जाति-धर्म पर नहीं,आर्थिक गरीबी पर मिले आरक्षण : ई. रविन्द्र कुमार सिंह

173

10% सवर्ण आरक्षण सराहनीय, मगर देश में सबको मिले समान अधिकार : रोहित सिंह रैकवार

समस्‍तीपुर से शुरू हुआ राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा का छठा चरण

25 फरवरी को पटना में होगा सवर्णो का विशाल शक्ति प्रदर्शन

पटना/समस्‍तीपुर : राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा के छठे चरण की शुरुआत समस्‍तीपुर से हुई, जहां राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा के संयोजक ई. रविन्द्र कुमार सिंह ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा सवर्णों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण संशोधन को बेवकूफ बनाने वाला बताया। उन्‍होंने कहा कि यह सिर्फ वोट की राजनीति है। उन्‍होंने कहा कि सवर्ण आरक्षण में 8 लाख तक इनकम वाले लोगों को गरीब माना गया है, जबकि इनकम टैक्‍स अदा करने का प्रावधान 3 लाख रूपये  पर है, जो लोगों को भ्रमित करने वाला है। सरकार पहले इसे परिभाषित करे। उन्‍होंने कहा कि हालांकि सरकार ने पहली बार आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया है। मगर हमारा मानना है कि आरक्षण जाति या धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक गरीबी के आधार पर मिले और उसका समय – सीमा तय हो।

उन्‍होंने कहा कि 1947 में कमजोड़ लोगों को मुख्‍य धारा से जोड़ने के लिए 10 साल के लिए आरक्षण दिया गया था, मगर बाद में लोगों ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए इसे मुद्दा बना लिया और यह आज तक जारी है। जबकि आरक्षण के बावजूद आज भी दलित – महादलित – आदिवासी भाई लोगों की हालत नहीं सुधरी है। इसका इस्‍तेमाल समाज के लिए लड़ने वालों सवर्णों के खिलाफ किया गया। उन्‍होंने कहा कि आरक्षण तभी प्रभावी होगा, जब लोग साक्षर होंगे। इसके लिए गांव – गांव तक एक समान शिक्षा की व्‍यवस्‍था करनी होगी और हमारी मांग भी यही है। इसके अलावा अगर 10 प्रतिशत आरक्षण का लॉलीपॉप थमाकर राजनीतिक दलों को लगता है कि सवर्ण उन्‍हें वोट करेगा, तो यह गलतफहमी है। हम एससी एसटी काले कानून को भी खत्‍म करने की मांग करते हैं। यह जब तक खत्‍म नहीं होगा सवर्ण वोटर सत्ताधारी दल को वोट नहीं करेंगे।

ई. रविन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा का मुख्य लक्ष्य देश को एक सूत्र में बांधना है। देश में नागरिकों के लिए समान अधिकार, समान नागरिकता और समान का कानून लागू कराना है। सबों के लिए समान शिक्षा, पंचायत स्तर पर एक समान पाठ्यक्रम के तहत मॉडर्न स्कूल स्थापना और सभी बच्चों को एक स्कूल में पढ़ने की व्यवस्था हो, चाहे वो अधिकारियों के बच्चे हो या आम लोगों के। हमारी मांग ये भी है कि राज्य की सभी प्रखंडों में एक मॉडर्न सुपर मल्टी स्पेशल हॉस्पिटल का निर्माण हो, जहां गरीब, मध्यम वर्ग और अमीर एक साथ इलाज करा सके।

वहीं, रोहित सिंह रैकवार ने कहा कि लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी ग़रीब समान्य वर्ग का बिल पास हो गया। अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद संविधान संशोधन होने के बाद यह क़ानून बन जाएगा। लेकिन हम फिर भी एक ऐसा भारत बनाने की मांग कर रहे हैं, जो एक हो। जहां किसी की हकमारी न हो और सबको समान अधिकार भी मिले। उन्‍होंने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में 10% सवर्ण आरक्षण चर्चा के दौरान देखा गया कि इस मुद्दे पर न तो विपक्ष खिलाफ में और न ही सही से पक्ष में बोल रही थी। कम से कम देश के युवाओं को पिछले दो दिनों के संसद में हुई चर्चा अवश्‍य देखनी चाहिए, जिससे बहुत कुछ सीखने और समझने को मिलेगा। उन्‍होंने ये भी कहा कि देश के राजनेताओं को न सवर्ण से कोई मतलब है और न ही अन्‍य जातियों से। इसलिए जब मध्‍यप्रदेश, राजस्‍थान आदि राज्‍यों में चुनाव हारी और आगे लोकसभा चुनाव है, तब इन्‍हें सवर्णों की चिंता हो रही है।

विशाल सिंह परमार ने कहा कि जो समाज आज तक राष्ट्र के लिए सिर्फ उत्थान के लिए बलिदान देने के लिए हमेशा तैयार रहता है उसी समाज को खत्म करने के लिए राजनीतिक लोग करते हैं। हम लोग सभी समाज के राष्ट्र के उत्थान के लिए सोचते हैं, लेकिन हमारे सवर्ण समाज के उत्थान के लिए कोई नहीं सोचता।इसलिए 25 फरवरी को राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा के द्वारा पटना गाँधी मैदान में सवर्ण समाज के द्वारा विशाल रैली रंखा गया है, जिसमें राज्‍यभर से लोग शामिल होंगे।

मालूम हो कि समस्तीपुर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय समान अधिकार यात्रा अपने छठे चरण में पहले दिन रसलपुर से शुरू होकर जोनापुर, बेरी ,चापर इत्यादि जगहों पर सभा एवं जनसंपर्क के साथ समाप्त हुई। इस दौरान रसलपुर में एक सभा आयोजित थी। सभा की शुरुआत में विश्व हिन्दू परिषद सरायरंजन प्रखण्ड के मंत्री रोहन कुमार को 2 मिनट का मौन रख कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी भी दी गयी।

इस मौके पर दीपू सिंह, पिंटू कुमार सिंह, शबनम सिंह, मान सिंह, संतोष सिंह, नागेश्वर सिंह, गुड्डू सिंह, संजय सिंह, पप्पू सिंह, शम्भू सिंह, रंजीत प्रसाद सिंह, गोपाल सिंह, विनायक सिंह, हीरा सिंह, रवीन्द्र सिंह, विनोद सिंह, जयप्रकाश सिंह, गोलू सिंह, अजय सिंह, गणेश राय के साथ सैकड़ो लोग मौजूद थे।