इस मंदिर में जंगल के बाघ आते है माँ के चरणों को छूने

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हिन्दू धर्म में कई ऐसे मंदिर हैं जिनमें कई सारे रहस्यों पर से पर्दा आज भी नहीं उठ पाया है।आज हम आपसे एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बात कर रहे हैं …

बिहार डेस्क :मंदिरों में देवी देवताओं की पूजा आम बात है, लेकिन बिहार में एक ऐसी जगह है जहां एक मंदिर में जंगल के बाघ भी देवी के दर्शन करने पहुंचते हैं. इस मंदिर के बारे में काफी पौराणिक कथाएं हैं. कहा जाता है कि इस मंदिर के पुजारी के इशारे पर बाघ नाचते थे. नेपाल सीमा पर बगहा वाल्मीकिनगर मुख्य सड़क एनएच 28बी से सटे वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वनों के बीच मदनपुर देवी का स्थान स्थित है. मदन सिंह राजा के नाम पर इस स्थान का नाम मदनपुर देवी का स्थान पड़ा है. मां मदनपुर देवी वह शक्तिपीठ है जहां जंगल के बाघ भी मां के दरबार में पहुंचकर दर्शन देते है. आस्था और विश्वास का केंद्र बन चुके मां मदनपुर के दरबार में नेपाल से लेकर यूपी से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर मन की मुरादें पूरी करते है.मां मदनपुर देवीपीठ के पुजारी ललन दास कहते हैं कि मां के दर्शन के लिए रात में बाघ आज भी पहुंचते है. लिहाजा देर रात यहां लोगों के प्रवेश पर रोक रहती है और वन विभाग कर्मचारियों के साथ पुलिस तैनात रहती है. पौराणिक कथाओं में कहा जाता है कि मदनपुर स्थान पर रासो गुरु पुजारी बाघों से धान की दौनी कराते थे. आगे इस मंदिर की पौराणिक कथाएं जानकर रोमांचित हो जाएंगे…
इस चमत्कारी मंदिर के बारे में जानकर मदन राजा खुद वहां पहुंचे और पुजारी से मां देवी के दर्शन की जिद करने लगे. कहा जाता है कि पुजारी रासो गुरु ने मदन राजा को बार-बार चेतावनी दी गई कि माँ के दर्शन की जिद छोड़ दें क्योंकि इससे अनहोनी की आशंका है. राजा ने बात नहीं मानी तो देवी का एक हाथ पुजारी रासो गुरु का सिर फाड़ते हुए बाहर निकल आया. पूरे इलाके में अंधेरा छा गया, जोर से गर्जना के साथ धरती फट गई और राजा मदन सिंह का पूरा राजमहल धरती में समा गया. कहा जाता है कि जब मदन राजा का विनाश हुआ तो उस समय रानी सती आपने मायके गई हुई थीं और वो गर्भ से थी. पूरे हादसे में वही एक मात्र बची थीं जिनकी सन्तानों से आज बड़गांव दरबार का वंशज कायम है.

अमिताभ ओझा (NEWS 24/बिहार हेड)के FB से