सहरसा में Blood का काला करोबार,CS है बेखबर…

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रक्त अधिकोष में खून का खेल

सहरसा@भार्गव भारद्वाज: ब्लड बैंक में लगातार कई वर्षों से लाल खून के पीछे काले कारनामे का भंडाफोड़ अब सदर अस्पताल से निकल कर सोशल मीडिया तक पहुँच गया है लेकिन सिविल सर्जन के कान पर जु तक नही रेंग रहा है। मालूम हो कि सदर अस्पताल स्थित रक्त अधिकोष में जिस मरीज को रक्त की जरूरत होती थी। उसे रक्त देने के लिए उसके परिजन ही अधिकोष की ओर रूख करते थे। लेकिन समय बदला और जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ युवाओं ने रक्त की महत्ता को देख संगठन का निर्माण कर निस्वार्थ रूप से जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध करा रहे है। धीरे-धीरे युवाओं की यह मुहिम रंग लायी और रक्त की कमी के कारण कोई परेशान नहीं हो रहे है। लेकिन अब रक्त को लेकर कई जगहों पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता है। जिसकी जानकारी ब्लड बैंक कर्मी स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन को नहीं देते है।कथित तौर पर शिविर में संग्रह किये गये रक्त को काला बाजारी कर निजी नर्सिंग होम के हाथ बेच देते हैं। इसकी भी जानकारी किन्हीं को नहीं रहता है। जिसका फायदा रक्त कारोबारी जमकर उठाते है।ताजा मामला एचडीएफसी बैंक के स्थानीय शाखा से व दूसरा आरएमएम लॉ कॉलेज से जुड़ा है। बैंक में आयोजित शिविर में मात्र चार यूनिट रक्तदान हुआ लेकिन प्रबंधन ने 50 यूनिट रक्तदान की बात कही।कॉलेज में बीते दिन शिविर में 19 यूनिट रक्तदान हुआ लेकिन संग्रहित रक्त कहां गया किसी को पता नहीं है । गुरूवार को सोशल मीडिया पर कॉलेज में आयोजित रक्तदान शिविर को लेकर एक ऑडियो वायरल हो रहा है।जिसमें दो व्यक्तियों के बीच हुई बातचीत स्पष्ट सुनाई दे रही है।इस मामले को लेकर समाज सेवी रौशन झा ने ब्लड बैंक के काले करतूत को उजागर करते हुए जिला पदाधिकारी ,सिविल सर्जन समेत जिले के वरीय पदाधिकारी से जांच की मांग को लेकर आवेदन दिया है। अब देखना है जिले के पदाधिकारी खून के लाल रंग के पीछे के काले कारनामो को जांच करते है या आवेदन को ठंढा बस्ते में डाल देंगे?