6 जून :बिहार में 37 वर्ष पहले हुई थी देश की सबसे बड़ी रेल दुर्घटना !

Kunal Kishor
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दुनिया का दूसरा,भारत का पहला सबसे बड़ा रेल हादसा को हो गये 37 वर्ष

सहरसा :आज से 37 वर्ष पूर्व सहरसा-मानसी रेलखंड के धमारा- बदला घाट स्टेशन के बीच रेलपुल संख्या 51 पर दुनिया का दुसरा और देश का सबसे बड़ा रेल हादसा हुआ था।
6 जून 1981 की वह तारीख भारत के इतिहास के लिए काला दिन था जब ठीक 37 साल पहले हुए रेल हादसे को याद करने के बाद रूह कांप जाती है। यह हादसा देश का सबसे बड़ा और विश्व का दूसरा सबसे बड़ा रेल हादसा था,जिसमें करीब सैकड़ो लोग काल के गाल में समा गये। मानसी से सहरसा की ओर जा रहे यात्रियों से खचाखच भरी नौ डिब्बों की छोटी लाइन की ट्रेन में सभी यात्री अपने-अपने कामों में व्यस्त थे।इसी वक्त अचानक से ट्रेन हिलती है।यात्री जब तक कुछ समझ पाते तब तक पटरी ट्रैक छोड़ते हुए उफनती हुई बागमती नदी में जल विलीन हो जाती है ।
ठीक 37 वर्ष हुए भारत के सबसे बड़े रेल दुर्घटना के कारणों पर यदि गौर करें तो इस रेल दुर्घटना के समय के लोग कहते है कि छह जून 1981 शनिवार की देर शाम जब मानसी से सहरसा के लिए सवारी गाड़ी चली तो पुल नंबर 51 पर पहुंचने से पहले जोरदार आंधी और बारिश शुरू हो गई थी। बारिश की बूंदे खिड़की के अंदर आने लगी तो अंदर बैठे यात्रियों ने ट्रेन की खिड़की को बंद कर दिया। जिसके बाद हवा का एक ओर से दूसरी ओर जाने के सारे रास्ते बंद हो गये और तूफान के भारी दबाव के कारण ट्रेन की बोगी पलट कर नदी में जा गिरी.मानसी से सहरसा जा रही 416 डाउन ट्रेन की लगभग सात बोगियां नदी के गहराई में समा गई। जिस वक्त यह हादसा हुआ उस वक्त ट्रेन यात्रियों से खचाखच भरी थी। ट्रेन की स्थिति ऐसी थी कि ट्रेन के छत से लेकर ट्रेन के अंदर सीट से पायदान तक लोग भरे हुए थे। कहते है कि उस दिन लगन(शादी का दिन) भी जबरदस्त था और जिस वजह से अन्य दिनों के मुकाबले यात्रियों की भीड़ ज्यादा थी। मानसी तक ट्रेन सही सलामत यात्रियों से खचाखच भरी बढ़ रही थी।शाम तीन बजे के लगभग ट्रेन बदला घाट पहुँचती है। थोड़ी देर रुकने के पश्चात ट्रेन धीरे – धीरे धमारा घाट की ओर प्रस्थान करती है। ट्रेन कुछ ही दूरी तय करती हैं कि मौसम खराब होने लगता है और उसके बाद तेज आंधी शुरू हो जाती है।फिर बारिश की बूंदे गिरने लगती है और थोड़ी ही देर में बारिश की रफ्तार बढ़ जाती है। यात्री फटाफट अपने बॉगी की खिड़की को बंद कर लेते है। तब तक ट्रेन पुल संख्या 51 पर पहुँच जाती है।पुल पर चढ़ते ही ट्रेन एक बार जोर से हिलती है।ट्रेन के हिलते ही ट्रेन में बैठे यात्री डर से काँप उठते है।कुछ अनहोनी होने के डर से ट्रेन के घुप्प अँधेरे में ईश्वर को याद करने लगते है।तभी एक जोरदार झटके के साथ ट्रेन ट्रैक से उतर जाती है और हवा में लहराते हुए धड़ाम से बागमती नदी से समा जाती है।