अपने घरों को लौटने लगे बाढ प्रभावित,बंद हो गये राहत शिविर !

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मुकेश कुमार मिश्र : बिहार में गंगा से मची तबाही के बाद अपने आशियाने को छोड़ राहत शिविरों में रह रहे प्रभावित लोग अब अपने धीरे-धीरे घरों को लौटने लगे है |खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड में बाढ के कहर से अब लोग मुक्त हो चले हैं।लेकिन गड्ढों में फँसे पानी के दुर्गंध ने बाढ पीड़ितों का जीना मुहाल कर रखा है।इस बीच अब धीरे धीरे बाढ प्रभावित लोग अपने घरों में लौटने लगे हैं।
प्रशासन द्वारा 20 अगस्त से दिन रात चलाये गये राहत एवं बचाव का कार्य से अब कर्मियों को धीरे धीरे छुट्टी मिलने लगा है।इस बीच बाढ प्रभावित लोगों के अपने घरों को लौट जाने के कारण प्रखंड में चल रहे कुल 27 राहत शिविरों में से 24 को अब बंद कर दिया गया है।वहीं शेष बचे 3 राहत शिविरों को भी अगले दो दिनों में बंद करने की प्रबल संभावना बन चुकी है।
बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री ने रविवार को जिला मुख्यालय में जिला पदाधिकारी के साथ साथ सभी अधिकारियों की बैठक में बाढ से हुई क्षति का आकलन तैयार करने के पश्चात अनुश्रवण समिति की बैठक में पारित सूची को भेजने का निर्देश दिया।वहीं मंत्री जी के जिला छोड़ने के साथ ही डी एम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी राहत शिविरों को बंद करने की प्रक्रिया शुरु कर दिया जाय।इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि अब प्रशासन शिविरों की बजाय क्षति के आकलन पर तेजी से काम करना चाह रही है।परबत्ता में लगार के दो शिविरों तथा कज्जलवन गांव के बाढ पीड़ितों के लिये बनाये गये एक शिविर को छोड़कर सभी राहत शिविरों को बंद कर दिया गया।
इन शिविरों में रहने वाले बाढ पीड़ितों के बीच अब तक महिलाओं के लिये 1738 साड़ी – ब्लाउज – पेटीकोट, पुरुषों के लिये 2107 लूँगी – गंजी – गमछा,बालकों के लिये 631 निक्कर – टी शर्ट तथा बालिकाओं के लिये फ्रॉक – चड्ढी तथा 2418 थाली – कटोरा – ग्लास का वितरण किया गया।वहीं बाढ पीड़ितों की सेवा में अभी 47 नाव की सेवाएँ दी जा रही है।
बाढ राहत केन्द्रों के बंद होने से इसमें प्रतिनियुक्त शिक्षकों को भी राहत मिलने लगा है।लेकिन जिन पंचायत सचिवों,राजस्व कर्मचारियों,विकास मित्रों,टोला सेवकों, ग्रामीण आवास सहायकों को बाढ से प्रभावित लोगों के क्षति के आकलन में लगाया गया है उनका काम अभी चरम पर चल रहा है।इस दौरान बाढ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार कार्य करते रहने से कई कर्मियों का स्वास्थ्य खराब हो गया।