अस्पताल में अजिबो-गरीब घटना, डायरिया पीड़ित बच्ची का पाँव बांध होता है ईलाज !

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बिहार के सहरसा सदर अस्पताल में अजिबो-गरीब घटना देखने को मिली| यंहा पर मरीजों (मासूम बच्ची) का हाथ-पैर बांध कर किया जाता है शायद आप भी ये तस्वीर देखकर सोच रहे होंगे …पर हम बताते है आखिर सच क्या है |koshixpress

क्या है माज़रा 

सहरसा बलिका गृह अनाथालय में कार्यरत महिला द्वारा आज सुबह एक दस वर्षीय बच्ची को ईलाज के लिए भर्ती कराया गया |सदर अस्पताल के महिला वार्ड में बेड से हाथ और पाव में रस्सी बांधकर इस बच्ची का ईलाज करवा रही है।सहरसा सदर अस्पताल में बलिका गृह अनाथालय से तीन बच्ची डायरिया की शिकायत पर भर्ती हुई,जिसमे से एक बच्ची को अनाथालय में कार्यरत महिला कर्मी ने बच्ची के हाथ और पैर को सुबह से ही बेड में बांधकर ईलाज करवा रही है।

क्या कहते है उपाधीक्षक

जब इस बाबत अस्पताल उपाधीक्षक से पूछा गया तो पहले तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए देखने की बात कही और जब जाकर बेड से बंधे बच्चे को देखा तो पहले तो उन्होंने बेड से बच्ची का हाथ ,पैर खुलवाया और उन्होंने वंहा कार्यरत महिला से कहा ये बिलकुल अमानवीय ब्यवहार है और कर रही थी |उपाधीक्षक ने कहा की बाल गृह में कार्यरत महिला के खिलाफ करवाई होगी,हम इसके खिलाफ बालिका गृह के अधीक्षिका को लिखकर देने की बात कहे |

क्या कहती है कार्यरत महिला कर्मी 

अस्पताल में मौजूद लोगों ने बताया की आज सुबह से ही बांध कर इस बच्ची का ईलाज कराया जा रहा था  है |वहाँ कार्यरत बालिका गृह कि महिला कर्मी से जब इस बच्ची के बारे में पूछा गया तो पहले तो वो कुछ गुस्से में आ गई और बार-बार किसी के बात करवा देती हूँ बोल रही थी |लेकिन जब उसने जवाब दिया तो उसका जवाब सुन आप भी हैरान हो जायेंगे …इसे डायरिया हो गया,उल्टी और दस्त होता था इसलिए अस्पताल लेकर आई,हाथ पैर बाँधने के बारे में कहा की खोलने पर ये बाहर भाग जाती है,इसलिए बांधना पड़ता है।

शायद सदर अस्पताल सहरसा के डायरिया वार्ड में इलाजरत यह मासूम बच्ची शायद यही सोचती हो की एक तो भगवान ने अनाथ किया,ऊपर से दुर्भाग्यवश बलिकागृह अनाथालय पहुँच गयी,और अब डायरिया ने बीमार कर दिया….