दया याचिका इंसानों के लिये है,दरिंदों के लिये नहीं : रोहिणी

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बेटियों से दुष्कर्म की घटना से व्यथित बीएचयू में पढ़ रही खगड़िया की लाडली ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेजा पत्र 

पीएम को भेजे खत में खगड़िया की लाडली ने दुष्कर्म की घटना रोकने के लिये कानून में संशोधन के दिये सुझाव 

उम्र के वर्गीकरण के आधार पर दुष्कर्मी को अलग अलग सजा देने के कानून में बदलाव की मांग, हर उम्र के दोषी को हो फांसी

दो महीने के अंदर सुनवाई पूरी कर दुष्कर्मियों को सरेआम चौक-चौराहे पर फांसी देने से हवशी दरिंदों में पैदा होगा डर 

प्रधानमंत्री जी, सिर्फ कठोर कानून बनाने, कैंडल लाइट जलाने व लच्छेदार भाषणों से नहीं रुकेगी दुष्कर्म की घटना  

हर कोई बेटी से कहते हैं कि कभी घर की इज्जत खराब मत करना, बेटे से यह क्यों नहीं कहते कि कभी किसी के घर की इज्जत से खिलवाड़ मत करना. हैवानियत की घटना के बाद मोमबत्ती जलाने या लच्छेदार बयान देने से काम नहीं चलने वाला है. इंसानियत को शर्मसार करने वाली दुष्कर्म जैसी जघन्य घटनाओं की पुनरावृति रोकने के लिये तय सीमा के अंदर सुनवाई पूरी कर दोषियों को सरेआम फांसी पर लटकाया जाना चाहिये. ताकि हवशी दरिंदों में डर पैदा हो सके:रोहिणी, छात्रा बीएचयू.”

खगड़िया@अजय :हैदराबाद की हैवानियत से व्यथित खगड़िया की बेटी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र भेज कर कहा है कि दया याचिका इंसानों के लिये हैं, दंरिदों के लिये नहीं. चौथम की रहने वाली रोहिणी कुमारी ने दुष्कर्म के कानून में संशोधन कर और कठोर बनाने की गुजारिश की हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही खगड़िया के चौथम प्रखंड की रहने वाली रोहिणी ने पीएम को भेज खत में दुष्कर्म की घटना रोकने के लिये कानून में संशोधन के कई सुझाव देकर अमलीजामा पहनाने का अनुरोध किया है. चौथम बाजार निवासी प्रीति सिंह व जीवराज बहादुर सिंह की लाडली रोहिणी (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की एमए की छात्रा) ने कहा है कि हैदराबाद में डॉक्टर की पढ़ाई कर रही लड़की के साथ गैंगरेप की घटना के बाद जहां हर तरफ शिकायतें और आक्रोश का दौर है. राजनीतिक विज्ञान की छात्रा होने के नाते कानून सुधार संबंधित सुझाव की जरुरत पर जोर देते हुए रोहिणी ने कहा है कि सर्वप्रथम पॉक्सो एक्ट में सुधार की मांग की. उन्होंने पीएम के अलावा राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रीय महिला आयोग, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को पत्र भेज कर बेटियों को दुष्कर्म के दर्द से बचाने के लिये कानून में संशोधन की आवश्यकता जतायी है. हर उम्र के दुष्कर्मी को हो फांसी 
खगड़िया की बेटी रोहिणी ने पीएम को भेजे सुझाव में कहा है कि वर्तमान में उम्र के आधार पर दुष्कर्मी  को अलग अलग दंड का प्रावधान है. उन्होंने इस कानून को गैरवाजिब बताते हुए इसमें संशोधन की सलाह देते हुए कहा कि उम्र के वर्गीकरण के आधार पर दुष्कर्मी को अलग अलग सजा का प्रावधान ठीक नहीं है. बलात्कार एक संगीन और अमानवीय अपराध है. इसकी सजा एक ही होनी चाहिए, चाहे दोषी किसी भी उम्र की क्यों न हो, उसे तय समय में सुनवाई पूरी कर फांसी पर लटकाया जाना चाहिये. न्याय की सारी प्रक्रिया स्पीडी ट्रायल की मदद से दो महीने के भीतर पूरी कर दुष्कर्मी को फांसी पर लटका दिया जाना चाहिये. उन्होंने सवालिया लहजे में पीएम श्री मोदी से पूछा है कि निर्भया कांड के बाद न जाने कितनी बेटियां, हवशी दरिंदों का शिकार बनी लेकिन आज भी अधिकांश पीड़िता के परिजन न्याय की आस लगाये सिस्टम को कोसने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे हैं. हम सभी जानते हैं निर्भया को इंसाफ पाने में सात साल लग गए लेकिन मुजरिमों की अभी तक फांसी भी नहीं हुई है. दुष्कर्मियों को दया याचिका का अधिकार खत्म हो :
इंसानियत को शर्मसार करने वाली इस तरह की घटनाओं के बाद कुछ दिनों तक मामला गरम रहता है, सरकार से लेकर समाज के लोग तरह तरह के सुझाव देने के अलावा कानून को और कठोर बनाने का एलान करते हैं लेकिन इन सारे कवायदों के बीच हवशी दरिंदे द्वारा बेटियों की इज्जत को तार तार करने का सिलसिला जारी है. कल निर्भया, आज दिशा, आगे न जाने कौन सी बेटी इन हैवानों का शिकार बन जायेगी, कहना मुश्किल है. बीएचयू की छात्रा रोहिणी ने पीएम को भेजे पत्र में कहा है कि बलात्कार जैसे अमानवीय अपराधों के लिए दया याचिका जैसी सुविधा पूरी तरह से खत्म कर दी जाए. मानवधिकार के ठेकेदारों को उन बेटियों के दर्द को समझना होगा जो दुष्कर्मियों के मानवाधिकार की रक्षा के लिये शर्मनाक बयान देते फिरते हैं. आजीवन कारावास नहीं, सीधे फांसी पर लटकाओ :
दुष्कर्म का अपराध साबित हो जाता है तो इस कुकृत्य के लिये आजीवन कारावास या 20 वर्ष कारावास के स्थान पर सीधे मृत्युदंड दे देना चाहिए. बलात्कार जैसे अपराधों के लिए मात्र मृत्यदंड काफी नहीं है, ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाना है तो अपराधी को सरेआम बीच चौराहे पर फांसी पर लटकाया जाना चाहिये. समाज में घट रही बलात्कार की घटना से व्यथित रोहिणी ने कहा कि आंकड़े बताते है कि 94 प्रतिशत बलात्कार परिचित व्यक्तियों द्वारा किये जाते हैं.  महिलाओं के खिलाफ हिंसा के हाई प्रोफाइल मामलों से भारत में गुस्सा बढ़ा है. हैदराबाद की जघन्य घटना के खिलाफ सोमवार को हजारों लोगों ने देश भर में सड़कों पर प्रदर्शन किया. लोगों ने बलात्कार के मामलों को अदालतों के माध्यम से तेजी से निपटाने और कड़े दंड देने की अपील की है.