राष्‍ट्रीय राजपूत परियोजना के तहत प्रताप सम्‍मेलन का आयोजन

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देश के प्रति अपने कर्तव्‍य और जिम्‍मेदारियों को समझने के लिए अपनी सभ्‍यता – संस्‍कृति की जड़ों से जुड़ना है आवश्‍यक

सहरसा: धर्म जागरण समन्‍वय, सहरसा द्वारा रविवार को सांस्‍कृतिक चेतना और समरसता के लिए राष्‍ट्रीय राजपूत परियोजना के तहत प्रताप सम्‍मेलन का आयोजन नवहट्टा के शाहीडीह में किया गया, जिसका विधिवत उद्घाटन मुख्‍य अतिथि धर्म जागरण समन्‍वय के क्षेत्र प्रमुख बिहार – झारखंड प्रचारक सूबेदार सिंह ने किया। इस मौके पर राजपूत परियोजना, प्रमुख बिहार सह पूर्व विधायक किशोर कुमार ने सूबेदार सिंह समेत अन्‍य गणमान्‍य अतिथि का स्‍वागत करते हुए उन्‍हें राजपूताना शौर्य का प्रतीक चिन्‍ह तलवार भेंट किया। कार्यक्रम की अध्‍यक्ष श्री प्रमोद नारायण सिंह, अध्यक्ष अखिल भारतीय क्षेत्रीय महासभा और मंचसंचालन डॉ राजीव प्रताप सिंह ने किया।

सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए मुख्‍य अतिथि सूबेदार सिंह ने इस आयोजन आज के परिप्रेक्ष में बेहद महत्‍वपूर्ण बताया। उन्‍होंने कहा कि अपनी मातृभूमि की स्वाधीनता के लिए अपना पूरा जीवन का बलिदान कर देने वाले ऐसे वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप और उनके स्वामिभक्त अश्व चेतक आज हमारे प्रेरणाश्रोत हैं। यह देश युवाओं का है और युवाओं को देश के प्रति अपने कर्तव्‍य और जिम्‍मेदारियों को समझने के लिए उन्‍हें अपनी सभ्‍यता – संस्‍कृति की जड़ों से जुड़ना होगा। तभी हम अपनी राष्‍ट्र की रक्षा आंतरिक और बाह्य आक्रांताओं से कर सकेंगे। हमारा देश सोने की चिडि़या कहलाता था। उस वक्‍त सभी लोग आपसी सद्भाव के साथ रहते थे। लेकिन विदेशी आक्रांताओं ने न सिर्फ हमारे देश के लूट, बल्कि हमारे समाज में कटुता और नफरत पैदा कर दी। लेकिन अब हमें उस नफरत को मिटाना है, ऐसे में राजपूत समाज पर आगे बढ़कर देश की रक्षा की जिम्‍मेवारी फिर से आ गई है।

सूबेदार सिंह ने कहा कि हम सभी भगवान मनु के वंशज हैं, इसलिए जो भी मनुष्‍य इस पृथ्‍वी पर हैं, सभी क्षत्रिय हैं। गीता में भगवान ने कहा कि चतुवर्णम मया शिष्‍टा, गुन कर्म विभागश:। हमारे यहां जाति व्‍यवस्‍था नहीं थी, वर्ण व्‍यवस्‍था थी। छुआछूत, भेद भाव नहीं था। यह जो छुआ छूत है वह इस्‍लामिक काल की देन है। हम क्षत्रिय हैं। हमारा काम समाज और देश की सुरक्षा करना है। ये हमारी जिम्‍मेवारी है कि अपने बच्‍चों को धार्मिक शिक्षा दें, ताकि हमारे बच्‍चे ईमानदार, कर्त्तव्‍यनिष्‍ठ और नैतिकवान बन सके। उन्‍होंने कहा कि राजपूत होने से सभी अमीर हो जाता है ऐसा नहीं है। इसलिए सबके बच्‍चों को पढ़ाई और रोजगार मिलना चाहिए। आज दहेज समाज का दानव बनकर खड़ा है, इसे अब खत्‍म हो जाना चाहिए।

वहीं, राजपूत परियोजना, प्रमुख बिहार सह पूर्व विधायक किशोर कुमार ने राजपूताना इतिहास से सीख लेने की बात करते हुए कहा कि आज राजपूतों का ये कर्तव्‍य है कि कोई भी विधर्मी न बनने पाये और जो विधर्मी बन गये उनका शुद्दीकरण समाज का कर्त्तव्‍य है। देश के लिए सम्राट चंद्रगुप्‍त से लेकर कभी बप्‍पा रावल के नेतृत्‍व में, कभी राणा प्रताप, राणा थंगा के नेतृत्‍व में, कभी शिवाजी महाराज, राजा राणा राज सिंह के नेतृत्‍व में विदेशी आक्रमणकारियों को मुंहतोड़ जवाब दिया। महारानी कर्मावती, महारानी पद्मिनी के नेतृत्‍व में देश भक्ति एवं हिंदु धर्म की रक्षा के लिए हजारों रानियों ने जौहर करके सर्वोकृष्‍ट बलिदान की परंपरा निभाई, जिसे जब तक धरती रहेगा, तब तक याद करता रहेगा। भारत के सीमाप्रांत पश्चिम में चमरसन वंश का शासन था, जिसने सैकडों वर्ष तक विदेशी आक्रमणकारियों को घुसने नहीं दिया। उसी वंश के संत रविदास जी थे, जो राणा सांगा के धर्म गुरूवार थे। यही चमरसेन वंश के लोगों को विदेशी आक्रमणकारियों ने अछुत बनाया। इसलिए हम शुरू से ही बिहार समेत पूरे देश में एनआरसी को लागू करने की मांग सरकार से करते हैं, क्‍योंकि बाहर से आये लोगों ने हमारे देश को राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्‍कृतिक और अन्‍य कई रूपों से कमजोर किया है। बाहरी लोगों से देश को बचाने की आज के समय में बड़ी चुनौती है।

छातापुर विधायक नीरज कुमार बबलू ने कहा कि राजपूतों ने हमेशा निर्बल व शरणागत की रक्षा की है और समय समय पर अपने शौर्य का परिचय कराया है। क्षत्रियों ने हमेशा कमजोर की मदद की है और समाज में न्‍याय के लिए शहादत भी दी है। हमें अपने पूर्वजों की दिलेरी और वीरता का अनुकरण करना चाहिए, जो राष्‍ट्रहित और देश हित को समर्पित था। ये कहा भी गया है कि जो समाज अपने इतिहास को याद रखता है वही आगे विकास करता है। इसलिए हमारे युवाओं को अपनी जड़ो से जुडने की जरूरत है।

सियाराम सिंह, पूर्व प्रमुख, अरविंद कुमार सिंह, सुदेश कुमार सिंह ज़िला अध्यक्ष बार कौंसिल सहरसा, उमा खां, मुकेश सिंह, लॉ कॉलेज प्रधानाध्यापक, सहरसा, बिनोद सम्राट, अभय सिंह, रमेन्द्र कुमार बब्बू, मुखिया नाभट्टा, अजय कुमार सिंह,पंकु सिंह, मुखिया किशोर सिंह,त्रिभुवन प्रसाद सिंह, अरुण सिंह,विजय वसंत, दिलीप सिंह सुरेश प्रसाद सिंह, प्रमोद सिंह, शिवेन्द्र सिंह, रणधीर कुमार सिंह, कन्हैया सिंह आदि लोग मौजूद रहे।