गुजरात जैसे राज्य में मिथिला का मान – सम्मान बढ़ा रहे हैं मिथिला के लाल !

दिनेश सिंह
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मिथिला की मिट्टी,मिथिला का संस्कार जो गुजरात जैसे मीठे राज्य में मिथिला का मान – सम्मान बढ़ा रहा मिथिला का लाल 

मधुबनी :क्या ऐसे इंसान आज भी हैं ! जिनको उनके अधीन काम करने वाले बड़े – छोटे अधिकारी से लेकर चपरासी तक ईश्वर मानने लगे हो। मैं बात कर रहा हूँ , सिमरी, राजनगर , मधुबनी राज़ घराने के डाक्टर कृष्ण नारायण सिंह के पौत्र एवं रिटायर प्रोफेसर जगदीश नारायण सिंह के सुपुत्र डाक्टर जगदीप नारायण सिंह का। जो वर्तमान में गुजरात के मुख्य सचिव हैं।

मैं गुजरात गया था , स्मार्ट विलेज का ट्रेनिंग के लिये। वहाँ जो मैं देखा उसे बयाँ करना मेरे लिये आसान नहीँ हैं , परंतु उनके साथ बिताये हुए क्षण से इतना रोमांचित हूँ कि आपको बताए बिना रह भी नहीँ पाऊँगा। स्मार्ट विलेज का ट्रेनिंग सेशन जैसे ही समाप्त हुआ , मेरे मोबाइल पे उनका मैसेज आया। लिखा था , – दिनेश कैसा रहा ट्रेनिंग , वहाँ से फ्री होकर मुझसे मिलना। मैं गाड़ी भिजवा दूँगा।, उनका ये मैसेज देखकर मैं तो आचम्भित रह गया कि इतने बड़े आदमी मुझसे मिलना चाहते हैं और मेरे लिये गाड़ी भी भिजवा रहे हैं।

मैने गाड़ी के लिये मना कर दिया, क्योंकि मेरे ऑफिस का गाड़ी मेरे पास था। मैं टाईम से उनके ऑफिस में पहुँचा। हमारे साथ हमारे ही ग्रामीण वीरेंद्र महतो भी साथ में था। ऑफिस में उनके साथ लगभग दो घंटे बिताया। इन दो घंटों में उनका बीजी कार्यक्रम देखकर मैं दंग रह गया। मैं पहले यही सोचता था कि डाक्टर जगदीप नारायण सिंह के पास पैसों की तो कोई कमी नहीँ हैं और अभी वो गुजरात के मालिक हैं , कितना सुखमय जीवन होगा उनका। मगर उनके व्यस्तता को देखकर मैं हैरान होता रहा। ये सवाल मैं उनसे पुछ भी बैठा की, आपके पास पैसे की तो कमी नहीँ हैं, वर्तमान में आप गुजरात के मालिक हैं। फ़िर भी इतनी मेहनत , किसलिए। इन सवालों का उनके पास एक ही जवाब था कि , पैसा ही सबकुछ नहीँ है , एक जिम्मेवारी है मेरे ऊपर जो पूरे गुजरात के जनता से जुड़ा हुआ है। इसको निभाना मेरी पहली प्राथमिकता है। उसके बाद उन्होने अपना रोज़ का प्रोग्राम लिस्ट मेरे सामने रख दिया । लिस्ट देखकर मैं और भी हैरान हो गया । इनके पास तो सोने के लिये भी पूरा वक्त नहीँ है।

फ़िर मैं उनके अधीन काम करने वाले कर्मचारी से बात की , उनसे मैं पूछा कि, आपलोग तो कई अधिकारी के साथ काम कर चुके हैं। तो ये बताईये कि दूसरे अधिकारी और इनमें क्या अंतर है! सभी का जवाब एक सा था, कि ऐसे अधिकारी आजकल पूरे दुनियाँ में कहीँ नहीँ मिलेगा। हमलोगों के लिये सर ईश्वर के समान है। आधिकारिक घमंड तो रति भर नहीँ है। सब को एक समान मानते हैं। मिथिला के मिट्टी का असर है , उनके संस्कार में। कलयुग के मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम है सर।

मैं मन ही मन सोचता रहा की काश ऐसे अफसर , ऐसे अधिकारी बिहार में भी होता।

फ़िर वो अपने कार्य से फ्री होकर एक नादान बच्चे की तरह मुझे अपना सचिवालय का हर वो हिस्सा दिखाने लगे जहाँ वो काम करते हैं। मेरे साथ दौर – दौर कर मीटिंग हॉल से लेकर सभी ऑफिस दिखाते रहे। उनका ये व्यवहार मुझे आचम्भित कर रहा था। मेरे साथ आयॆ मेरे ग्रामीण वीरेंद्र जी को मैं बोला की क्या हमलोग कोई सपना तो नहीँ देख रहे हैं। उन्होने हमें विश्वास दिलाया की नहीँ ये कोई सपना नहीँ बल्कि हकीकत हैं। धन्य है मिथिला के मिट्टी , मिथिला के संस्कार , जो गुजरात जैसे मीठे राज्य में मिथिला का मान – सम्मान बढ़ा रहे हैं। राम राज्य है गुजरात में।