राष्ट्रीय संगोष्ठी में आरापट्टी मुखिया ने Gender Analysis and Mainstreaming पर प्रेजेंटेशन दिया

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मुखिया ने गाँवों की स्त्रियों के सशक्तिकरण के लिए इन समस्याओं को अमल में लाने की आवश्यकता बतायी

नई दिल्ली/सहरसा : भारत सरकार के पंचायती राज विभाग के तत्त्वाधान में 18 और 19 जनवरी 2019को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का औपचारिक उद्घाटन पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग भारत सरकार के मंत्री  नरेंद्र सिंह तोमर,सचिव अमरजीत सिन्हा सहित अन्य ने दीप प्रज्वलित कर किया ।

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन सहरसा ज़िले के ग्राम पंचायत आरापट्टी की मुखिया शांति कुमारी चौधरी ने ‘जेंडर एनालाइसिस एण्ड मेनस्ट्रीमींग’ विषय पर अपने प्रोजेक्ट और प्रजेंनटेशन प्रस्तुत कीं। श्रीमति चौधरी ने ग्राम पंचायत की आम सभा के माध्यम से नीति बनाने और योजनाओं के क्रियान्वयन में जेनडर एनालाइसिस की प्रक्रिया द्वारा गाँवों की महिलाओं की भुमिका और भागीदारी को सुनिश्चित करने वाली नीतियाँ बनाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि किसी भी समुदाय के विकास कार्य को गति देने और उस समुदाय में लैंगिक संवेदनशीलता के अभिसरण के लिये जेनडर एनालाइसिस की आवश्यकता है । 
जेनडर मेनस्ट्रीमींग के महत्त्व को स्पष्ट करते हुए कहा कि गाँवो की स्त्रियों के विकास के लिए  जेनडर परिपेक्ष्य से संबंधित  विभिन्न योजनाओं को तैयार करने, इसे रूपरेखा देने, इसे लागू करने, इसकी मोनेटरिंग करने और नयी नीति विकसित करने में स्त्रियों की भागीदारी सुनिश्चित कर स्त्री पुरूष के बीच की असमानता को कम किया जा सकता है और समानता को बढ़ाया जा सकता है।
 ध्यातव्य हो कि 18 और 19 जनवरी को पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार ने भारत वर्ष के लगभग 24 राज्यों के इलेकटेड वीमेन रिप्रजेंटेटिव (EWRs) के लिए इस संगोष्ठी का आयोजन किया है। बाद में पंचायती राज विभाग भारत सरकार के द्वारा जेनडर एनालाइसिस और मेनस्ट्रीमींग मुद्दों पर सुझाव माँगे जाने पर श्रीमति चौधरी ने अपनी राय दी जो निम्न है। 
  • प्रत्येक ग्राम सभा से पहले महिला सभा के आयोजन की व्यवस्था किया जाए।
  • ग्राम सभा तक लोगों को और खासकर महिलाओं के लाने हेतु ग्राम पंचायत की परिवहन व्यवस्था हो।
  • जेनडर बजट को ध्यान में रखकर विद्यालय की चाहरदिवारी  और आँगनबाड़ी केन्द्र बनाने का काम मुखिया के फंड से हो।
  • पंचायत में अपना आर टी पी एस काउंटर हो जहाँ गाँव की महिलाएं अपनी वृद्धावस्था पेंसन, निशक्तता पेंसन विधवा पेंसन आदि का खुद पता कर सके।
  • हर पंचायत में बैंक केन्द्र हो जहाँ से महिलाएं अपनी लेन देन स्वयं कर सके।
  •  प्रत्येक पंचायत में एक महिला उच्च विद्यालय हो।
 मुखिया ने गाँवों की स्त्रियों के सशक्तिकरण के लिए इन समस्याओं को अमल में लाने की आवश्यकता बतायी।