भरतखंड हॅाल्ट को हैं मसीहा की तलाश, यात्रियों हैं परेशान !

Kunal Kishor
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खगडिया@मुकेश कुमार मिश्र :खगडिया जिले के प्रखंड अंतर्गत रेल विभाग का भरतखंड हॅाल्ट मसीहा की तलाश में मुंह बाये खड़ी है । आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना रेल विभाग के लिए प्रश्न चिन्ह हैं । कटिहार – बरौनी मध्य पूर्व रेल पसराहा और नारायणपुर स्टेशन के बीच स्थित भरतखंड हॉल्ट पर स्थापना के वर्षों बाद भी सुविधाओं का घोर अभाव है। अभी तक किसी ने इस हॉल्ट की सुधि नहीं ली है। हॉल्ट का पहुंच पथ अस्तित्व खोने के कगार में है। बरसात में हॉल्ट तक पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। क्योंकि, इस सड़क पर कीचड़ जम जाता है।

इधर, बिजली, शौचालय, पेयजल, यात्री शेड आदि का यहां अभाव है। स्थानीय लोगों व यात्रियों का कहना है कि आजतक भरतखंड हॉल्ट का विकास नहीं हो पाया है। विभागीय उदासीनता के कारण हॉल्ट की ओर किसी की नजर नहीं है। अभावों के बीच यात्री इस हॉल्ट पर जाना-आना भी खुद के लिए सुरक्षित नहीं समझते हैं।

1999 ई० में भरतखंड हॅाल्ट का हुआ था स्थापना :मिली जानकारी के अनुसार 15 जनवरी 1999 को तत्कालीन रेलमंत्री रामविलास पासवान के कार्यकाल में इस हॉल्ट की स्थापना हुई थी। जिसका विधिवत् उद्घाटन तत्कालीन बिहपुर विधानसभा के विधायक ब्रह्मदेव मंडल, एवं डीआर एम यू एन मांझी के द्वारा 15 जनवरी 1999 को किया गया था। विडंबना ही कहा जाएगा कि आज यह हॉल्ट जनप्रतिनिधियों की उदासीनता एवं विभागीय उपेक्षा के कारण सुविधाहीन हो गई है। हॉल्ट तक जाने के लिए राष्ट्रीय उच्च पथ 31 और भरतखंड के 14 नंबर सड़क से समुचित पहुंच पथ का अभाव है। जबकि, यहां से रेल विभाग को बेहतर राजस्व भी मिलता है। अब सुविधा नहीं रहने के कारण लोग दूसरी जगह जाकर सफर करने को विवश हैं।

दर्जनों गांव के लोग इस हॅाल्ट से हैं जुड़े हुए :
इस हॉल्ट से गोगरी के सर्किल नंबर एक स्थित पैंकात, देवठा, बरमसिया, खरोआ, परबत्ता प्रखंड के खजरैठा,भरतखंड, पुनौर, कैरिया , तेलियाबथान, थेभाह, मथुरापुर, यदुवंशनगर, कोलवारा आदि गांवों के लोग जुड़े हुए हैं। बावजूद यहां यात्री के लिए सुविधाओं का नहीं होना लोगों को काफी खल रहा है।

क्या कहते हैं स्टेशन मास्टर :

भरतखंड हॅाल्ट का स्टेशन मास्टर हिमांशु कुमार ने बताया कि इस हॅाल्ट पर तीन अप एवं तीन डाउन सवारी गाड़ी का ठहराव हैं। जबकि प्रतिदिन राजस्व पांच सौ से हजार के बीच में होती हैं। पहले अधिक होती थी लेकिन अब धीरे धीरे कम हो रहा है। टीकट घर में बिजली की समुचित व्यवस्था है लेकिन पंखा नहीं हैं। चापाकल एक हैं जो कभी कभी अपना दम खो बैठता हैं। शौचालय विहीन हॅाल्ट पर यात्रियों की सुविधा के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। यहाँ तक ही नहीं भरतखंड हॅाल्ट के लिए पहुँच पथ भी इस कदर जर्जर हो चुका है कि पैदल चलना भी दुश्वार हैं।

क्या कहते हैं ग्रामीण :भरतखंड हॅाल्ट से जुड़े हुए आप पास के ग्रामीण संजय सिंह, रिंकु यादव, राणा सिंह, प्रभुदयाल सहनी, महेन्द्र झा, जुलूम यादव, ज्योतिष रजक आदि का कहना है कि भरतखंड हॅाल्ट पर यात्रि जाने से कतराने लगे हैं। क्योंकि यात्री असुरक्षित महसूस करते हैं जिससे कारण आस पास के स्टेशन पर जाना पसंद करने लगा है।