बदहाली पर आंसू बहा रहा पीजी सेंटर…

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गर्ल्स कॉमन रूम का अभाव

पेयजल,शौचालय का अभाव

गंदगी का अंबार,मुख्य द्वार का गेट जर्जर

जंगली घास,नाले का पानी और सुअर चारागाह

छात्राओं के लिए एक अदद शौचालय, यूरिनल तक नहीं

सहरसा : जिले का एक मात्र पीजी सेंटर  सहरसा (सहरसा कॉलेज के उत्तरी भाग) शिक्षकों,कर्मियों एवं संसाधनों की कमी झेल रहा है। परंतु विश्व विद्यालय प्रशासन एवं मानव संसाधन विकास विभाग के द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिस कारण छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।भूपेंद्र नारायण मंडल विश्व विद्यालय प्रशासन के इस उपेक्षापूर्ण रवैये से क्षेत्र के शिक्षा प्रेमियों एवं छात्रों में निराशा भी है।

जानकारी के मुताबिक पीजी सेंटर की स्थापना 1981 ई० को हुई। स्थापना काल से ही यह बी एन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा से संबंध है। परंतु वर्तमान में शिक्षकों व कर्मियों की कमी के कारण यह अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यहां  मैथिली,हिन्दी, गणित,राजनीति शास्त्र,इतिहास एवं अर्थशास्त्र विषयों में MA की पढ़ाई होती है जिसके लिए कुल 28 शिक्षक व 12 शिक्षकेत्तर कर्मचारी के पद स्वीकृत हैं। जिसके विरूद्ध मात्र 18 शिक्षक व  7 शिक्षकेत्तर कर्मचारी ही नियुक्त हैं। सबसे खास बात यह है कि दर्शन शास्त्र की पढ़ाई विगत दो साल तक तो हो रही थी पर शिक्षकों एवं कर्मियों की कमी के कारण इसमें नामांकन से लेकर पढ़ाई तक बंद है।

स्वच्छता अभियान की खुल रहा पोल

एक ओर जिले को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने की दिशा में अभियान चलाया जा रहा है तो दूसरी ओर पीजी सेंटर में साफ-सफाई से लेकर शौचालय तक का बुरा हाल है।

शौचालय एवं पेयजल का अभाव

हालांकि मैथिली, राजनीतिशास्त्र,इतिहास विभाध्यक्ष के कार्यालय में शौचालय की सुबिधा तो है पर पानी की नहीं।वही हिन्दी, गणित एवं अर्थशास्त्र विभाग में यह सुबिधा ही नहीं है ।सबसे खास बात यह है कि 3 सत्रों के करीब 750 छात्र-छात्राएं नामांकित है । समय क्लास भी चलता है ऐसे में छात्र-छात्राओं एवं कर्मियों के लिए बना शौचालय में इस कदर गंदगी बिखरी पड़ी है कि शायद उस शौचालय में जाने के लिए जानवर भी परहेज करते होंगे।यहां शौचालय एवं पेयजल की व्यवस्था दम तोड़ रही है। 

बताते चलें कि पीजी सेंटर कैम्पस में अगल-बगल के कॉलेज कर्मियों के आवास से निकली नालियों के गंदे पानी का जमावड़ा देख अपने नाक पर रुमाल रखने को मजबूर हो जाएंगे साथ ही कैम्पस में जंगल-झाड़ भी उग आए है और वर्षो पूर्व बना भवन धीरे-धीरे जर्जर हो चुका है।हालांकि इन समस्याओं को लेकर विभागाध्यक्ष से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन सम्पर्क नहीं हो सका।