राजनीतिक विज्ञापनों के लिए मीडिया सर्टिफिकेशन लेना जरूरी : DPRO

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निर्वाची पदाधिकारी के माध्यम से नोटिस जारी किया जाएगा
सहरसा : स्वच्छ, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण निर्वाचन के लिए भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिले में मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनीटरिंग कमिटि (एम.सी.एम.सी.) बनाई गई है। इस कमिटि के अध्यक्ष जिला निर्वाचन पदाधिकारी शैलजा शर्मा हैं। जिले के सभी चार सहायक निर्वाची पदाधिकारी सहित कुल आठ सदस्य इस कमिटी में हैं।जिला जनसंपर्क पदाधिकारी इसके सदस्य सचिव हैं।
जिला जनसंपर्क पदाधिकारी जयशंंकर कुमार ने बताया कि कोई भी राजनैतिक विज्ञापन बिना एम.सी.एम.सी. से सर्टिफिकेशन के किसी भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या सोशल मीडिया (फेसबुक, ट्वीटर, इंस्टाग्राम, व्हाटसएप ग्रुप आदि) पर नहीं चलाया जा सकता है। राजनैतिक विज्ञापन बल्क एस.एम.एस., वाइस मैसेज, ओडियो विजुअल आदि के रूप में तथा केबल टी.वी., सिनेमा हॉल आदि के माध्यम से बगैर सर्टिफिकेशन के नहीं चलाया जा सकता है।
एम.सी.एम.सी. जिला स्तर, राज्य स्तर तथा दिल्ली के स्तर पर कार्यरत है। राजनैतिक पार्टियों का मुख्यालय जहाँ अवस्थित है, वहाँ के एम.सी.एम.सी. से उनके विज्ञापन का सर्टिफिकेशन कराया जाना है। प्रत्याशी या अन्य कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह जिला एम.सी.एम.सी. से राजनैतिक विज्ञापन का सर्टिफिकेशन कराएंगे।
सर्टिफिकेशन के लिए राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत राजनैतिक दल के उम्मीदवार राजनैतिक विज्ञापन के प्रसारण के तीन दिन पहले तथा स्वतंत्र या गैर पंजीकृत राजनैतिक दल के प्रत्याशी विज्ञापन प्रसारण के सात दिन पूर्व जिला एम.सी.एम.सी. में प्रपत्र 1(एक) में आवेदन देंगे। आवेदन के साथ प्रसारण सामग्री का दो सी.डी. अभिप्रमाणित ट्रांसक्रिप्ट के साथ देना होगा। किस इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर कब-कब और कितने बार यह विज्ञापन दिखेगा और उसका अनुमानित खर्च से संबंधित ब्यौरा भी आवेदन में दर्ज करना होगा। विज्ञापन का भुगतान चेक और ड्राफ्ट से किया जाना आवश्यक है। उचित कारण के आधार पर जिला एम.सी.एम.सी. किसी भी राजनैतिक विज्ञापन को अस्वीकृत कर सकता है। एम.सी.एम.सी. द्वारा सभी प्रत्याषियों,पार्टी के विज्ञापन को निर्वाचन व्यय कोषांग में तथा व्यय प्रेक्षक को नियमित रूप से भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रिंट मीडिया में भी कोई राजनैतिक विज्ञापन उम्मीदवार की सहमति से किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा प्रकाशित किया जाता है, तो उसका खर्च उम्मीदवार के खर्च में हीं जुड़ेगा। यदि उम्मीदवार के बगैर सहमति के प्रिंट मीडिया में विज्ञापन आता है तो विज्ञापन के प्रकाशक पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कोई भी चुनाव से संबंधित पंफलेट, पोस्टर, हैंडबिल पर प्रकाशक मुद्रक का नाम, रहना आवश्यक होगा। मुद्रित प्रति की संख्या, खर्च आदि की जानकारी मुद्रक को निर्वाचन व्यय कोषांग तथा एम.सी.एम.सी. में देनी होगी। जिला एम.सी.एम.सी. प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित एवं प्रसारित सभी न्यूज की निगरानी करेगा तथा यदि पेड न्यूज की संभावना बनी तो संबंधित प्रत्याशी को निर्वाची पदाधिकारी के माध्यम से नोटिस जारी किया जाएगा।