कुंवारो के गांव के नाम से प्रसिद्ध इस गांव में अब बंजेगी शहनाई !

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बिहार में कुंवारो के गांव के नाम से प्रसिद्ध इस गांव में अब बंजेगी शहनाई

कैमूर @ बंटी जायसवाल :बिहार के कैमूर जिले के अधौरा प्रखंड का एक ऐसा गांव जहां के लोग यह नहीं जानते थे कि शिक्षा, मूलभूत सुविधाएं क्या होती है. हम बात कर रहे है अधौरा प्रखंड के बड़वानकला गांव की. जहां के लोगों ने डीएम व एसपी तक देखना दूर नाम भी नहीं जानते थे. इसके साथ ही उस गांव में आजादी के बाद कभी भी डीएम व एसपी नहीं पहुचे थे. लेकिन एक माह पूर्व कैमूर डीएम राजेश्वर प्रसाद सिंह व एसपी हरप्रीत कौर प्रशासन आपके द्वार कार्यक्रम के तहत पहुँचे. उनके साथ जिले के कई वरीय अधिकारी भी गये हुए थे.

वन विभाग ने मूर्तियां से बड़वानकलां तक बनवायी मोरम वाली सड़क

लोगों की समस्या सुनती एसपी (फ़ाइल फ़ोटो)

 

कार्यक्रम के दौरान वहां के लोगों का ऑन स्पॉट समस्याओ का समाधान किया गया था. वन विभाग द्वारा मूर्तिया से बड़वानकला तक मोरम वाली सड़क का निर्माण कराया है. रेंजर शशिभूषण प्रसाद ने बताया कि 20 लाख की लागत से 19 किमी लंबी सड़क बनायी गयी है. इस समय के निर्माण हो जाने से बड़वानकलां के साथ दहार सलया, बड़वान खुर्द  सहित अन्य गांवों के लोगों को काफी राहत मिलने लगी है.
19 किमी चलते थे पैदल 

लोगो का कहना है कि सड़क निर्माण नहीं होने से पहले लोगों को मूर्तिया से बड़वान कला तक पहाड़ी पथ उबड़ खाबड़ पत्थरों से होकर 19 किलोमीटर तक पैदल चलकर पहुंचना पड़ता था. लेकिन वन विभाग द्वारा सड़क का निर्माण करा दिये जाने से लोगों को आने जाने में काफी सुविधा मिली है. हालाकि कैमूर जिले के अधौरा प्रखंड का बड़वान कला गांव आज भी विकास से दूर है. 13 पंचायतो वाले इस गाव के लोग आज भी देश की आजादी के बाद आधुनिक सुविधाएं पहुँचने की आस लगी हुई है. जानकारों के मुताबिक जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर और 900 फीट ऊंचाई वाले पहाड़ पर स्थित अधौरा प्रखंड का यह बड़वान कला गांव है. जो चारों तरफ पहाड़ ही पहाड़ है.
कुंवारे के गांव के नाम से है प्रसिद्ध 
लोगो के मुताबिक पहले कहीं से गांव में जाने का कोई रास्ता नहीं था. जिस कारण गांव के आधे से अधिक लोग आज भी कंवारे है. यहां पर विकास के नाम पर सरकार की कोई योजना नहीं पहुंच पाई और ना ही बुनियादी सुबिधाये बहाल हो पायी थी. बिजली, सड़क, अस्पताल और विद्यालय की चाहत इस गांव के लिए सिर्फ सपनो जैसा ही थी. गांव के लोगों तक आज तक किसी भी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुँच पाया थी. लोगो ने बताया कि गांव में आने जाने का कोई रास्ता नहीं था. 5 हजार की आबादी वाले इस गांव में किसी लड़के का शादी करना बहुत बात है. गांव की लड़कियों की शादी भी झूठ बोल कर करनी पड़ती है. क्योकि इस गांव में कोई भी बारात लेकर आना नहीं चाहता है.
शादी के आस में भगवान को हो चुके है प्यारे
जानकार सूत्रों के मुताबिक इस गाँव में लोग आज भी कुंवारे है. इसमें 40 वर्ष से 70 तक के लोग शामिल है. 20 वर्ष से 40 वर्ष वाले लोगों की बात ही अलग है. कई लोग तो शादी की आस लिए भगवान को प्यारे हो गए. लेकिन दुल्हन लाने का सपना मरते दम तक पूरा न सका. मुख्य रूप से गांव के विकास में सड़क का नहीं होना सबसे बड़ी बाधा थी. इसी वजह से पहाड़ी क्षेत्र के नीचे के लोग इस गांव में शादी व्याह करना नहीं चाहता थे.
दुल्हन लाने का सपना हो सकेगा पूरा 
लोगों के मुताबिक वन विभाग द्वारा मूर्तिया से बड़वानकला तक मोरम वाली सड़क का निर्माण करा दिये जाने से इस के लोगों का शादी हो सकता है. क्योंकि सड़क बन जाने से आराम से गांव तक वाहन से लोग से पहुँच सकते है. कुँवारे के दुल्हन लाने का सपना पूरा हो सकता है. इसके साथ यहां पर डीएम व एसपी के आने के बाद सरकारी सुविधाओं के मिलने की भी आस है. मुख्यमंत्री के सात निश्चय योजना के तहत हर गांव हर घर तक लाभ पंहुच सकता है.  हालांकि अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन द्वारा कौन कौन सी सुविधायें यहां के लोगों तक पहुँचा पाती है.
बोले अधिकारी
अधौरा में मूर्तियां से बड़वानकला तक सड़क निर्माण करायी गयी है. 19 किमी लंबी मोरम वाली सड़क में 20 लाख की लागत आयी है. सड़क निर्माण होने से बड़वानकला के साथ चार पांच गांवो के अलावा अन्य गांवों के लोगों को आने जाने में काफी राहत मिलने लगी है.
शशिभूषण प्रसाद, रेंजर , भभुआ

सड़क निर्माण में 20 लाख की आयी लागत