KBC के हॉट शीट से कम नहीं यह लोकसभा,3 दिग्गज मैदान में

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वोट आपका अधिकार है,मतदान जरूर करें

तीन दिग्गजों के चुनावी मैदान में उतरने से मधेपुरा लोकसभा की सीट कौन बनेगा करोड़ पति के हॉट की तरह हो गया है।हालांकि के बी सी के हॉट सीट पर बैठने के लिए फास्टेट फिंगर फ़ास्ट का सबसे पहले जबाब देना पड़ता है लेकिन आम चुनाव में मतदाता के उंगलियों पर लगी सियाही हॉट सीट पर बैठाने का काम करेगी ।

मधेपुरा लोकसभा में तीन कद्दावर स्वजातीय नामांकन कर दिन-रात प्रचार-प्रसार में जुटे हुए है।इस चुनाव में भाजपा-जदयू-लोजपा गठबंधन एनडीए से जदयू के टिकट पर दिनेश चंद्र यादव और राजद-कांग्रेस-हम-वीआईपी महा गठबंधन से राजद के सिंबल पर शरद यादव मैदान में है वही सीटिंग सांसद पप्पू यादव ने भी जन अधिकार पार्टी से बड़े ही दम-खम के साथ नामांकन कर मैदान में उतर चुके है।मधेपुरा सीट पर महा मुकबला,देश की निगाहें तीनों प्रत्याशियों ने अपना-अपना नामांकन करते हुए चुनाव मैदान में उतर कर मधेपुरा सीट को महा मुकबला होने की संभावना बनाते नजर आ रहे है। मधेपुरा लोकसभा सीट पर हाल के चुनावों में आमतौर पर राजद और जदयू के बीच ही सीधा मुकाबला होता रहा है। बाजी कभी राजद तो कभी जदयू प्रत्याशी के हाथ लगी। राजद के टिकट पर पप्पू यादव मधेपुरा के सीटिंग सांसद हैं। शरद यादव जदयू के टिकट पर भी जीत हासिल कर मधेपुरा का सांसद रह चुके हैं। बदले राजनीतिक हालातों के बीच शरद यादव इस बार राजद के सिंबल पर चुनाव मैदान में है।महागठबंधन से टिकट नहीं मिला तो जाप से लड़ रहे पप्पू यादव तमाम प्रयासों के बावजूद महागठबंधन से टिकट नहीं मिलने के कारण पप्पू यादव ने अपनी पार्टी जन अधिकार पार्टी से चुनाव लड़ रहे है। दूसरी ओर एनडीए से जदयू के टिकट पर राज्य सरकार के लघु सिचाई मंत्री दिनेश चंद्र यादव प्रत्याशी के तौर पर एनडीए कार्यकर्ताओं को साथ लेकर प्रचार में जुटे हुए हैं। दिनेशचंद्र यादव जदयू और भाजपा के आधार वोट बैंक के साथ-साथ बिहार एवं केंद्र में किए गए विकास के बूते चुनाव मैदान में है। तो शरद यादव एम-वाय समीकरण के बूते नैया पार कराने का प्रयास करते नजर आ रहे। वहीं सीटिंग एमपी पप्पू यादव हर सुख- दुख में लोगों के घरों तक पहुंचने, गरीब- गुरबों के लिए एक मददगार की छवि और पांच वर्षों में क्षेत्र के विकास के लिए किये गये प्रयासों के बूते चुनावी बाजी को अपने पक्ष में करने के लिए पूरा दमखम लगा रहे है। आने वाले समय में चुनावी समीकरण क्या रूप लेता है और बाजी किसके हाथ लगेगी यह देखने की बात होगी।
इसके लिए मतदाता ही मालिक है...