फाॅल आर्मी वर्म के संभावित खतरे को लेकर DM ने की बैठक

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मक्का, मिलेट, ज्वार, धान, गेहुँ,गन्ना को खतरा
सहरसा :  जिलाधिकारी शैलजा शर्मा ने अपने कार्यालय वेश्म में फाॅल आर्मी वर्म के संभावित खतरे के लिए गठित जिलास्तरीय कार्य समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए समीक्षा की।कृषि फसलों को फाॅल आर्मी वर्म से संभावित खतरे के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि यह एक बहुभोजी कीट है जो ग्रेमिनी परिवार के प्लांट यथा मक्का, मिलेट, ज्वार, धान, गेहुँ,गन्ना आदि मुख्य फसलों को इससे संभावित खतरा है। फाॅल आर्मी वर्म की पहचान है कि इसका लारवा भूरा धूसर रंग का होता है जिसके शरीर के साथ अलग से ट्यूबरकल दिखता है। इसके कीट के पीठ के नीचे तीन पतली सफेद धारियाँ और सिर पर अलग सफेट उलटा अंग्रेजी शब्द का वाई लिखा दिखता है। इस कीट की मादा एक रात में सौ किलोमीटर से अधिक उड़ते हैं। यह कीट फसल के लगभग सभी चरणों को नुकसान पहुँचाता है लेकिन मक्का के पŸाों के साथ-साथ बालि को भी विशेष रूप में प्रभावित करता है। प्राचार्य मंडल भारती कृषि महाविद्यालय अगवानपुर एवं वरीय वैज्ञानिक -सह- प्रधान कृषि विज्ञान केद्र अगवानपुर तथा जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि सहरसा जिला में अब तक फाॅल आर्मी वर्म पाये जाने की सूचना नहीं है। जहाँ भी इस संबंध में सूचनाएं प्राप्त हुई है।
वहाँ जाँच दल भेजकर जाँच कराई गई और उनमें फाॅल आर्मी वर्म नहीं पाया गया एवं उनमें अन्य कारण प्राप्त हुए हैं।
कृषि महाविद्यालय के प्राचार्य ने कहा कि प्रारंभिक अवस्था में इस संबंध में सूचना प्राप्त होने पर इसका नियंत्रण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मक्का के प्रारंभिक अवस्था जहाँ भी फाॅल आर्मी वर्म दिखाई दे, उसके हाॅर्ल में सूखा बालु एवं हल्का चूना का मिश्रण डालने से सफल नियंत्रण हो जाता है। समीक्षोपरांत जिलाधिकारी ने निदेश दिया कि कीटनाशी डीलर के यहाँ सबसे पहले सूचना मिलती है । फलतः कीटनाशी विक्रेताओं की बैठक आहूत कर इस विषय पर चर्चा करने से जागरूकता बढ़ेगी तथा शीघ्र सूचना प्राप्त होने से समय पर कारवाई की जा सकेगी। जिले के सभी कीटनाशी अनुज्ञप्तिधारियों का प्रषिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें प्रशिक्षित करने को कहा गया। उन्होंने कृषकों के स्तर पर व्यापक प्रचार कराने का निर्देष दिया। निर्देष दिए गये कि प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर कृषि विभाग द्वारा गठित समिति की बैठक प्रत्येक माह की निर्धारित तिथि को करायी जाय।
बैठक में इस विषय से सबको अवगत कराई जाय।
जिलाधिकारी ने कहा कि जिलान्तर्गत
कहीं भी फाॅल आर्मी वर्म कीट के संबंध में सूचना प्राप्त होते हीं त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच दल द्वारा यथाशीघ्र निरीक्षण कराकर रिपोर्ट प्राप्त करें। मोबाइल तकनीक का सहारा लेकर अधिक से अधिक कृषकों का इस आषय का संदेष भेजा जाय कि फाॅल आर्मी वर्म कीट की सूचना मिलते हीं निकट पंचायत में अवस्थित पंचायत कृषि कार्यालय/प्रखंड कृषि/जिला कृषि कार्यालय को इसकी सूचना दें।
जिलाधिकारी ने कहा कि सहरसा जिले में फाॅल आर्मी वर्म के प्रकोप की कोई सूचना अब तक नहीं है। अफवाह से बचते हुए फाॅल आर्मी वर्म कीट लक्षण प्राप्त होने पर कृषि विभाग के पदाधिकारियों/कर्मियों को तुरंत सूचना देनंे की अपील की। इसके अतिरिक्त मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत जिला कार्यकारिणी समिति का गठन जिला पदाधिकारी के अध्यक्षता में किया गया। इस समिति का मुख्य कार्य प्रतिवर्ष नमूना संग्रहण वार्षिक कार्य योजना, नमूना विष्लेषण, मृदा परीक्षण परिणाम के अनुसार प्रमुख फसलों हेतु समेकित उर्वरता प्रबंधन विकसित करना एवं प्रषिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाना है।पायलट प्रोजेक्ट के तहत वितीय वर्ष 2019-20 में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के क्रियान्वयन हेतु किसानों के होल्डिंग के आधार पर जिले के प्रत्येक प्रखंड के एक-एक राजस्व ग्राम का चयन कर उस ग्राम के सभी होल्डिंग से मिट्टी नमूना संग्रहण का कार्य किया जाना है। जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि इसके आधार पर मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार किया जाएगा।जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि पायलट प्रोजेक्ट कार्यक्रम के तहत विभागीय निदेश के आलोक में समय सीमा के अंदर शत प्रतिषत मिट्टी नमूना संग्रहण, विष्लेषण एवं किसानों के बीच मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण करायें एवं इसके आधार पर किसानों को संतुलित उर्वरक के उपयोग के बारे में जानकारी दें। जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहे, पर्यावरण का संतुलन कायम रखते हुए तथा कम लागत में अधिक उत्पादन किया जा सके।
बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी, परियोजना निदेषक आत्मा, प्राचार्य कृषि महाविद्यालय अगवानपुर सहित कृषि विभाग के वैज्ञानिक एवं पदाधिकारीगण उपस्थित थे।