रेफर केन्द्र बनकर रह गया है स्वास्थ्य केन्द्र,चिकित्सकों की है कमी,जाँच एवं एक्सरे की सुविधा का है अभाव !

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मुकेश कुमार मिश्र : अमूमन बिहार के कई जिलों की समस्या हो पर खगड़िया जिले के परवत्ता प्रखंड मुख्यालय स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र परबत्ता एक बार फिर चर्चा में है।हलाँकि इस बार भरसो पंचायत अंतर्गत थेभाय गांव की प्रसूता गायत्री देवी की मौत जैसी गलत वजह से यह चर्चा हो रही है।koshixpress
रेफर केन्द्र बनकर रह गया है परबत्ता अस्पताल
इस प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में संसाधन रहने के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी,रेडियोलॉजी एवं पेथियोलॉजी की सुविधा नहीं रहने के कारण यह प्रसव केन्द्र बनकर रह गया है।कबीर मठ परबत्ता के तत्कालीन महंथ मोती दास ने अस्पताल की स्थापना किया था।इसके लिये उन्होंने कबीर मठ की परबत्ता बाजार में बहुमूल्य तीन बीघा पाँच कट्ठा सात धुर जमीन दान में दिया था।इसके अलावा अस्पताल के संचालन हेतु पक्का मकान भी बनाकर दिया था।उस जमाने में अस्पताल को संचालित करने के लिये एक समिति बनायी गयी थी।कालांतर में बिहार सरकार के द्वारा इसका संचालन होने लगा।koshixpress
पन्द्रह शय्या वाले इस प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में डॉक्टरों का स्वीकृत पद मात्र दो है।अन्य दो पदों पर संविदा पर नियुक्त चिकित्सक उपलब्ध हैं।इन चार चिकित्सकों के भरोसे प्रतिदिन औसतन 30 से 35 प्रसव तथा 3 सौ से 4 सौ के बीच वाह्य रोगियों का ईलाज किया जाता है।वाह्य रोगियों को देखने के लिये रोस्टर के अनुसार दो डॉक्टर सुवह में चार घंटे तथा शाम में दो घंटे का ओ पी डी चलाते हैं।इससे यह समझा जा सकता है कि डॉक्टर प्रति रोगी कितना समय दे पाते होंगे।अस्पताल की स्थापना काल से ही यहाँ महिला चिकित्सक की कमी रही है तथा यहाँ के लोग इसकी माँग करते रहे हैं।
1990 के दशक में एक महिला चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति यहाँ की गयी थी।लेकिन वे तबतक के लिये लंबी छुट्टी पर चली गयी जबतक उनका स्थांतरण अन्यत्र हो गया।बताया जाता है कि 15 शैय्या का अस्पताल होने के बावजूद कई बार प्रसूताओं एवं रोगियों को बेड नहीं मिल पाता है।अन्य रोगियों को या तो दवा लिखकर वापस भेज दिया जाता है या खगड़िया रेफर कर दिया जाता है।
विगत वर्ष आउटसोर्सिंग के तहत डोयन नामक संस्था ने पेथियोलॉजिकल लैब खोला था तथा इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान ने एक्सरे की सुविधा शुरु किया था।परंतु विगत दो वर्ष पूर्व ये दोनों काम छोड़कर जा चुके हैं।प्रखंड में विभिन्न प्राथमिक तथा अतिरिक्त स्वास्थ्य केन्द्रों में ए ग्रेड की नर्सों के 10 स्वीकृत पदों के विरुद्ध केवल छ: नर्सें तथा बी ग्रेड की 25 नर्सों की रिक्ति के विरुद्ध मात्र 23 नर्सें कार्यरत् हैं।आम लोगों का मानना है कि यह अस्पताल प्रसव सुविधा के अलावा रेफर केन्द्र बनकर रह गया है।koshixpress
लेकिन विगत मंगलवार तथा विगत वर्षों में ईलाज में लापरवाही के कारण प्रसूताओं को हुई मौत के बाद अब अस्पताल का सुरक्षित प्रसव के विश्वनीय केन्द्र होने पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है।विगत कुछ वर्षों में अस्पताल में आने वाले रोगियों की संख्या में कई गुणा बढोतरी हुई है। लेकिन इस तुलना में डॉक्टरों तथा सहायक कर्मियों की कमी के कारण प्रतिवर्ष कड़ोरों रुपये खर्च होने के बावजूद जनता को वह लाभ नहीं मिल पा रहा है जिसका दावा किया जाता है। अस्पताल के प्रबंधक रंजीत कुमार ने बताया कि उपलब्ध संसाधन के लिहाज से बेहतर सेवा देने का प्रयास किया जा रहा है।