बिहार का शिक्षा के क्षेत्र में विशेष स्थान है। आज बिहार में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक में काफी प्रगति हुई है। ग्रांस इनरालमेंट रेशियो बढ़ रहा है, लेकिन अभी इस पर और ध्यान देने की जरूरत है। इसके लिए सरकार शिक्षा-व्यवस्था पर काफी निवेश कर रही है।
विशिष्ट अतिथि नेहू शिलांग के पूर्व कुलपति एवं नैक के पूर्व निदेशक डाॅ. ए. एन. राय ने कहा कि बीएनएमयू युवा विश्वविद्यालय है। यह निरंतर प्रगति कर रहा है। हमें उम्मीद है कि आगे भी प्रगति करेगा। यह विश्वविद्यालय बी. एन. मंडल के आदर्शों को आगे बढ़ाएगा।उन्होंने कहा कि आज उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई गंभीर चुनौतियां हैं। सरकारी  विश्वविद्यालयों की वित्तीय व्यवस्था ठीक नहीं है। यह सिर्फ सरकार के भरोसे ठीक नहीं हो सकती है। पूरे समाज और विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को भी विश्वविद्यालय की वित्तीय व्यवस्था के संबंध में सोचना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा मात्र सूचनओं का संग्रह नहीं है।शिक्षा एक सतत प्रक्रिया है।शिक्षा मनुष्य को मनुष्य बनाती है। इसके बिना मनुष्य अधूरा है। शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों के शरीर, मन एवं आत्मा का विकास करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा हमें बंधनों से मुक्त करती हैं। यह हमें अमरत्व की ओर ले जाती है। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग से सभी को आशाएं हैं । वे जीवन में सफल हों।
इसके पूर्व अतिथिशाला से दीक्षा-स्थल तक शोभा यात्रा निकाली गई। अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्रम् एवं पुष्प गुच्छ से स्वागत किया गया। अतिथियों ने भूपेन्द्र नारायण मंडल के चित्र पर पुष्पांजलि की। छात्राओं की टीम ने कुलगीत प्रस्तुत किया। राष्ट्रगान का सामूहिक गायन हुआ।कुलपति ने सभी उपाधिधारकों को दीक्षा दिलाई,
मधेपुरा महाविद्यालय मधेपुरा के एनसीसी पदाधिकारी लेफ्टिनेंट गौतम कुमार के नेतृत्व में गार्ड आफ आनर दिया गया। सभी अतिथियों के आगमन से लेकर उन्हें उनके जगह पर बैठाने एवं कार्यक्रम में शांति व्यवस्था रखने में इन लोगों का सहयोग सराहनीय रहा।  अतिथियों को किसी तरह की परेशानी ना हो इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन एवं जिला प्रशासन पूरी तरह तत्पर दिखा।
कार्यक्रम का संचालन कुलसचिव कपिलदेव प्रसाद ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रति कुलपति डॉ. फारूक अली ने की। इस अवसर पर पूर्व प्रति कुलपति डाॅ. जे. पी. एन. झा एवं डाॅ. नंदकिशोर सिंह, डीएसडबल्यू डाॅ. शिवमुनि यादव, मानविकी संकायाध्यक्ष डाॅ. ज्ञानंजय द्विवेदी,  सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष डाॅ. एच. एल. एस. जौहरी, विज्ञान संकायाध्यक्ष डाॅ. लम्बोदर झा, वाणिज्य संकायाध्यक्ष डाॅ. लम्बोदर झा, शिक्षा संकायाध्यक्ष डाॅ. राकेश कुमार, मेडीसिन संकायाध्यक्ष डा. अशोक कुमार यादव,   परीक्षा नियंत्रक डाॅ. नवीन कुमार, सिंडीकेट सदस्य डाॅ. रामनरेश सिंह एवं जवाहर पासवान, सिनेटर डाॅ. नरेश कुमार, मनीषा रंजन एवं रंजन यादव, उप कुलसचिव (अकादमिक) डाॅ. एम. आई. रहमान, पीआरओ डाॅ. सुधांशु शेखर, कुलपति के निजी सहायक शंभु नारायण यादव, भंडारपाल बिमल कुमार आदि उपस्थित थे।