आज के परिवेश में युवाओं के कंधों पर है देश का भविष्य

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हर क्षेत्र में युवाओं को आगे आना होगा

डेस्क : वर्तमान परिवेश में युवा सोच एवं युवा पीढ़ी देश के निर्माण में बेहद महत्वपूर्ण है । आज जिस प्रकार युवा जागरूक हो रहे है वो अत्यंत ही आवश्यक है । आने वाले समय में इनकी भागीदारी बढ़ेगी और इनके कंधों पर एक नई जिम्मेदारी आएगी । भारत ही नहीं पूरे विश्व में युवाओं को अपनी जिम्मेदारी का एहसास बखूबी रूप से समझना होगा तथा उसके अनुरूप कार्यों का क्रियान्वयन करना होगा । हर क्षेत्र में युवाओं को आगे आना होगा और अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवानी होगी ।

युवा सोच एवं युवा शक्ति से ही देश का विकास एवं निर्माण संभव है । खासकर युवाओं को जिस प्रकार दिग्भ्रमित किया जा रहा है वो बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है । युवाओं को इन सारी चीज़ों को समझना होगा एवं अपनी उपयोगिता को सही दिशा में प्रयोग करना होगा । कारण चाहे जो भी रहा हो , मैं उन सारी पहलुओं पर नहीं जाना चाहता हूँ क्योंकि उनसे युवाओं का विकास संभव नहीं है । बहुत सारे कारण रहे है जिससे युवा अपने आप को एक बेहतर मार्ग प्रशस्त करने में अभी भी सफल नहीं हो पाए है । चाहें वो राजनीतिक कारण हो या फिर सामाजिक कारण या फिर आर्थिक कारण । लेकिन आने वाले समय में इन सारी चीज़ों को भुलाकर एक नई सोच के साथ अपने अंदर की क्षमता को बेहतर अंदाज़ में पूरा करना होगा । क्योंकि हमसभी जानते है इस बात को कि जिस दिन युवा अपने क्षमता का सही दिशा में प्रयोग करेंगे उस दिन कोई भी चीज़ उनके आड़े नहीं आ सकती है फिर चाहें कोई भी कारण क्यों न हो ?युवा सोच एवं युवा शक्ति से उम्र का कोई लेना देना नहीं है । कोई भी व्यक्ति जिसके पास विचार है , जिसके पास कौशल है , जिसके पास क्षमता है वो एक नए राष्ट्र का निर्माण बेहद ही अच्छे स्वरूप में कर सकता है । बस जरूरत है हम जैसे युवाओं को एकजुट होने की , जरूरत है अपने अंदर की क्षमता को पहचानने की और जरूरत है अपने कार्यों से राष्ट्र को एक नई दिशा और दशा प्रदान करने की ।

अभिनव नारायण
छात्र ( विधि एवं कानून )
एमिटी विश्वविद्यालय