बीजेपी दोस्तों से हाथ मिलाती है और कांग्रेस अपने दुश्मनों से दोस्ती गांठती है :आनंद मोहन

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हम तो सड़क के मुसाफिर हैं,जिन्हें सिंहासन की चाहत है,वे हमें ढूंढ लेंगे : आनंद मोहन

सहरसा : एक मामले में पेशी के दौरान सहरसा न्यायालय पहुँचे पूर्व सांसद आनंद मोहन काफी बिफरे और तल्ख अंदाज में थे ।पेशी के बाद प्रेस से रूबरू होते हुए आनंद मोहन ने कहा कि मौजूदा राजनीति देश को रसातल में पहुंचाने वाला है । विगत 12 वर्षों से सलाखों में कैद रहने के बावजूद हमारा जनाधार किसी से कम नहीं है ।वे पार्टियाँ जो कांग्रेस का ‘वोट बैंक’ दबा कर बैठी हैं,वे किसी भी सूरत में नहीं चाहती हैं कि कांग्रेस फिर से मजबूत हो ।हाल के वाकये से देश के आम अल्पसंख्यकों के मन में बेहद खौफ है ।वे राष्ट्रीय स्तर पर विकल्प की तलाश में हैं ।यही हाल इस देश के उन प्रोग्रेसिव, सोशलिस्ट,सैक्युलर लोगों के मन में भी चल रहा है ।जो धर्म-कर्म, मंदिर-मस्जिद,जाति -मजहब के इन बेवजह के बखेड़ों से उकताए हुए हैं ।ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर लोगों की निगाहें कांग्रेस की ओर है,क्योंकि उसके पास राष्ट्रीय आंदोलन की ‘गंगा -जमुनी संस्कृति’ की एक शानदार साझा विरासत है ।अब देखना यह है कि कांग्रेस नेतृत्व स्वयं में कितना साहस दिखलाता है ।कांग्रेस अपनी जमीन वापस चाहती है,या फिर क्षेत्रीय दलों के ‘ड्राईंग रूम’ का गुलदस्ता बनकर ‘टाईम पास’ करना चाहती है ।
देश में राष्ट्रीय स्तर की दो पार्टियाँ हैं,बीजेपी और कांग्रेस ।
वक्त गवाह है कि बीजेपी जब भी क्षेत्रीय ताकतों से समझौता करती है,अपनी शक्ति और जनाधार को बढ़ाती है ।लेकिन विडंबना देखिए कि कांग्रेस जब भी क्षेत्रीय-क्षत्रपों से मेल करती है,तो उसकी शक्ति और जनाधार में भारी गिरावट आती है ।ऐसा इसलिए कि बीजेपी दोस्तों से हाथ मिलाती है और कांग्रेस अपने दुश्मनों से दोस्ती गांठती है ।आज कुछ पार्टियां धार्मिक आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण चाहती है,तो कुछ पार्टियां जातीय आधार पर समाज में जहर बोना चाहती है ।दोनों ही भारत जैसे समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की सेहत के लिए अत्यंत खतरनाक है ।
आनंद मोहन ने आगे कहा कि वर्तमान की राजनीति मुद्दा विहीन और संघर्ष विहीन हो गई है ।कभी राजनीति संघर्ष,पुरुषार्थ,पराक्रम, त्याग और बलिदान की हुआ करती थी लेकिन आज राजनीति छल-छद्म,ताल-तिकड़म,धूर्तई और बेईमानी का पर्याय बन गई है ।चापलूसी और गणेश परिक्रमा इसका अविभाज्य अंग है ।इसलिए मुद्दा विहीन और संघर्ष विहीन राजनीतिक संगठनों द्वारा धार्मिक उन्माद और जातीय विद्वेष फैलाना उनकी मजबूरी है ।नफरत बोना,नफरत उगाना, नफरत की खेती पर वोट की फसलें काटना उनकी असली फितरत है ।
पूर्व सांसद आनंद मोहन ने इन सियासत दानों के लिए चंद पंक्तियां पैगाम के तौर पर देते हुए कहा कि
विश्वव्यापी राम को एक वृत्त में न डालिए,
निर्विवाद सत्य को असत्य से निकालिए ,
राम जन्मभूमि को तो राम ही संभालेंगे,
हो सके तो आप मातृभूमि को संभालिए…...
पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा पर नागमणि के आरोप के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर श्री मोहन ने कहा मैं सिर्फ इतना जानता हूं कि हाल के दिनों में सीटों की खरीद-फरोख्त का गंदा ट्रेंड जोरों पर है ।मोतिहारी सहित वैशाली,शिवहर,पूर्णिया में भी धनपशुओं का यह शर्मनाक खेल जारी है ।आश्चर्य यह है कि राजनीति के अपराधीकरण पर हाय-तौबा मचाने वाले कथित बुद्धिजीवी,नौकरशाही के राजनीतिकरण और धनपशुओं के इस गंदे खेल पर चुप क्यों हैं ?शिवहर पर असमंजस की स्थिति बने रहने पर उन्होंने कहा कि शिवहर हमारी कर्मभूमि रही है ।वर्ष 1996 और 98 में मैं वहाँ क्रमशः 50,000 और 1,00,000 मतों से जीता हूं ।वर्ष 1999 के चुनाव में 4200 से विजयी घोषित होने के बाद मुझे 917 मतों से जबरन हराया गया ।लवली आनंद पूर्व में कांग्रेस से वहां लड़कर सम्मानित बोट लाई थीं ।पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें साजिशतन सिर्फ 260 मतों से पराजित घोषित किया गया ।विगत 12 वर्षों से वे लगातार शिवहर में सक्रिय रही हैं ।वे ईद,बकरीद,सबेबारात,दुर्गापूजा, दीपावली,छठ,शादी-विवाह, मरनी- हरनी,सुख-दुख में सदैव लोगों के बीच रहीं ।हार से विचलित हुए बगैर वे सदन में नहीं,तो जनसवालों को लेकर सड़क पर संघर्षरत रहीं हैं ।ऐसे में शिवहर छोड़ने का सवाल ही नहीं है ।अगर किन्हीं ने शिवहर की जनभावनाओं से खिलवाड़ की जुर्रत की तो मैं डंके की चोट पर बताना चाहूँगा कि उन्हें वैशाली, बक्सर,पूर्णिया और मधेपुरा में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी ।यानि जेल में बन्द रहते हुए भी शेर की दहाड़ आज लोगों को साफ तौर पर सुनने को मिल रही थी ।वे हर सूरत में शिवहर से लवली आनंद को प्रत्यासी के तौर पर देखना चाहते हैं ।आनंद मोहन ने कहा कि उन्हें सत्ता का सुख लेना होता,तो आज वे 12 साल से जेल के भीतर बन्द नहीं होते ।सभी ने उनका इस्तेमाल किया लेकिन जनता के साथ किसी ने न्याय नहीं किया ।वे जनता के हित के लिए कभी घुटने नहीं टेके,इसी का नतीजा है कि साजिशतन उनलोगों ने उन्हें सजा कराई,जिन्हें उन्होंने अपने दम से राजसिंहासन पर बिठाया था । आनंद मोहन ने कहा कि हमें फंसाने वाले,ईश्वर के दंड से कभी भी नहीं बच सकेंगे ।अगर कांग्रेस लवली आनंद को शिवहर से टिकट देने में असमर्थ हो जाये,तो क्या लवली शिवहर से निर्दलीय मैदान में उतरेंगी और क्या आपकी बेटी भी राजनीति में आ रही है के जबाब में उन्होंने कहा कि कम से कम एक सप्ताह का राजनीतिक खेल देखिए,उसके बाद हम बताएंगे कि आनंद मोहन क्या चीज है ?हम पूरे बिहार में खेल बिगाड़ने का माद्दा रखते हैं ।