स्‍तन कैंसर के प्रति महिलाओं में जागरूकता है जरूरी : वी पी सिंह

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कैंसर को महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक बताया

पटना। सवेरा कैंसर एंड मल्‍टीस्‍पेशियल हॉस्‍पीटल, कंकड़बाग, पटना के प्रख्‍यात कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ वीपी सिंह ने स्‍तन कैंसर को महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक बताया और कहा कि इससे बचाव के लिए लोगों में जागरूकता लाने की जरूरत है, ताकि समय रहते इसका निदान हो सके।

आशांजलि संस्‍था द्वारा आयोजित परिचर्चा में उन्‍होंने कहा कि हमारे देश में आज भी महिलाएं इसके प्रति जागरूक नहीं है। अभी हाल में किये एक अध्‍ययन की मानें तो हर 28 में से एक महिला को अपने जीवनकाल में स्‍तन कैंसर होता ही हैं। शहरी क्षेत्रों में इसकी संख्‍या अधिक होती है यानी 22 में से एक, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 60 में से एक।

उन्‍होंने कहा कि स्‍तन कैंसर के आंकड़े के मामले में भारत पश्चिमी देशों से अलग है। भारत में स्‍तन कैंसर की समस्‍या 30 से 40 के उम्र में ज्‍यादा होती है, जबकि पश्चिम में यह 50 साल से अधिक आयु वाली महिलाओं में होता है। भारत में इसके प्रति जागरूकता और जांच का अभाव काफी देखने को मिलता है, जो लास्‍ट स्‍टेज में महिला और उनके परिजनों को पूरी तरह तोड़ देता है। उन्‍होंने बताया कि पिछले कुछ सालों में भारत में स्‍तन कैंसर की चपेट में 50 वर्ष से कम उम्र की महिलाएं ज्‍यादा आई हैं। इसके प्रति जागरूकता का अभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह डिटेक्‍ट तीसरे या चौथे स्‍टेज होता है। तब यह बेहद आक्रामक हो चुका होता है। हम स्‍तन कैंसर को रोक नहीं सकते, लेकिन थोड़ी सी जागरूकता अपनाकर इसे होने वाले असमय मौत को रोक सकते हैं। अगर इसके आरंभिक लक्षण का पता लगाया जाय तो इलाज काफी आसान हो जाता है और लगभग 80 प्रतिशत तक ठीक हो जाते हैं। इसलिए युवतियों और महिलाओं को चाहिए कि सप्‍ताह में एक बार स्‍तन की जांच जरूर करें। देखें कहीं गांठ तो नहीं। पहले स्‍टेज में स्‍तन के अंदर दो सेंटीमीटर तक की गांठ बनती है और इससे सूजन, हल्‍का दर्द, शुरू हो सकता है।

उन्‍होंने बताया कि इस मामले में परिवार के पुरूष वर्ग को भी सचेत रहना चाहिए कि वे अपनी फैमली को इस मामले में जितना संभव हो सके जागरूक करते रहें। इसके अतिरिक्‍त इस बीमारी के और भी लक्षण हो सकते हैं, जैसे स्‍तन के आकार में बदलाव, निप्‍पल का अंदर की ओर धंसना, त्‍वचा का सिकुड़न, निप्‍पल से रक्‍त श्राव, त्‍वचा के रंगत में बदलाव, आदि। कई बार देखा गया है कि ऐसे मामले में मरीज झाड – फूंक के चक्‍कर में पड जाते हैं और समय से उपचार नहीं कराते हैं, जिसका परिणाम गंभीर होता है। इसलिए इससे बचें और अगर शुरूआती स्‍टेज में पता चल जाये तो इसका उपचार ऑपरेशन से संभव है। इसके अलावा कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के जरिये भी आज कल उपचार संभव हो गया।

उन्‍होंने बताया कि स्‍तन कैंसर के प्रति सजगता कार्यक्रम जैसे शिक्षा परीक्षण, मैमोग्राफी और स्‍तन का अल्‍ट्रासाउंड जैसे उपकरण भी शामिल किये जाते हैं। इन सबके साथ जीवनशैली में सुधार भी एक महत्‍वपूर्ण बात है, जिससे हम न केवल कैंसर बल्कि तमाम घातक रोगों से बच सकते हैं ।