देश की गरिमा,संप्रभुता सर्वोपरि,राजनीति बर्दाश्त नहीं : अभिनव नारायण

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आजादी के बाद से लेकर आज तक देश की जनता ने एकजुटता का परिचय दिया

सेंट्रल डेस्क@अभिनव नारायण 

हमारा देश भारत विश्व के सभी देशों में सहनशीलता की पराकाष्ठा पर विराजमान है । भारत एक ऐसा देश है जहाँ विभिन्न धर्मों के लोग , विभिन्न पसम्प्रदाय के लोग बिना किसी भेदभाव के साथ में बिना किसी द्वेष के एक साथ रह रहे है । साथ ही साथ देश के लोग एकजुटता से हर चीज़ का मुकाबला करते आए है और उम्मीद ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि आगे भी करते आएंगे । आजादी के बाद से लेकर आज तक देश की जनता ने एकजुटता का परिचय अपने कार्यों से , अपने साहस से , अपने पराक्रम से , अपने बलिदानों से बखूबी दिया है । भारत की आवाम ने समय समय पर इस बात की पुष्टि की है कि देश के लिए , देश की सुरक्षा के लिए और देश के सम्मान के लिए वो कभी झुकेंगे नहीं , वो कभी रुकेंगे नहीं , वो कभी थकेंगे नहीं । क्योंकि उनके लिए देश सर्वोपरि है , उनके लिए देश की अखंडता अतिसम्मानीय है , उनके लिए देश की सुरक्षा आत्मीय है ।

कुछ दिनों पहले देश पर जो आतंकी हमला हुआ उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया । पूरा देश इस घटना के बाद स्तब्ध है । हमारा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान समय समय पर हमें आँख दिखाने की हिमाकत करता है रखता है । भारत की सरकारों ने समय समय पर बातचीत से हल ढूंढने की पूरी कोशिश करते आई है , लेकिन हर दफा उसने छला हुआ महसूस किया है । लेकिन वो कहते है न कि जब पानी सर से गुजरने लगे तो स्वभाविक रूप से कुछ करने का वक़्त आ गया है ।आज समय यह नहीं है कि पिछली सरकारों ने क्या कदम उठाए या क्या नहीं , पिछली सरकारों में क्या कमी रह गयी या कौन से मोर्चे पर वो विफल रही । इन सब बातों को भूलकर उन गलतियों से सीखकर और आगे उन गलतियों की पुनरावृति न करते हुए एक ठोस कदम , एक बेहतर नीति का निर्माण करके देशहित में कुछ बेहतर करने का वक़्त आ गया है ।

लेकिन इन सबके परे एक बात जो हमेशा से कचोटता आया है वह है इस समय की राजनीति का बढ़चढ़कर बोलबाला ।पिछले कुछ दिनों में जो राजनीतिक पार्टियों के आका है , उनके बयानों पर गौर फरमाया जाए तो सुनकर आप अपने आप को ठगा हुआ महसूस करेंगे । जिस तरीके से भारत की तरफ से जवाबी कार्रवाई हुई उससे पूरे राष्ट्र में एकजुटता एवं भारत के पराक्रम और शौर्य का संदेश पहुँचा । जिस प्रकार पाकिस्तान को उसी के घर में घुसकर , उसी की सरजमीं पर जवाबी हमलों का सामना करना पड़ा , उसके बाद से पूरे विश्व में भारत की तरफ़ से एक कड़ा संदेश गया कि भारत किसी भी देश के खिलाफ नहीं है , किसी भी नागरिक के खिलाफ नहीं है , भारत सिर्फ और सिर्फ आतंकवाद के खिलाफ है । अगर भारत किसी देश या किसी के खिलाफ होता तो शायद वह सिर्फ आतंकी ठिकानों को खत्म नहीं करता , बल्कि वहाँ के आमलोगों को भी नुकसान पहुँचाता , लेकिन इन सबसे इतर भारत अपनी संस्कृति , संस्कार एवं ईमान का परिचय देते हुए आतंकी ठिकानों को छोड़कर किसी को भी नुकसान नहीं पहुँचाया । यह अपने आप मे बताने को काफी है कि भारत की संस्कृति क्या है ? भारत की विरासत क्या है ?

लेकिन कहते हुए शर्म महसूस हो रहा है कि राजनीतिक पार्टियां या कुछ राजनीतिक दल से प्रेरित लोग इसमें भी राजनीति कर रहे है । उन्हें इस बात का ज्ञान नहीं कि पहले देश , पहले राष्ट्र फिर कोई और । जब सरकार ने कड़े अंदाज़ में कारवाई की तो उन्हें युद्ध से होने वाले नफा नुकसान की याद आ गयी , उन्हें कारवाई रास नहीं आयी । तुरंत सबूत की पेशकश करने लगे । वही सरकार जब शांति से मामला सुलझाने की बात कर रही थी , तब उन्हें कारवाई याद आ रही थी , तब उन्हें युद्ध ही एकमात्र उपचार समझ में आ रहा था । जैसे ही कारवाई हुई , उन्हें शांति याद आ गयी । गजब की विडंबना है यह , गजब का दोहरा चरित्र है यह , गजब की दोहरी राजनीति है यह इन लोगों की । जो लोग इमरान खान को धन्यवाद ज्ञापित कर रहे है वो शायद यह भूल रहे है कि देश की जनता समग्र रूप से इसका डटकर मुकाबला कर रही है और उनकी एकता , उनके जोश और जुनून के साथ खिलवाड़ कर रहे है । याद रखिए यह देश जितना सहनशील उससे कही ज्यादा ऊर्जावान , यह देश जितना संस्कारों में पला बढ़ा है उससे कही ज्यादा अपने कार्यों को बख़ूबी अंदाज़ में अंजाम पर पहुँचाने की हिम्मत । जिस देश के प्रधानमंत्री ने 10 सेकेंड के लिए पूरे घटना की निंदा तक को उचित नहीं समझा , उसको किस मुँह से आपलोग धन्यवाद ज्ञापित कर रहे है ? लानत है ऐसे लोगों पर और ऐसे समाज में रह रहे विचारों पर । याद रहे कि हर कोई चाहता है कि बातचीत से हल निकलें लेकिन जब उम्मीद , सिलसिला और समय सीमा हाथ से निकल जाए तो फिर वहाँ न तो सब्र की परीक्षा होनी चाहिए और न ही बातचीत से समझौता ।

सरकार किसी की भी हो , शासन कोई भी कर रहा हो , इन सबसे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, फर्क पड़ता है तो देश की सुरक्षा से , फर्क पड़ता है तो देश के मिज़ाज से , फर्क पड़ता है तो देश की अखंडता से , फर्क पड़ता है तो सिर्फ और सिर्फ राष्ट्र से । राजनीति तो होती रहेंगी , पहले राष्ट्रनीति किया जाना चाहिए । राष्ट्र ही नहीं रहेगा तो राजनीति किस बात की ? फिर क्या औचित्य रह जाता है ? विरोध , आरोप , प्रत्यारोप , असहमति , खंडन , मुख़ालिफ़ ये सब तो होते ही रहता है और होते रहेंगे लेकिन देश की सुरक्षा , देश के जवान , देश की अखंडता , देश की संप्रुभता , देश की गरिमा सर्वोपरि है । इसमें किसी भी प्रकार की राजनीति बर्दाश्त नहीं की जा सकती है । जय हिंद जय भारत 🇮🇳

लेखक एमिटी विश्वविद्यालय के विधि एवं कानून के छात्र है….