जब शरीर अशक्त होता है तो आर्थिक सुरक्षा की आवश्यकता होती है: डीएम

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इस योजना के माध्यम से आपको पेंशन प्राप्त होगा
सहरसा:आप उम्र भर काम करते हैं,दैनिक मजदूरी जो आपको प्राप्त होती है वह दैनिक जरूरतों में व्यय हो जाती है। उम्र होने पर जब शरीर अशक्त होता है तो आर्थिक सुरक्षा की आवश्यकता होती है। आपकी सुरक्षा के लिए भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना शुरू की गई है।
आज जिलाधिकारी शैलजा शर्मा प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना से संबंधित कार्यक्रम का द्वीप प्रज्वलित कर उद्घाटन करते हुए संबोधित कर रही थी। डीएम ने आगे कहा कि शरीर की स्फूर्ति पचास वर्ष के बाद कम होने लगती है। उसके बाद आपको पेंशन की आवश्यकता होती है। इस योजना के माध्यम से आपको पेंशन प्राप्त होगा। इसके लिए आप निबंधन
करायें और अधिक से अधिक लोगों को भी बतायें तथा इस योजना से उन्हें जोड़ें।
सहायक श्रमायुक्त ने प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि असंगठित क्षेत्र के कामगारों यथा- खेतीहर मजदूर, फेरीवाला, रिक्षा एवं ठेला चालक, भूमिहीन मजदूर, धोबी, कचरा चुनने वाले, बोझा ढोने वाले,निर्माण मजदूर आदि जो 18 से 40 वर्ष आयु के हैं और उनके मासिक आय पन्द्रह हजार से कम है तथा ई.पी.एफ.ओ, एन.पी.एस., ई.एस.आई.सी.
(सरकार पोषित) के सदस्य या आयकर दाता नहीं हो वे इस योजना का लाभ लेने के पात्र हैं। इसका निबंधन मनरेगा कार्यालय, प्रखंड कार्यालय, श्रम
कार्यालय एवं काॅमन सर्विस सेंटर अन्य जगहों पर आॅनलाइन निबंधन कराया जाना है इसके लिए आधार कार्ड, बचत खाता या जनधन पासबुक आवष्यक है।
अंगूठे/अंगुली द्वारा (बायोमैट्रिक) पहचान होने के बाद कम्प्यूटर द्वारा मासिक योगदान तय होगा (न्यूनतम 55 रूपये अधिकतम 200 रूपये) आवेदक द्वारा पहला मासिक भुगतान नगर किया जायेगा। तत्काल कम्प्यूटर से डेबिट, अधिदेष, उत्पन्न होगा जिसपर आवेदक का हस्ताक्षर होगा। आवेदक को कम्प्यूटर जनित कार्ड तुरंत दिया जायेगा, अगले माह से स्वतः योगदान की राषि खाते में कटेगा। 60 वर्ष आयु के बाद 3000 हजार रूपये प्रतिमाह की सुनिष्चित पेंषन प्राप्त होगा। यह स्वैच्छिक व अंषदायी पेंषन है। केन्द्र सरकार द्वारा बराबर का अंषदान देय रहेगा। मासिक अंशदान न्यूनतम 55 से अधिकतम 200 रूपये उम्र के आधार पर ली जाएगी।
कार्यक्रम में सदर अनुमंडल पदाधिकारी शम्भूनाथ झा, सहायक श्रमायुक्त, श्रम अधीक्षक, सहरसा एवं काफी संख्या में असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, कामगार, एवं अन्य उपस्थित थे।