शहर को इंतजार है एक भयानक महामारी का !

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सहरसा (बंन्दन वर्मा) : अच्छे मानसून के पूर्वानुमान के बीच लगभग एक महीने पहले ही बारिश ने सहरसा शहर के लिए खतरे की घंटी बजा दी थी । मगर दसकों से जल जमाव जैसी समस्या से पीड़ित शहर की आधी आबादी के लिये ये एक जानी और परखी हुई समस्या थी ।

लोग हर वर्ष इससे जूझते और बदले में ओहदे वाले चाँदी काटते । मगर इस वर्ष मानसून ने अपना ऐसा रूप दिखलाया कि जहाँ ओहदे वालों के लिए ये अच्छे दिन लेकर आया वहीँ आम लोगों को जल प्रलय की एक छोटी झलक दिखा दिया । जल जमाव से प्रभावित लोगों में इस वर्ष तीस से चालीस फीसदी ऐसी आबादी है जिसको जल जमाव ने पहली बार अपनी गिरफ्त में लिया है । यह स्तिथि पिछले एक महीने से लगातार बनती जा रही थी । मगर जिनके ऊपर इससे निपटने की जिम्मेवारी थी वो तो वर्षो से कुम्भकर्णी नींद में सोया हुआ ही था । कोई रावण हो तब तो उसे जगाये । हाँ , कुछ माननीय इस बीच अपनी अपनी संभावनाओं को तलाशते जरूर नजर आये ।

पदाधिकारीगण जल निकासी के लिये स्थल निरीक्षण और वस्तु स्तिथि का मुआयना जैसे रूटीन वर्क करते रहे तो नेतागण ज्ञापन से लेकर अण्डे टमाटर की बरसात करते दिखे । मगर किसी ने हर वर्ष जल जमाव से पीड़ित बदनसीब शहर वासियों के लिए समाधान नहीं निकाला । इन सबके बीच माननीयों के बीच एक तबका ऐसा भी है जो आने वाले दिनों में नफा नुकसान के गुणा भाग लगाने में लगा है । समस्या जितनी बड़ी ; फायदा उतना ही बड़ा ; गुणा भाग के झंझट भी ज्यादे ।

हालाँकि दो दिन पूर्व सहरसा के जिलाधिकारी विनोद गुंजियाल ने समस्या को गंभीरता से लेते हुए पच्चीस पम्प सेटों , फायर ब्रिगेड की गाड़ियों और सेफ्टी टैंक के सहारे जल निकासी की मुकम्मल व्यवस्था किये जाने का शहरवासियों को आश्वासन दिया । मगर अड़तालीस घंटे बीत जाने के बाद भी जिला प्रशाशन एक भी इलाके को जल जमाव से मुक्त करने में सफल नहीं हो पा रहा है । ऐसे में यह आश्वासन किसी झुनझुने से कम नहीं है । जहाँ तक डी डी टी, ब्लीचिंग और चुना के छिड़काव की बात है तो शहरवासियों को इस बात के पुख्ता अनुमान और वर्षों के अनुभव है कि ये कभी भी किसी इलाके में दिखाई देने वाला नहीं है । जबकि स्तिथि इतनी भयावह है कि महीनो से अटके ये पानी कोई बाढ़ का बहता पानी नहीं बल्कि कूड़े – कचरे , सूअर जैसे जानवरों के मल – मूत्र और सभ्य समाज के एकत्रित गन्दगी का सम्मिश्रण है ।

यह पानी कई तरह के जहरीले रसायनों का ही वाहक नहीं बल्कि डेंगू जैसे कई एक बीमारियो का जन्मदाता भी है । ऐसी विषम और कठिन परिस्तिथियों में यदि जिम्मेवार लोग पूरी तरह मुस्तैद और सजग नहीं होते हैं तो इस बात की पूरी संभावना है कि आने वाले दिनों में सहरसा शहर किसी भयानक महामारी की चपेट में होगा । मगर अफ़सोस अभी तक ऐसी कोई सजगता और मुस्तैदी नहीं दिख रही है । ऐसे में हम यही कहेंगे – ” सहरसा शहर को इंतजार है एक भयानक महामारी का ” ।

(लेखक  :न्यूज़ नेसन,सहरसा से जुड़े है )