माँ का पट खुलते ही भक्तों का उमड़ा सैलाब !

1962
त्रिवेणीगंज की हृदयस्थली बड़ी दुर्गा मंदिर में विराजमान माँ वैष्णवी

सुपौल (मोहित सिंह) : दस दिवसीय शारदीय नवरात्र में माँ का पट खुलते ही भक्तजनों का सैलाब मंदिरो में उमड़ पड़ा है ।आमतौर पर शारदीय नवरात्र में सभी दुर्गा मंदिर में 8 से 10 भुजावाली माँ दुर्गा की प्रतिमा बनाकर पूजा अर्चना करते है । वैदिक मंत्रों उच्चारण के बीच मंदिर का हर एक कोना  गुंजायमान हो उठा वही धुप-दीप के सुगंध से सुरभित हो गया । साक्षात् देवी के दर्शन पाकर श्रद्धालु जन भावविभोर हो चले है ।

सर्व विदित तथ्य तो यह है कि कलश स्थापन के साथ ही जिले की सभी मंदिरों एवं पूजा स्थलों में जगत-जननी माँ दुर्गे की विशेष आराधना में लीन हो चले है । “सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।। मंत्रोच्चार के बीच कलश स्थापन के साथ ही दुर्गा सप्तशती के श्लोक से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है ।

त्रिवेणीगंज बाजार की हृदयस्थली पर बसा माता बैष्णवी की बड़ी दुर्गा मंदिर में विद्वान् पंडितों द्वारा पूजा-अर्चना होता रहा है । विशेषकर इस समय अधिक से अधिक पंडितों को बुलाकर पूजा-पाठ कराया जाता है । इस दशहरा के मौके पर मेले का भी आयोजन किया जाता है । जिसमे सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ ही साथ मैया का जागरण बड़े धूमधाम से मनाया जाता है । भगवती माँ हर प्रकार के दर्द, दुःख को दूर करने के लिये प्रचलित है ।

लोगो का मानना है कि जो भी भक्त सच्चे मन से इसकी पूजा करते है हर एक मनोकामना पूर्ण होती है ।इससे पूर्व माँ की विधि-विधान से श्रृंगार के बाद मंगला आरती कर मंदिर का पट खुलते ही माँ की एक झलक पाने के लिये हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्तजन कतारवद्ध दिखे । माँ का यह दिव्य स्वरुप मोक्ष का फल प्रदान करती है और शत्रु का विनाश कर भय से मुक्ति दिलाती है ।