घोड़ा पर होगा माँ दुर्गा का आगमन, मुर्गा पर प्रस्थान !

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मुकेश कुमार मिश्र : शारदीय नवरात्र एक अक्तूबर से प्रारम्भ हो रही हैं। ओर ग्यारह अक्तूबर को विजयादशमी हैं।परम शक्ति माँ दुर्गा की आराधना के लिए नवरात्रा सर्वोत्तम समय माना जाता हैं।इसमें भी शारदीय नवरात्रा का सर्वाधिक महत्व है।यह देश के अधिकाधिक भागों में बहुलांश धर्मप्रेमी लोगों के द्वारा किया जाता हैं।विदेशों में भी रहने वाले भारतीय इस महाव्रत को करते हैं।कहा जाता है कि भगवान राम ने भी नवरात्रा कर देवी को प्रसन्न कर विजयादशमी के दिन रावण का संहार किया था।
श्रद्धा विश्वास से उर्जा और शक्ति की देवी दुर्गा की उपासना से आज भी भक्त  शांति और आत्म बल प्राप्त करते हैं। शारदीय नवरात्रा प्रारंभ होने के पूर्व लोगों के दिलों में यह जिज्ञासा बनीं रहती हैं कि माँ दुर्गा अपना पूरा परिवार किस वाहन पर सवार होकर आएगी ओर किस वाहन से लौटेंगी। माँ दुर्गा के आगमन एवं प्रस्थान से ही आगामी वर्ष के अच्छे बुरे फल का अंदाज लगाया जा सकता हैं।koshixpress

परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज
परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज
श्री शिव शक्तियोगपीठाधीश्वर ( नवगछिया भागलपुर बिहार ) परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज ने बताया कि इस वर्ष नवरात्रा कलश स्थापना अशि्वन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा एक अक्तूबर शनिवार को होने के कारण शास्त्रों में माँ दुर्गा का आगमन ” घोड़ा” पर हैं। जिसका फल होता हैं कि किसी बड़े राष्ट्र नेता का प्रयाग, सरकार को विरोध का सामना करना पडेगा,राजा को हानि, शासन एवं सत्ता के लिए अशुभ माना जाता हैं।लेकिन आमलोगों के लिये शुभ संकेत है। विजयादशमी ग्यारह अक्तूबर मंगलवार को हैं। माँ दुर्गा अपने पूरे परिवार के साथ ” मुर्गा ” पर सवार होकर लौटेगी। जिसका फल होता हैं। राष्ट्र ओर जनमानस के बीच विकलता, अन्तर युद्ध,अशांति, क्षौभ,आदि।
इस बार दस दिनों का नवरात्रा होगी
द्वितीया तिथि दो दिन हैं। कई साल बाद इस तरह का संयोग बना है।कुल मिलाकर असुर पर सुर, बुराई पर अच्छाई के विजय का प्रतीक नवरात्रा आत्मसाधना हैं। माँ दुर्गा का आगमन एवं प्रस्थान ‘वार ‘( दिन ) से जुड़ी हुई हैं। यदि रविवार व सोमवार को पूजा प्रारंभ होती हैं तो माँ दुर्गा हाथी पर, शनिवार व मंगलवार को घोड़ा पर, गुरुवार व शुक्रवार को डोला पर,ओर बुधवार को पूजा प्रारंभ होने पर माँ दुर्गा नौका पर सवार होकर आती हैं।