एक्जिट पोल : मधेपुरा की त्रिकोणीय लड़ाई में कौन मार रहा बाजी…

2414

NEWS18-IPSOS एक्जिट पोल में आ रहे रुझानों के अनुसार मधेपुरा लोकसभा 

पूर्वी बिहार की हाईप्रोफाइल मधेपुरा सीट पर मतदान तीसरे चरण में 23 अप्रैल को हुए थे. अब लोकसभा चुनाव समाप्त होने के बाद इस सीट से NEWS18-IPSOS एक्जिट पोल में आ रहे रुझानों के मुताबिक दो बड़े नामी नेता पप्पू यादव और शरद यादव हारते दिखाई दे रहे हैं. सर्वे के मुताबिक त्रिकोणीय लड़ाई में जेडीयू के दिनेश चंद्र यादव बाजी मार रहे हैं. इस सीट से शरद यादव और पप्पू यादव दोनों ही सांसद रह चुके हैं.

‘मंडल राजनीति’ की प्रयोगशाला

देश में मंडलवादी राजनीति की प्रयोग भूमि और ‘यादव लैंड’ के नाम से मशहूर मधेपुरा (Madhepura) लोकसभा क्षेत्र समाजवादी पृष्ठभूमि के नेताओं के लिए उर्वर रहा है. बीपी मंडल से लेकर शरद यादव, लालू प्रसाद यादव, राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने बारी-बारी से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है. यहां सत्ता विरोधी सियासत की आंधी चलती रही है. यहां कभी नेहरू की आंधी में यहां से किराई मुसहर जीते तो 2014 में मोदी की सुनामी में भी पप्पू यादव जीते थे.त्रिकोणीय यादव संघर्ष

मुख्य मुकाबला तीन यादवों के बीच है. महागठबंधन की ओर से आरजेडी के शरद यादव, एनडीए की ओर से जेडीयू के टिकट पर दिनेश चंद्र यादव और वर्तमान सांसद और जन अधिकारी पार्टी के प्रत्याशी पप्पू यादव के बीच त्रिकोणीय संघर्ष बन पड़ा है.

राजनीतिक इतिहास

1967 में मधेपुरा लोकसभा सीट अस्तित्व में आई. यहां विधानसभा की 6 सीटें हैं. इस सीट में मधेपुरा जिले का सोनवर्षा, आलमनगर, बिहारीगंज, मधेपुरा तो सहरसा जिले का सहरसा और महिषी विधानसभा क्षेत्र आता है.1967 में इस सीट पर हुए पहले चुनाव में  संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर बी.पी. मंडल चुनाव जीते थे. फिर 1968 के उपचुनाव में भी वो जीते थे. 1971 में इंदिरा गांधी की लहर में इस सीट पर कांग्रेस के चौधरी राजेंद्र प्रसाद यादव जीते थे. 1977 में इस सीट पर बी.पी. मंडल ने भारतीय दल के टिकट पर फिर बाजी मारी. फिर 1980 में कांग्रेस (यू) के टिकट पर चौधरी राजेंद्र प्रसाद यादव फिर जीते. 1984 में यहां से कांग्रेस महाबीर प्रसाद यादव जीते  तो यह आखिर बार था जब कांग्रेस ने यहां विजयश्री पाई थी. उसके बाद यह ज्यादातर समाजवादी नेताओं के पास ही रही. 1989 में जनता दल के रामेंद्र कुमार यादव जीते तो फिर 1991 और 96 में शरद यादव ने बाजी मारी. 1998 में इस सीट पर लालू प्रसाद यादव जीते. 1999 में जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे शरद यादव को जनता ने चुना. 2004 में आम चुनावों में यहां से लालू यादव जीते तो फिर तुरंत हुए उपचुनाव में पप्पू यादव यादव जीते थे. 2009 में इस सीट पर एक बार फिर शरद यादव ने कब्जा जमाया. वहीं 2014 में मोदी लहर में यहां पप्पू यादव ने बाजी मारी थी.

रोम पोप का, मधेपुरा गोप का

‘रोम है पोप का. मधेपुरा है गोप का’. इसका सीधा मतलब ये है कि मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र में यादव जाति के वोटर सबसे ज्यादा हैं. परिसीमन के बाद आंकड़े थोड़े बदले हैं. पर यदि वोटर के आधार पर जाति की बात की जाए तो मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र में अब भी यादव जाति के वोटर सबसे ज्यादा हैं. यही कारण है 1967 से अब तक यादव जाति के उम्मीदवार चुनाव जीतते आ रहे हैं.

2014 के नतीजे

पिछले लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जनता दल यूनाइटेड के शरद यादव को पचास हजार मतों के अंतर से पराजित किया था. तीसरे नंबर पर BJP के विजय सिंह कुशवाहा रहे थे.

शरद यादव

बिहार की राजनीति में शरद यादव की तगड़ी साख है. लंबे समय तक नीतीश कुमार के साथ राजनीति करने वाले शरद यादव इस बार आरजेडी खेमे से प्रत्याशी हैं. इस सीट पर शरद यादव कभी लालू यादव को भी पटखनी दे चुके हैं. इस बार यह मौका है कि वह 2014 में पप्पू यादव के हाथों मिली हार का हिसाब किताब पूरा कर सकें.

दांव पर पप्पू यादव की प्रतिष्ठा

पप्पू यादव को कभी लालू यादव के बेहद खास लोगों में शुमार किया जाता था. उनकी धाक आरजेडी नेतृत्व में जबरदस्त थी उन्हें लालू परिवार के बाद पार्टी में दूसरी लाइन के नेताओं में गिना जाता था. लेकिन पार्टी विरोधी गतिविधियों का हवाला देकर आरजेडी से निकाले जाने के बाद पप्पू यादव ने अपनी पार्टी बना ली. दिलचस्प ये है कि मधेपुरा के बगल की सीट सुपौल से पप्पू यादव की पत्नी रंजीता रंजन ने कांग्रेस ने टिकट पर चुनाव लड़ा है. पप्पू यादव के लिए आरजेडी से अलग होने के बाद अपनी साख दिखाने का मौका है.

दिनेश चंद्र यादव

दिनेश चंद्र यादव बिहार में समाजवादी पृष्ठभूमि के पुराने नेता हैं और पहले भी विधायक-सांसद रह चुके हैं. वो बिहार सरकार में मंत्री भी  हैं. मधेपुरा में यादव बिरादरी के दबदबे को देखते हुए जेडीयू की तरफ से उन्हें उतारा गया.

सोर्स @NEWS18