राज्य खेल पुरस्कार घोटाले का तार जुड़ा सहरसा से !

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राज्य में एक बार फिर रिजल्ट टापर घोटाले की तरह ही खेल सम्मान घोटाले का मामला सामने आने के बाद है सरकारी महकमें में हलचल मच गई है। इस खेल घोटाले का तार सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल के नगर पंचायत से जुड़ गया है |

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सिमरी बख्तियारपुर से दो खिलाड़ीयों को मिला सम्मान में एक का नाम जुड़ा फर्जी में

यहां के जिन दो खिलाड़ीयों को खेल सम्मान मिला है उनमें एक खिलाड़ी नगर पंचायत के मेन रोड निवासी अब्दुल रहमान का पुत्र मो नौशाद आलम एवं दुसरा आजाद नगर गंज निवासी मो मैराज आलम सामिल है मो नौशाद आलम के फर्जी होने की बात सामने आई है। इसके अलावे राज्य के पांच अन्य खिलाड़ीयों का नाम फर्जी होने की बात सामने आई है। जब संवाददाता ने दोनो खिलाड़ीयों से इस संबंध में जानकारी लेना चाहा तो मो मैराज आलम ने सभी कागजात व प्रमाणपत्र मिडिया को दिखाये लेकिन मो नौशाद आलम मिडिया के समाने नही आये उनके परिजनो ने अनेक बहाने बना कर टाल मटौल कर गये की वे घर में नही है । मो नौशाद आलम के बारे में कहा जाता है कि ये हरियाणा के पंचकुला में आयोजित 16वें नेशनल पारा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 1600 मीटर रिले दौर में भाग लिया जिसमे इन्हे मेडल भी मिला । ये बात सामने आ रही है कि बिना मेडल जीते ही इस दिव्यांग खिलाड़ी को खेल सम्मान दे दिया गया है। जबकि इनके बारे में मिली जानकारी के अनुसार इनको कोई मेडल नही मिला है साथ ही इनके पंचकुला जाने के बारे में भी संदेह किया जा रहा है।

इस संबंध में सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडलाधिकारी सुमन प्रसाद साह से पुछे जाने पर बताया की इस संबंध में कोई जानकारी नही है अगर ऐसा है तो उस फर्जी खिलाड़ी पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।koshixpress

खेल दिवस पर राज्य के 259 खिलाड़ीयों को दिया गया था खेल पुरस्कार

विदित हो कि खेल पुरस्कार प्राप्त खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी मिलने में आसानी होती है। आशंका है कि यह घोटाला भी इसी लिए किया गया है। बताया जाता है कि खेल पुस्कारों का यह घोटाला सालों से चल रहा है।

कैसे हुआ खुलासा

एक जानकारी के मुताबिक जिन खिलाड़ियों को खेल सम्मान दिए गए है। उनमें से किसी ने भी पंचकुला में हुई प्रतियोगिता में मेडल नहीं जीता था। कुछ तो प्रतियोगिता में शामिल भी नही हुए थे। विजेताओं की सूची इंटरनेट पर आने के बाद असली विजेताओं से मिलान करने पर इसका खुलासा हुआ। इसकी जानकारी खेल सम्मान समारोह से पहले ही खेल प्राधिकरण को मिल गई थी। लेकिन मामले को दबा दिया गया।koshixpress

कब हई इस पुरस्कार की शुरूआत

बिहार सरकार ने 2007 से इन पुरस्कारों की शुरुआत की थी। इसमें अंतराष्ट्रीय या राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक पाने वाले खिलाड़ियों को अधिकतम पांच लाख तक की राशि भी दी जाती है। पुरस्कार कई श्रेणियों में दिए जाते है पिछले सप्ताह 29 अगस्त को खेल दिवस पर बिहार सराकर ने राज्य के 359 खिलाड़ियों को खेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।बताया जाता है कि बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से यह घोटाला हुआ है। पुरस्कार के लिए आवेदनों की जांच की जिम्मेदारी उन्ही के पास है। प्रमाण पत्रों की जांच में जिला खेल पदाधिकारी व खेल सचिव कार्यालय की भूमिका अहम रहती है। कोच, प्रशिक्षक व सिलेक्टर्स से भी कागजात वेरीफाई कराए जाते है। लेकिन इस बार नेशनल विनर्स की सूची इंटरनेट पर डाले जाने के बाद असली विनर्स से मिलान करने पर खुलासा हुआ।koshixpress

कैसे मिलता है यह सम्मान

सरकार समारोह से दो तीन माह पहले राज्य के खिलाड़ियों से आवेदन लेती है। किसी खेल में क्या उपलब्धि है यह खिलाड़ी को प्रमाण पत्र के साथ देना पड़ता है। प्रमाण पत्र को जिला खेल पदाधिकारी या संबंधित खेल के सचिव से अनुप्रमाणित करवाना पड़ता है।