पीड़ित परिवार के सहायता के लिए नहीं पहुँचे कोई अधिकारी व जनप्रतिनिधि !

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गैस रिसाव से आग वाली घटना में 12 जख्मी व एक बच्चे की हो चुकी है मौत

लोगो में प्रशासन के प्रति आक्रोश व्याप्त है

कैमूर/रामपुर[email protected]बंटी जायसवाल : गुरूवार को करमचट थाना क्षेत्र के बरांव गाँव में गैस सिलेंडर के रिसाव होने से आग लग गयी थी. इसी घर व रिश्तेदार के 12 लोग जख्मी हो गये थे व एक तीन वर्षीय बच्चे की इलाज के लिए वाराणसी ले जाते समय चंदौली में जाम में एम्बुलेंस फंस जाने के कारण मौत हो गयी थी. मृत बच्चा 3 वर्षीय अमित कुमार सुरेंद्र प्रजापति का पुत्र बताया गया.

जानकारी के मुताबिक मृत बच्चा अमित का गुरूवार को ही परिजनों द्वारा चंदौली से वापस गाँव पर आकर अंतिम संस्कार किया गया. बताया गया कि जिस घर में घटना हुई उसी घर में गुरूवार के शाम सुरेंद्र प्रजापति(शिक्षक)के भाई गुड्डू प्रजापति का तिलक था. इसके लिए सभी प्रकार की घर में जोर शोर से तैयारी चल रहा था. तभी गुरूवार के सुबह खाना बनाने के दौरान गैस सिलेंडर के रिसाव होने से जिस गैस पर खाना बन रहा था उससे आग पकड़ लिया. इसके बाद आग की चपेट में आने से 12 लोग जख्मी हो गए थे. यह भी बताया गया कि अभी भी गंभीर स्थिति वाले तीन लोगो का इलाज वाराणसी के निजी अस्पताल में चल रहा है. और कुछ लोगो का इलाज चेनारी के निजी क्लिनिक में चल रहा है.

सहायता हेतु नहीं पहुचे कोई अधिकारी

परिजन कंकू प्रजापति ने बताया कि हमारे यहाँ गैस सिलेंडर से आग लगने से कई लोग जख्मी जख्मी हो गए और एक नाती की मौत हो गयी है.लेकिन अभी तक यानि 36 घण्टे बाद भी प्रखंड व जिला से एक भी अधिकारी सहायता देने के लिए नहीं पहुचे. जबकि इसका सुचना प्रखंड व जिला प्रशासन को दे दिया गया है. जानकारी के बाद जिला से आपदा विभाग के कोई अधिकारी द्वारा सहायता नहीं पहुचाया गया और न ही कोई अधिकारी घटना स्थल पर भी जानकारी के लिए पहुँचा की कितने लोग जख्मी है और कितने की मौत हुई है. प्रखंड व जिला प्रशासन के प्रति गुस्सा व आक्रोश व्याप्त है. ग्रामीणों ने बताया कि इतना बड़ा घटना हमारे गाँव में हुआ लेकिन अभी तक कोई अधिकारी व विधायक या सांसद ही घटना की जानकारी लेने के लिए आये है. किसी भी अधिकारी व जनप्रतिनिधि द्वारा पीड़ित परिवार के मदद के लिए कोई आगे नहीं है. लग रहा है प्रशासन व जनप्रतिनिधि सोयी हुई है. यह भी बताया गया कि गुरुवार को सिर्फ करमचट थाना पहुचा था वह आयी और देख कर चली गयी. कोई प्रशासन के तरह सहायता नहीं दिया गया.

क्या कहते है आपदा प्रबंधन पदाधिकारी

इस संबंध में पूछे जाने पर आपदा प्रबंधन पदाधिकारी के के उपाध्याय ने बताया कि जख्मी मरीजो के इलाज के लिए तीन दिन के हॉस्पिटल का 4500 रूपये प्रति व्यक्ति व उसके आगे दिन रहने पर उसके हिसाब से देने का प्रावधान है. पीड़ित परिवार को प्रशासन के तरफ से जितना संभव होगा उतना सहायता राशि दिया जायेगा. पीड़ित परिजनों द्वारा अभी तक कोई जानकारी भी नहीं दिया गया है. अख़बार के माध्यम से जानकारी हुआ है. रामपुर सीओ को आज पीड़ित परिवार के घर जाने के लिए कहा गया था. देखता हूं कि सीओ अब तक क्यों नहीं गये. जानकारी करता हूं. आपदा विभाग से जो सहायता संभव हो गया वह दिया जायेगा.

घर का इकलौते पुत्र होने के कारण बुझ गया चिराग

लोगो ने बताया कि सुरेंद्र प्रजापति का अमित कुमार(3वर्ष) इकलौता पुत्र था. दो बच्ची है खुशबु कुमारी( 8 वर्ष) व नेहा कुमारी(6वर्ष) है. घर में अमित इकलौता पुत्र के रूप होने के कारण सुरेंद्र का चिराग बुझ गया. इससे पूरे गाँव में अभी भी मातम पसरा हुआ है. घर में दुखो का पहाड़ टूट पड़ा है. लोगो को आग से बचाने में सुरेंद्र भी बुरी तरह जख्मी हो गए. जिनका गंभीर स्थिति में वाराणसी में चल रहा है. अपने पुत्र की मौत से माँ सविता देवी का रो रो कर बुरा हाल हो गया. माँ रोते रोते बेहोश हो जा रही है. इसके साथ परिजनों का भी रो रो स्थिति खराब हो गयी है. पुरे गाँव के लोग सदमें में है. गुरुवार को गांव चूल्हे तक नहीं जल पाया.

अमित की मौत की खबर सुनते ही पिता हो गए बेहोश

बताया गया कि सुरेंद्र प्रजापति जो आग के चपेट में आने से बुरी तरह झुलस गए थे. उनका वाराणसी में निजी क्लिनिक में इलाज चल रहा है. गुरुवार को अमित की मौत की खबर सुरेंद्र को नहीं बताया गया था. जब शुक्रवार को होश में आने के बाद सुरेंद्र को उनके इकलौते पुत्र अमित की मौत की खबर जानकारी हुई तो वे रोने लगे. मृत पुत्र अमित के पिता सुरेंद्र रोते रोते बेहोश हो गए. इसके बाद डॉक्टरो द्वारा कुछ समय बाद होश में लाया गया. इसके बाद जब वे होश में आये तो अपने पुत्र के बारे में पूछने लगे. लोगो द्वारा पिता को समझाते हुए सांत्वना दिया गया. तब जाकर कुछ शांत हुए.

सावधानी बरती गयी होती तो नहीं होती घटना

रांव में गैस सिलेंडर के रिसाव से आग लगने वाली घटना में गुरूवार को 13 लोग जख्मी व एक बच्चा की मौत हो गयी. इसमें 3 लोगो की स्थिति गंभीर है जिनका वाराणसी में इलाज चल रहा है. 8 अन्य लोगो का चेनारी के निजी क्लिनिक में इलाज चल रहा है. बताया जाता है कि अगर घर में गैस सिलेंडर लगा तो उस बाहर आंगन में नहीं फेंका जाता तो शायद इतने लोग घायल नहीं होते और एक बच्चे भी जान नहीं जाती. यह भी बताया गया प्रशासन द्वारा कोई प्रचार प्रसार भी नहीं होना बताया जाता है.